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सेंसेक्स-निफ्टी बता रहे अलग कहानी, डेटा चौंकाने वाला… टॉप 1000 में 735 शेयर 10% से ज्यादा टूटे

भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स की चाल से बाजार में रिकवरी दिख सकती है, लेकिन ब्रॉडर मार्केट की तस्वीर बेहद चौंकाने वाली है। आंकड़े बताते हैं कि NSE के टॉप 1000 शेयरों में से 735 सितंबर 2024 के स्तर से नीचे आ चुके हैं।

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ब्रॉडर मार्केट में भारी गिरावट

Sensex-Nifty vs Broad Market: शेयर बाजार में ज्यादातर निवेशकों की नजर बेंचमार्क इंंडेक्स निफ्टी और सेंसेक्स तक रहती है। लेकिन, निफ्टी में जहां 50 कंपनियों की हलचल का पता चलता है, वहीं, सेंसेक्स में 30 कंपनियों की जानकारी मिलती है। जबकि, बाजार में करीब 5000 कंपनियां लिस्टेड हैं। इन 5000 में से 1000 टॉप कंपनियों का हाल देखते हैं, तो बेहद चौंकाने वाली तस्वरी सामने आती है। क्योंकि, सितंबर 2024 के बाद से सेंसेक्स और निफ्टी में जहां एक सीमित गिरावट दिखी है। वहीं, ब्रॉडर मार्केट में भारी बिकवाली ने सैकड़ों शेयरों को गहरे नुकसान में धकेल दिया है।

इंडेक्स की मजबूती के पीछे छिपी कमजोरी

सितंबर 2024 के बाद से सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 7% की गिरावट दर्ज हुई है। पहली नजर में यह गिरावट ज्यादा बड़ी नहीं लगती। लेकिन इंडेक्स की यह मजबूती बाजार की असली स्थिति को पूरी तरह नहीं दिखाती। कई सेक्टर और ज्यादातर छोटे शेयरों में लगातार बिकवाली देखने को मिली है।

1000 में से 735 शेयर सितंबर के स्तर से नीचे

एक स्टडी के मुताबिक NSE में लिस्टेड टॉप 1000 कंपनियों में से 735 शेयर सितंबर 2024 के स्तर से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। यानी बाजार के बड़े हिस्से में गिरावट जारी है। दूसरी तरफ सिर्फ 265 शेयर ही ऐसे हैं जिन्होंने इस अवधि में निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया है।

गिरावट का दायराकंपनियों की संख्या
70% से ज्यादा गिरावट8
60% – 70% गिरावट27
50% – 60% गिरावट74
40% – 50% गिरावट115
30% – 40% गिरावट157
20% – 30% गिरावट136
10% – 20% गिरावट125
10% तक गिरावट93
कुल गिरावट वाले शेयर735

सैकड़ों शेयरों में 20% से ज्यादा गिरावट

ब्रॉडर मार्केट की कमजोरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 517 कंपनियों के शेयर 20% से ज्यादा गिर चुके हैं। इनमें से 408 कंपनियों के शेयरों में 20% से 50% तक की गिरावट दर्ज की गई है। इससे साफ है कि बाजार की गिरावट सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है।

स्मॉलकैप और माइक्रोकैप में सबसे ज्यादा दबाव

गिरावट का सबसे ज्यादा असर छोटे शेयरों पर पड़ा है। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 18% नीचे आ चुका है। वहीं माइक्रोकैप 250 इंडेक्स में लगभग 23% की गिरावट दर्ज की गई है। यह दिखाता है कि निवेशक जोखिम वाले शेयरों से दूरी बना रहे हैं।

कुछ शेयरों ने दी चौंकाने वाली तेजी

जहां एक तरफ बाजार में गिरावट रही, वहीं कुछ शेयरों ने शानदार रिटर्न भी दिया। BGR Energy Systems, Cupid, Indo Thai Securities और AGI Infra जैसे शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई। इनमें से कुछ स्टॉक्स में 200% से लेकर 500% से ज्यादा तक का उछाल दर्ज हुआ।

तेजी का दायराकंपनियों की संख्या
200% से ज्यादा तेजी4
100% – 200% तेजी17
50% – 100% तेजी48
40% – 50% तेजी18
30% – 40% तेजी16
20% – 30% तेजी40
10% – 20% तेजी44
10% तक तेजी78
कुल तेजी वाले शेयर265

कई कंपनियों के शेयर 70% तक टूटे

दूसरी तरफ कई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट भी दर्ज हुई। Ola Electric Mobility, Cohance Lifesciences, Jai Corp और Vedant Fashions जैसे शेयरों में 70% तक की गिरावट आई है। यह दर्शाता है कि बाजार में चुनिंदा तेजी के बावजूद बड़ी संख्या में शेयर दबाव में हैं।

टॉप गेनर्सबढ़त (% - 30 सितंबर 2024 के बाद)टॉप लूजर्सगिरावट (% - 30 सितंबर 2024 के बाद)
बीजीआर एनर्जी सिस्टम्स576.6%ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी-76.6%
क्यूपिड454.8%कोहांस लाइफसाइंसेज-75.9%
इंडो थाई सिक्योरिटीज240.3%जई कॉर्प-73.9%
एजीआई इंफ्रा203.1%वेदांत फैशंस-73.5%
फोर्स मोटर्स176.0%एस एंड डब्ल्यू रिन्यूएबल एनर्जी-71.8%
लुमैक्स ऑटो टेक162.6%जई बालाजी इंडस्ट्रीज-71.5%
एक्यूटास केमिकल्स147.4%इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स-71.1%
एक्सिसकेड्स टेक139.0%रूट मोबाइल-70.2%

ब्रॉडर मार्केट की कमजोरी से क्या संकेत

निफ्टी में करीब 6.9% की गिरावट दर्ज हुई है, जबकि मिडकैप लगभग 7% नीचे है। वहीं स्मॉलकैप में करीब 18% और माइक्रोकैप में करीब 22.5% की गिरावट आ चुकी है। यह संकेत देता है कि बाजार के इंडेक्स भले स्थिर दिख रहे हों, लेकिन असली दबाव ब्रॉडर मार्केट में ज्यादा है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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