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Explainer: वैल्यूएशन के हिसाब से 10 साल में सबसे सस्ता हुआ भारत का बाजार, फिर क्यों डर रहे निवेशक?

भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन अब आकर्षक दिखने लगा है, लेकिन निवेशकों की चिंता खत्म नहीं हुई है। तेल कीमतों में तेजी, महंगाई का दबाव और जियोपॉलिटिकल तनाव बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। यही वजह है कि सस्ता होने के बावजूद बाजार में सतर्कता बनी हुई है।

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सस्ते में मिल रहे बड़े स्टॉक्स
Authored by: Yateendra Lawaniya
Updated Mar 17, 2026, 09:07 IST

Valuation Crash in Top Stocks: भारतीय शेयर बाजार में वैल्यूएशन का दबाव अब साफ दिखने लगा है। कई दिग्गज कंपनियों के शेयर 10 साल के औसत PE से नीचे आ गए हैं, जो निवेश के मौके का संकेत देते हैं। हालांकि तेल कीमतों, महंगाई और जियोपॉलिटिकल तनाव ने निवेशकों की चिंता अभी खत्म नहीं होने दी है।

वैल्यूएशन नरम, लेकिन भरोसा नहीं

Sensex और Nifty इस समय करीब 17.8x के 1-year forward PE पर ट्रेड कर रहे हैं, जो अप्रैल 2023 के बाद सबसे निचला स्तर है। यह दोनों इंडेक्स के 10 साल के औसत से नीचे है। यह गिरावट बताती है कि बाजार अब महंगे जोन से बाहर निकलकर “फेयर वैल्यू” के करीब आ गया है। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह अभी “डीप वैल्यू” नहीं है क्योंकि कमाई (earnings visibility) को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

कंपनीCMP (₹)P/E10Y Avg PE
HDFC Bank840.6017.3623.50
ICICI Bank1272.9017.2119.67
TCS2409.2017.0526.89
Infosys1249.8017.5622.91
ITC308.2518.7225.64
LIC777.359.2713.55
Bajaj Finance878.1530.0143.82
HUL2175.7046.8359.11
Maruti Suzuki1275726.8635.51
Bharti Airtel1788.8033.2961.95

सबसे बड़ा रिस्क: कच्चा तेल और महंगाई

बाजार के लिए सबसे बड़ा खतरा इस समय क्रूड ऑयल है। अगर तेल कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर कंपनियों के मार्जिन और देश की महंगाई पर पड़ेगा। महंगाई बढ़ने से कंजम्प्शन स्लो हो सकता है और सरकार पर राहत पैकेज देने का दबाव बढ़ सकता है। इससे फिस्कल बैलेंस और ग्रोथ दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

जियोपॉलिटिकल तनाव ने बढ़ाई चिंता

मिडिल ईस्ट में तनाव और सप्लाई चेन डिसरप्शन का खतरा निवेशकों को सतर्क बना रहा है। खासकर Hormuz स्ट्रेट जैसे रूट पर जोखिम बढ़ने से तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस भी भारत को लेकर सतर्क हो गए हैं।

ब्रोकरेज का नजरिया: अभी सतर्क रहना बेहतर

Nomura ने बाजार में 5% तक और गिरावट की आशंका जताई है और Nifty का टारगेट घटाकर 24,900 कर दिया है। Citi और Morgan Stanley ने भी वैल्यूएशन मल्टीपल घटाए हैं और भारत को “overweight” से “equal-weight” किया है। इसका साफ मतलब है कि वैल्यूएशन सस्ता दिखने के बावजूद जोखिम अभी खत्म नहीं हुआ है।

FII की बिकवाली क्यों जारी

विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इसकी बड़ी वजह रुपये की कमजोरी और ग्लोबल अनिश्चितता है। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से विदेशी निवेशकों का रिटर्न कम हो जाता है, जिससे वे नए निवेश से बचते हैं।

कहां मिल सकता है मौका

एक्सपर्ट्स के मुताबिक फार्मा, बैंकिंग और FMCG सेक्टर में वैल्यूएशन बेहतर दिख रहा है। इसके अलावा ऑटो और मेटल सेक्टर में भी शॉर्ट टर्म में मौके बन सकते हैं, अगर मैक्रो स्थिर रहता है।

