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SIP Vs Buying The Dip : मार्केट गिरने पर खरीदें या हर महीने रेगुलर निवेश, क्या ज्यादा फायदे का सौदा?

बहुत से निवेशक इस उलझन में रहते हैं कि उन्हें कब निवेश करना चाहिए। मसलन, जब बाजार में बड़ी गिरावट आए, तब निवेश करें या फिर उन्हें हर महीने रेगुलर निवेश करना चाहिए। हिस्टोरिकल डेटा का गणित क्या कहता है?

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सिप हो या डिप निवेश करते रहना ज्यादा जरूरी

SIP Vs Buying The Dip : शेयर बाजार में जब भी 5% या 10% की गिरावट आती है, सोशल मीडिया और निवेशकों के बीच एक सलाह सबसे ज्यादा सुनाई देती है, "Buy the Dip", यानी बाजार गिरने पर खरीदारी करें। दूसरी तरफ करोड़ों निवेशक हर महीने बिना बाजार की दिशा देखे म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश करते रहते हैं।

ऐसे में एक आम निवेशक के दिमाग में यह सवाल उठता है कि आखिर कौन-सी रणनीति ज्यादा बेहतर है? क्या बाजार गिरने का इंतजार करके निवेश करना ज्यादा रिटर्न देता है या फिर हर महीने नियमित SIP करना? इस सवाल का जवाब निवेश के गणित, ऐतिहासिक आंकड़ों और कई वैश्विक अध्ययनों में छिपा है।

पहले समझिए दोनों रणनीतियां

SIP (Systematic Investment Plan) में निवेशक हर महीने एक तय तारीख को निश्चित रकम निवेश करता है। बाजार ऊपर हो या नीचे, निवेश जारी रहता है। वहीं, Buying the Dip रणनीति में निवेशक बाजार में बड़ी गिरावट का इंतजार करता है और तब एकमुश्त रकम निवेश करने की कोशिश करता है। दोनों रणनीतियों का मकसद कम कीमत पर निवेश करना और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न कमाना होता है, लेकिन दोनों का तरीका अलग है।

क्यों आसान नहीं है 'डिप' पकड़ना?

सुनने में बाजार गिरने पर खरीदारी करना आसान लगता है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर यहां सबसे बड़ी चुनौती यही है कि किसी को पहले से पता नहीं होता कि बाजार कितना गिरेगा और कब रिकवरी शुरू होगी। कई बार निवेशक 10% गिरावट का इंतजार करते रहते हैं, जबकि बाजार पहले 15-20% चढ़ जाता है। बाद में आने वाली गिरावट भी पहले के मुकाबले ऊंचे स्तर पर होती है। ऐसे में इंतजार करने की कीमत चुकानी पड़ सकती है।

SIP में मिलता है कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा

SIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक हर तरह के बाजार में निवेश करता रहता है। जब बाजार गिरता है, तो उसी रकम में ज्यादा यूनिट मिलती हैं और जब बाजार महंगा होता है, तो कम यूनिट मिलती हैं। लंबे समय में इससे खरीद की औसत लागत संतुलित हो जाती है। इसे Cost Averaging कहा जाता है। यही, वजह है कि SIP निवेशकों को बाजार की टाइमिंग करने की जरूरत नहीं पड़ती।

डिप पर खरीदने में कैश ड्रैग फैक्टर

Buying the Dip रणनीति में निवेशक अक्सर नकद पैसा अपने खाते में रखकर बाजार गिरने का इंतजार करता है। यदि बाजार में लंबे समय तक अपेक्षा के मुताबिक गिरावट नहीं होती है, तो यह पैसा निवेश नहीं हो पाता। इस दौरान निवेश से मिलने वाले संभावित रिटर्न और कंपाउंडिंग का लाभ भी नहीं मिलता है। निवेश की भाषा में इसे कैश ड्रैग कहा जाता है।

रिसर्च क्या कहती है?

दुनिया की कई प्रमुख एसेट मैनेजमेंट कंपनियां और निवेश विशेषज्ञ लंबे समय से एक सिद्धांत दोहराते रहे हैं। "Time in the Market is more important than Timing the Market." यानी आपका पैसा बाजार में कितने लंबे समय तक रहता है, यह अक्सर इस बात से ज्यादा अहम है कि आपने किस दिन निवेश किया।

हिस्टोरिकल डेटा के अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि शेयर बाजार के सबसे तेज उछाल वाले कई दिन बड़ी गिरावट के तुरंत बाद आते हैं। यदि निवेशक बाजार से बाहर बैठा रहता है, तो वह इन तेजी वाले दिनों का फायदा नहीं उठा पाता।

पैमानाSIPBuying the Dip
निवेश का तरीकाहर महीने तय रकमगिरावट आने पर एकमुश्त निवेश
बाजार की टाइमिंगजरूरी नहींजरूरी
अनुशासनआसानअपेक्षाकृत कठिन
Cash Dragनहीं के बराबरहो सकता है
कंपाउंडिंगजल्दी शुरूइंतजार के कारण देर से शुरू हो सकती है
किसके लिए बेहतरनियमित आय वाले निवेशकअतिरिक्त नकदी रखने वाले निवेशक

कौन सी रणनीति बेहतर?

ज्यादातर वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि दोनों रणनीतियों का संतुलित उपयोग किया जाना चाहिए। यदि आपकी नियमित आय है, तो SIP जारी रखें। वहीं यदि बोनस, इंसेंटिव या किसी अन्य स्रोत से अतिरिक्त रकम मिले और बाजार में बड़ी गिरावट आए, तो उस अतिरिक्त रकम को टॉप-अप निवेश के रूप में लगाया जा सकता है। इससे नियमित निवेश भी चलता रहता है और गिरावट में निवेश का अवसर भी मिल जाता है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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