पुणे : पुणे के पास मोशी कचरा प्रसंस्करण इकाई में इमारत ढहने की घटना में मरने वालों की संख्या शनिवार को बढ़कर आठ हो गई है जबकि मलबे में फंसे अनुमानित 23 लोगों में से 14 को सुरक्षित निकाल लिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। पिंपरी चिंचवड नगर निगम (पीसीएमसी) के आयुक्त विजय सूर्यवंशी ने बताया कि घटना के तीन दिन बाद भी एक व्यक्ति लापता है और उसकी तलाश जारी है।
मोशी में स्थित पीपीएमसी के ’वेस्ट-टू-एनर्जी’ (डब्ल्यूटीई) संयंत्र की तीन मंजिला प्रशासनिक इमारत पर कचरे का बड़ा ढेर गिर गया था, जिसके कारण वह ढह गई थी। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं और विशेष ध्वस्तीकरण मशीनों समेत करीब 15 खुदाई मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने घटनास्थल का दौरा कर बचाव अभियान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि लगातार जारी भारी बारिश और कचरे के ढेर से निकल रही जहरीली गैसों के कारण बचाव अभियान में परेशानी आ रही है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ’’इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, ’’सरकार और नगर निगम की ओर से आर्थिक सहायता दी जा रही है।
बचाव अभियान बेहद जटिल
अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन अब तक का सबसे कठिन बचाव अभियान साबित हो रहा है। इसके मुख्य कारण हैं। तकनीकी भाषा में इसे 'केंटिलीवर कोलैप्स' कहा जा रहा है, जहां इमारत की छतें ताश के पत्तों की तरह नहीं, बल्कि तिरछी होकर हवा में लटक गई हैं। ढही हुई इमारत के चारों ओर कचरे का अंबार है, जिससे विशेष ध्वस्तीकरण मशीनों और 15 खुदाई मशीनों (Excavators) को अंदर ले जाने और चलाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है।
प्रशासन ने क्या कहा?
पिंपरी-चिंचवड़ के महापौर रवि लांडे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बचाव दल सभी को निकालने की कोशिशें कर रहे थे। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन फिलहाल हमारी प्राथमिकता मलबे में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है। फिलहाल, एनडीआरएफ की टीम और भारी मशीनरी के जरिए देर रात तक अभियान जारी रखने की योजना है ताकि जल्द से जल्द शेष लोगों तक पहुंचा जा सके।
