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कहां गए वो तेजी वाले दिन... 90 दिनों में ₹55 लाख करोड़ स्वाहा, अब क्या करें निवेशक?

शेयर बाजार के लिए 2026 भारी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। साल की शुरुआत में पीक से अब तक बाजार से 55 लाख करोड़ साफ हो चुके हैं। वहीं, इस दौरान सेंसेक्स करीब 11952 अंक फिसल चुका है। जबकि, निफ्टी में 3371 अंक की गिरावट आई है। दोनों इंडेक्स शीर्ष से करीब 13% नीचे हैं।

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90 दिन में 55 लाख करोड़ साफ

Share Market के निवेशकों के लिए 2026 रोलर-कॉस्टर राइड साबित हो रहा है। जहां, साल की शुरुआत में मार्केट कैप, वैल्यूएशन और निफ्टी-सेंसेक्स अपने पीक पर थे। वहीं, साल शुरू हुए अभी पूरे 90 दिन भी नहीं बीते हैं कि बेंचमार्क इंडेक्स करीब 13% तक टूट चुके हैं। जबकि, मार्केट कैप से करीब 55 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू साफ हो चुकी है।

इंडेक्सऑल टाइम हाईआज की क्लोजिंगपॉइंट गिरावट% गिरावट
SENSEX86,159.0274,207.2411,951.7813.87%
NIFTY 5026,373.2023,002.153,371.0512.78%
1 दिसंबर, 2025 को जहां सेंसेक्स अपने शीर्ष पर पहुंचा। वहीं, 2 जनवरी, 2026 को निफ्टी ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया। 2 जनवरी ही वह दिन रहा, जब इस साल मार्केट कैप 48,201,715.67 करोड़ के पीक पर पहुंच गया। लेकिन, इसके बाद से ऐसा सिलसिला शुरू हुआ कि बाजार फिर कभी उस स्तर पर नहीं पहुंच पाया। इसके बाद बाजार को बजट का झटका लगा, फिर ट्रेड डील को लेकर बाजार गोते खाते रहा। जब ट्रेड डील पर बात बनती दिखी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हो गया। इस तरह साल के पलहे तीन महीने में ही 55 लाख करोड़ स्वाहा हो चुके हैं।

अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद कितनी गिरावट?

अमेरिका-ईरान तनाव के बाद सिर्फ एक हफ्ते में Sensex 4,354 अंक यानी 5.5% और Nifty 1,299 अंक यानी 5.3% टूट गया। Nifty 50 अपने पीक से 10% से ज्यादा नीचे है, जबकि Nifty Next 50 में करीब 15% की गिरावट आई है। सबसे ज्यादा दबाव स्मॉलकैप शेयरों पर दिखा, जहां Nifty Smallcap 250 अपने हाई से 18% से ज्यादा फिसल चुका है।

किन सेक्टर में सबसे ज्यादा नुकसान?

सेक्टर के लिहाज से Nifty Auto सबसे ज्यादा एक महीने में करीब 11% टूटा है। निफ्टी बैंक 12% नीचे है। वहीं, Nifty IT 11.57% नीचे है। पिछले एक महीने में सिर्फ PSU कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली है।

FII ने इस साल कितना बेचा?

2026 में अब तक FII ने भारतीय बाजार से कुल ₹1.04 लाख करोड़ की बिकवाली की है। मार्च में बिकवाली की रफ्तार सबसे तेज रही है। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सिर्फ पहले 9 ट्रेडिंग सेशंस में ही ₹60,269 करोड़ की बिकवाली की है।यह पिछले 14 महीनों में सबसे बड़ा आउटफ्लो है। वहीं, जनवरी में ₹35,962 करोड़ की निकासी हुई। जबकि, फरवरी में ₹22,615 करोड़ का निवेश आया।

Nifty-Sensex का वैल्यूएशन कितना घटा?

हालिया गिरावट के बाद भी भारतीय बाजार कई उभरते बाजारों के मुकाबले महंगे नजर आ रहे हैं। यही FII की बिकवाली की एक बड़ी वजह है। हालांकि, 13% की गिरावट के बाद PE valuations काफी सामान्य हो गए हैं। Nifty का PE अब 10 साल के औसत से नीचे आ गया है। यह लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए एंट्री का सिग्नल हो सकता है। Sensex और Nifty वैल्यूएशन के हिसाब से इस समय करीब 17.8x के 1-year forward PE पर ट्रेड कर रहे हैं, जो अप्रैल 2023 के बाद सबसे निचला स्तर है। यह दोनों इंडेक्स के 10 साल के औसत से नीचे है।

आम निवेशकों के लिए क्या करें?

ET Now के पैनलिस्टों के मुताबिक निवेशकों को फिलहाल अनुशासित रहकर चुनिंदा निवेश करना चाहिए। फिलहाल, लॉन्ग पोजिशन लेने से बचें और तभी लॉन्ग पोजिशन बनाएं, जब बाजार में रिकवरी कन्फर्म हो जाए। इसके साथ ही एक्सपर्ट कह रहे हैं कि निवेशकों को ऐसी गिरावट के समय निवेश के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि इतिहास गवाह है, जब भी बाजार जियोपॉलिटकल संकट में गिरते हैं, तो जैसे ही स्थिति संभलती है, तुरंत रिकवरी होती है। मसलन, 9/11 के बाद बाजार एक महीने में 6-7% गिरा था, लेकिन अगले 6 महीने में 14% चढ़ा था।

म्यूचुअल फंड निवेशक क्या करें?

ज्यादातर एक्सपर्ट फिलहाल यही सलाह दे रहे हैं कि SIP बंद न करें। गिरावट में ज्यादा यूनिट मिलते हैं, जो बाद में रैली में ज्यादा फायदा देते हैं। इसके अलावा पैनिक सेलिंग से बचें। क्वालिटी स्टॉक्स को होल्ड करें और नया निवेश तभी करें, जब निफ्टी में ठोस रिकवरी शुरू हो जाए।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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