वैल्यू है, लेकिन ट्रिगर का इंतजार

भारतीय बाजार अब पहले जितना महंगा नहीं रहा और कई बड़े शेयर डिस्काउंट पर मिल रहे हैं। लेकिन असली सवाल यही है—क्या यह खरीदारी का सही समय है? जब तक तेल, महंगाई और जियोपॉलिटिकल हालात स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में “सस्ता” दिखने के बावजूद “भरोसा” पूरी तरह नहीं लौटेगा।

ग्लोबल मुकाबले में भारत का PE

भारतीय बाजार का 1-year forward PE करीब 17.8x पर आ गया है, जो इसके 10 साल के औसत से नीचे है। पहली नजर में यह “सस्ता” लगता है, लेकिन जब इसे ग्लोबल मार्केट्स से तुलना करते हैं तो तस्वीर थोड़ी जटिल हो जाती है। भारत का वैल्यूएशन अमेरिका जैसे विकसित बाजारों से कम जरूर है, लेकिन एशिया और इमर्जिंग मार्केट्स के कई देशों से अब भी प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। यानी गिरावट के बाद भी भारत “डिस्काउंट मार्केट” नहीं बना है, बल्कि “रिलेटिव प्रीमियम” बना हुआ है।

इंडेक्स1 Yr Forward PE10 Yr Avg PEस्थिति
S&P 50020.3219.25औसत से ऊपर
Dow Jones20.0218.34औसत से ऊपर
Nasdaq23.8825.79औसत से नीचे
Nikkei22.0618.71औसत से ऊपर
Shanghai13.7011.67औसत से ऊपर
Hang Seng10.9110.47करीब औसत
FTSE 10013.4112.68औसत से ऊपर
CAC 4014.8114.07औसत से ऊपर
DAX14.8413.46औसत से ऊपर
MSCI World18.8317.63औसत से ऊपर
MSCI EM11.9312.21औसत से नीचे
MSCI India19.2120.24औसत से नीचे
Sensex17.8019.80औसत से नीचे
Nifty17.8018.99औसत से नीचे

भारत का PE अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे जरूर आया है, लेकिन MSCI Emerging Markets (11.9x) जैसे इंडेक्स के मुकाबले अभी भी काफी महंगा है। यही वजह है कि विदेशी निवेशक भारत में आक्रामक खरीदारी नहीं कर रहे। उन्हें कम वैल्यूएशन वाले दूसरे उभरते बाजार ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं।

अमेरिका vs भारत: फर्क समझना जरूरी

अमेरिकी बाजार (S&P 500, Dow Jones) हाई वैल्यूएशन पर इसलिए टिके रहते हैं क्योंकि वहां टेक्नोलॉजी, AI और मजबूत अर्निंग्स हैं। भारत में ग्रोथ स्टोरी मजबूत है, लेकिन अभी कमाई पर अनिश्चितता, तेल कीमतों का दबाव और महंगाई का खतरा वैल्यूएशन को सीमित कर रहा है।

एशिया में भारत क्यों अब भी प्रीमियम

चीन (Shanghai) और हांगकांग (Hang Seng) जैसे बाजार काफी कम PE पर ट्रेड कर रहे हैं, लेकिन वहां ग्रोथ और पॉलिसी रिस्क ज्यादा है।भारत में राजनीतिक स्थिरता, घरेलू डिमांड और लॉन्ग टर्म ग्रोथ की वजह से निवेशक प्रीमियम देने को तैयार रहते हैं। इस तरह भारतीय बाजार का वैल्यूएशन नरम जरूर हुआ है, लेकिन यह “डीप डिस्काउंट” नहीं है। ग्लोबल तुलना बताती है कि भारत अब भी एक “प्रीमियम ग्रोथ मार्केट” है। ऐसे में निवेश का फैसला सिर्फ PE देखकर नहीं, बल्कि तेल कीमतों, ग्लोबल जोखिम और अर्निंग ट्रेंड को देखकर करना होगा।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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