बिजनेस

Bank Deposit:बैंकों की डिपॉजिट ग्रोथ में कमी, खड़ा कर सकती है नकदी संकट-रिपोर्ट

Bank Deposit: सर्वेक्षण में 67 प्रतिशत बैंकों ने कुल जमा में चालू खाता और बचत खाता (कासा) जमा की हिस्सेदारी कम होने की बात कही है। डिपॉजिट को बढ़ाना और लोन लागत को कम रखना बैंकों के एजेंडा में सबसे ऊपर है।

Image

बैंकों के सामने खड़ा हो सकता है नकदी का संकट

Photo : iStock

Bank Deposit:बैंकों की तरफ से दिए जाने वाले लोन की ग्रोथ, डिपॉजिट से अधिक होने से बैंकिंग प्रणाली के समक्ष आने वाले समय में नकदी की चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। एक रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है।उद्योग संगठन फिक्की और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) की एक संयुक्त रिपोर्ट कहती है कि लोन ग्रोथ के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए डिपॉजिट को बढ़ाना और लोन लागत को कम रखना बैंकों के एजेंडा में सबसे ऊपर है।रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वेक्षण में 67 प्रतिशत बैंकों ने कुल जमा में चालू खाता और बचत खाता (कासा) जमा की हिस्सेदारी कम होने की बात कही है।

क्यों है रिस्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में उच्च और आकर्षक दरों के कारण सावधि जमा में तेजी आई है। भाग लेने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के 80 प्रतिशत बैंकों ने 2024 की पहली छमाही के दौरान बचत खाते एवं चालू खाते में जमा की हिस्सेदारी घटने की बात कही है। निजी क्षेत्र के भी आधे से अधिक बैंकों ने कासा जमा कम होने की सूचना दी है।इस सर्वेक्षण का 19वां दौर जनवरी से जून, 2024 के दौरान चला। सर्वेक्षण में सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और विदेशी बैंकों सहित कुल 22 बैंकों ने भाग लिया। इनकी कुल बैंकिंग उद्योग में करीब 67 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

NPA घटा

रिपोर्ट के मुताबिक, 71 प्रतिशत बैंकों ने पिछले छह महीनों में गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के स्तर में कमी की सूचना दी है। सार्वजनिक क्षेत्र के 90 प्रतिशत बैंकों का एनपीए इस अवधि में घटा है जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों में से 67 प्रतिशत ने कमी का हवाला दिया है।सर्वेक्षण के निष्कर्ष बताते हैं कि बुनियादी ढांचा, धातु, लोहा और इस्पात जैसे क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक ऋण मांग में निरंतर वृद्धि हुई है। इसके पीछे बुनियादी ढांचे क्षेत्र पर सरकार के पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देना एक कारण हो सकता है।रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों और वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच साझेदारी में नवाचार को बढ़ावा देने, सेवा वितरण में सुधार करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article