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2 साल में Nifty का जीरो रिटर्न! डरें या लालची बनें, क्या बता रहा इतिहास और वैल्यूएशन का गणित?

भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स Nifty ने पिछले 2 साल में 0 रिटर्न दिया है। वैल्यूएशन और हिस्टोरिकल ट्रेंड को देखते हुए निवेशकों को अभी डरना चाहिए या लालची बनना चाहिए?

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दो साल से निवेशकों को मिल रही निराशा

Nifty Zero Return in 2 Years : भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए पिछले दो-तीन वर्ष भारी उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। सितंबर 2024 में Nifty ने 26,277 के शिखर छुआ इसके बाद जनवरी 2026 में दोबारा 26,373 का रिकॉर्ड बनाया। इस तरह दो साल से Nifty एक दायरे में कैद है। इसके चलते 2 साल में मोटेतौर पर निफ्टी का रिटर्न शून्य रहा है। यानी जिन निवेशकों ने जून 2024 में निफ्टी में निवेश किया, उन्हें आज शून्य या नेगेटिव रिटर्न (Flat-to-Negative) मिला है। बहरहाल, इतिहास के पन्ने और बाजार के बुनियादी आंकड़े (Fundamentals) कुछ बेहद दिलचस्प संकेत दे रहे हैं।

क्या कहता है इतिहास?

एडलवाइस म्यूचुअल फंड (Edelweiss Mutual Fund) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2001 के बाद से ऐसे 11 दौर आए हैं, जब निफ्टी ने दो साल के चक्र में लगभग शून्य रिटर्न दिया। लेकिन, राहत की बात यह है कि हर ऐसी मंदी या ठहराव के बाद बाजार ने जोरदार वापसी की है। यानी पिछले करीब ढाई दशक का अतीत देखें, तो जब-जब निफ्टी 2 साल थमा, तब-तब आई बंपर तेजी आई है।

50% तक भागा बाजार

जून 2001 से जून 2003 के दो साल के ठहराव के बाद अगले एक साल में निफ्टी ने 33% का रिटर्न दिया और 3 साल का सीएजीआर (CAGR) 40% रहा। इसी तरह अगस्त 2018 - अगस्त 2020 के दौरान ठहराव आया। लेकिन, इसके बाद अगले 12 महीनों में निफ्टी ने 50% का छप्परफाड़ रिटर्न दिया। इस तरह हिस्टोरिकल डेटा बताता है कि जब भी बाजार अटका है, तो फिर ऊंची उड़ान भी भरी है।

संकट के दौर में सबसे ज्यादा तेजी

हिस्टोरिकल आंकड़े यह भी बताते हैं कि बाजार में सबसे बड़ी तेजी के दिन भी संकट के दौर में देखने को मिलते हैं। यानी खराब दौर में बाजार से डरकर बाहर बैठने वाले निवेशक असल में उस तेजी से चूक जाते हैं, जो असल में शानदार रिटर्न देने वाली होती है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो दशकों में निफ्टी के 30 सबसे अच्छे सिंगल ट्रेडिंग दिन (Best Days) में से 96% दिन गंभीर संकट के दौरान ही आए हैं।

क्या कहता है वैल्यूएशन का गणित?

Nifty के दो साल के ठहराव की वजह से तमाम लार्जकैप का वैल्यूएशन वाजिब स्तर पर आ गया है। फिलहाल, लार्जकैप P/E Ratio 17x पर आ गया है, जो इसके 7 साल के औसत (18.8x) से नीचे है। इसी तरह निफ्टी अपने इतिहास के मुकाबले करीब 16% डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। लार्जकैप के 44% शेयर और स्मॉलकैप के 53% शेयर अपने 10 साल के मीडियन वैल्यूएशन से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। ग्लोबल स्तर पर भारतीय बाजार अब आकर्षक हो गया है। MSCI India का इमर्जिंग मार्केट्स के मुकाबले प्रीमियम घटकर 24% रह गया है। जबकि, 15 साल का औसत 56% है। वहीं, MSCI World के मुकाबले भारत अब 5% के डिस्काउंट पर है।

क्यों 2013 जैसे कमजोर नहीं हालात?

कई लोग इस गिरावट की तुलना 2013 के संकट से कर रहे हैं, जब विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे थे। लेकिन आज भारत के फंडामेंटल्स कहीं ज्यादा मजबूत हैं।

आर्थिक संकेतक2013-142026
महंगाई दरलगभग 10%1.9%
चालू खाता घाटा (CAD)जीडीपी का लगभग 5%0.8%
बैंकिंग एनपीएलगभग 9%करीब 2.5%
कॉरपोरेट कर्जजीडीपी का 75%करीब 52%
विदेशी मुद्रा भंडार7 महीने के आयात के बराबर10.6 महीने के आयात के बराबर
रुपये की कमजोरी15–23%लगभग 7%
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है, जिससे बाजार को दीर्घकालिक आधार मिल सकता है।

एक्सपर्ट्स की राय दो हिस्सों में बंटी

तेजी का पक्ष रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा अवसर बन रहे हैं। उनका कहना है कि लार्जकैप कंपनियों में कीमतें पहले की तुलना में काफी आकर्षक हो गई हैं और अर्निंग आउटलुक भी बेहतर दिख रहा है। दूसरी ओर कुछ ब्रोकरेज हाउस अभी भी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि घरेलू मांग में कमजोरी, मौसम संबंधी जोखिम और कुछ सेक्टरों में ऊंचे वैल्यूएशन अभी भी चिंता का विषय हैं।

    डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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