Share Market Trend Analysis : भारतीय शेयर बाजार की लगातार कमजोर चाल के बीच दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा ने बाजार के प्रदर्शन को लेकर बड़ा खुलासा किया है। पिछले दो साल से Nifty की सुस्त चाल के लिए जहां निवेशक जियो-पॉलिटिक टेंशन, महंगे क्रूड ऑयल (Crude Oil), विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली, अमेरिकी टैरिफ और कमजोर आय जैसे कारण गिना रहे हैं, वहीं शंकर शर्मा के मुताबिक असली कहानी कुछ और है।
क्या है शंकर शर्मा की थ्योरी?
शंकर शर्मा का कहना है कि बाजार की मौजूदा कमजोरी किसी एक बड़ी समस्या का नतीजा नहीं है। इसके पीछे उस तेज रैली का असर है, जो कोविड के बाद भारतीय शेयर बाजार में देखने को मिली थी। शंकर शर्मा अपनी चर्चित “Lake of Returns Theory” का हवाला देते हुए कहते हैं कि लंबे समय तक जोरदार रिटर्न के बाद बाजार में एक ऐसा दौर आता है, जब रिटर्न बेहद कम या लगभग नगण्य हो जाते हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि अगर पुराने लार्ज कैप में पहले जैसी तेजी नहीं रही, तो आखिर पैसा कहां बनेगा? शंकर शर्मा की नजर में इसका जवाब छोटी कंपनियों और उन कारोबार में छिपा है, जो इनोवेशन और इंटरनेशनल एक्सपेंशन पर काम कर रहे हैं।
Nifty की कमजोरी की वजह क्या है?
भारतीय शेयर बाजार की कमजोरी समझाने के लिए इस समय कई कारण दिए जा रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, AI रैली की वजह से IT स्टॉक्स में बिकवाली, अमेरिका क अस्थिर ट्रेड पॉलिसी, क्रूड के बढ़ते दाम जैसी वजह निफ्टी के नेगेटिव रिटर्न की वजह बताई जा रही है। लेकिन शंकर शर्मा इन वजहों को मुख्य कारण नहीं मानते। शंकर शर्मा के मुताबिक ये बाजार की कमजोरी को समझाने वाले सुविधाजनक कारण हैं। उनके मुताबिक असली वजह यह है कि भारतीय बाजार और खासतौर पर बड़ी कंपनियों का कमजोर रिटर्न आउटलुक। शंकर शर्मा का कहना है कि उन्होंने 2024 में ही अनुमान लगाया था कि भारत के बड़े इंडेक्स आने वाले दिनों में अमेरिकी बाजार की तुलना में कमजोर रहेंगे। शर्मा के मुताबिक मौजूदा कमजोरी किसी अचानक आई घटना की वजह से नहीं, बल्कि एक बड़े रिटर्न सायकल (Return Cycle) का हिस्सा है।
बड़ी कंपनियों की ग्रोथ पर क्यों सवाल?
शंकर शर्मा की चिंता केवल शेयर बाजार की चाल को लेकर नहीं है। वे भारतीय कंपनियों के बिजनेस मॉडल में भी एक बड़ी चुनौती देखते हैं। उनके मुताबिक, देश की कई बड़ी कंपनियों ने पिछले कई वर्षों में मुख्य रूप से घरेलू बाजार की खपत के भरोसे ग्रोथ कर रही हैं। लेकिन अब इस ग्रोथ की सीमाएं नजर आने लगी हैं। उन्होंने बैंकिंग सेक्टर का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक पिछले करीब 30 वर्षों में भारतीय बैंकों के पास पब्लिक सेक्टर बैंकों से मार्केट शेयर हासिल करने का बड़ा मौका था। इससे प्राइवेट बैंकों समेत कई कंपनियों को तेजी से विस्तार मिला। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। अब बैंकों के लिए तेजी से एसेट्स बढ़ाना और उसी समय मार्जिन्स को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
भारतीय कंपनियां ग्लोबल क्यों नहीं बन रहीं?
शंकर शर्मा ने भारतीय कंपनियों की एक और कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारतीय कंपनियां ग्लोबलाइजेशन नहीं कर पा रही हैं। वे अपना निजी अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि जब वे दुबई (Dubai) में कोई इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं, तो उन्हें कोई भारतीय विकल्प नहीं मिला क्योंकि, भारत की EV कंपनियां उस स्तर पर मौजूद ही नहीं हैं। उनके मुताबिक यह सिर्फ किसी एक इंडस्ट्री की कहानी नहीं है। यह दिखाता है कि भारतीय कंपनियां अब भी घरेलू बाजार पर निर्भर हैं और ग्लोबल मार्केट में मौजूदगी नहीं बना पाई हैं। उनके मुताबिक अब असली ग्रोथ के लिए कंपनियों को डोमेस्टिक मार्केट से आगे जाना होगा। उन्हें इंटरनेशनल बिजनेस और इनोवेशन पर ज्यादा खर्च करना होगा।
अब कहां बनेगा पैसा?
शंकर शर्मा किसी स्टॉक की बात नहीं करते हैं। बल्कि, वे एक इन्वेस्टमेंट थीम बताते हुए कहते हैं कि वे इस साल मार्च से खास तौर पर स्माॅल कैप कंपनियों को लेकर बुलिश रहे हैं और उनके अनुसार अब तक यह रणनीति बेहतर तरीके से काम कर रही है। उनका मानना है कि छोटी कंपनियां बड़ी कंपनियों की तुलना में इनोवेशन के मामले में ज्यादा तेजी दिखा रही हैं। खास तौर पर वे कंपनियां, जो नए प्रोडक्ट बना रही हैं, इंटरनेशनल मार्केट्स में विस्तार कर रही हैं और अपने बिजनेस को भारत से बाहर ले जाने की कोशिश कर रही हैं, उनके लिए ग्रोथ के नए मौके बन सकते हैं।
म्यूचुअल फंड को लेकर भी दी चेतावनी
रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए शंकर शर्मा की राय और भी अहम है। उन्होंने म्यूचुअल फंड्स के जरिए इक्विटी में निवेश पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि टैक्स और रिस्क को ध्यान में रखने के बाद ही रिटेल इन्वेस्टर्स को म्यूचुअल फंड निवेश में उतरना चाहिए। क्योंकि छोटे निवेशकों के लिए रिटर्न ऑन कैपिटल से ज्यादा जरूरी रिटर्न ऑफ कैपिटल अहम हो जाता है। उनके कहने का मतलब है कि कई बार निवेशक ऐसी स्थिति में फंस जाते हैं, जहां उन्हें नुकसान में ही पैसा निकालना पड़ जाता है। ऐसे में ज्यादा रिटर्न से भी ज्यादा जरूरी अपनी मूल पूंजी को बचाए रखना है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
शंकर शर्मा के मुताबिक लॉन्ग टर्म में अधिकांश भारतीय निवेशकों के लिए फिक्स्ड इनकम, Gold और रियल एस्टेट के कुछ हिस्से ज्यादा टिकाऊ रिटर्न के सोर्स साबित हो सकते हैं। उनका मानना है कि इक्विटी मार्केट उन निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त है, जिनके पास लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की क्षमता हो और जो बाजार के तेज उतार-चढ़ाव को झेल सकते हों। यानी शंकर शर्मा की रणनीति का मूल संदेश यह है कि बाजार में सिर्फ इंडेक्स देखकर अवसर तलाशने के बजाय यह देखना जरूरी है कि ग्रोथ आखिर किस कंपनी में और किस बिजनेस मॉडल में पैदा हो रही है।
