Share Market Sensex Nifty Reversal : शेयर बाजार के पुराने निवेशक जानते हैं कि बाजार जितनी तेजी से नीचे गिरता है, उससे भी ज्यादा तेजी से ऊपर चला जाता है। लेकिन, पिछले 2 साल से बाजार, खासतौर पर बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty एक रेंज में अटके हुए हैं। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या वाकई बाजार अब कभी बुलिश मोड में आएगा, क्योंकि फिलहाल यह पैटर्न साफ दिख रहा है कि जैसे ही निफ्टी थोड़ा उठता है प्रॉफिट बुकिंग शुरू हो जाती है।
सितंबर की निराशाजनक स्थिति
सितंबर में बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty की मंथ ऑन मंथ स्थिति देखें, तो करीब Nifty करीब 5 फीसदी नीचे है। इसी तरह Sensex भी 5 फीसदी से ज्यादा नीचे है। वहीं, Nifty 500 भी 5 फीसदी से ज्यादा नीचे लुढ़का हुआ है। यह बताता है कि बाजार में व्यापक बिकवाली हुई, जिसकी वजह से सिर्फ बेंचमार्क ही नहीं, बल्कि टोटल मार्केट नीचे गया है। वही, YTD ये तीनों ही इंडेक्स 7 से 15 फीसदी नीचे चले गए हैं। तीनों की स्थिति को नीचे दिए गए इन्फोग्राफ में भी समझ सकते हैं।

इस साल भारतीय बाजार का हाल
अमेरिकी बाजार की तुलना में भारतीय बाजार
भारतीय बाजार को अक्सर अमेरिकी बाजार की दिशा में बढ़ता देखा गया है। लेकिन, यह साल इस धारणा को सीधे तौर पर चुनौती देता है। क्योंकि, इस साल अमेरिकी बाजार के बेंचमार्क S&P 500, Nasdaq और Dow Jones जहां ऑल टाइम हाई पर बने हुए हैं और इस साल आज तक यानी ईयर टू डेट (YTD) टर्म में 7 से 20% का शानदार रिटर्न दे चुके हैं। इस तरह अमेरिकी बेंचमार्क की तुलना में भारतीय बाजार की स्थिति को देखें, तो US Market ने भारतीय बाजार की तुलना में डबल रिटर्न दिया है।

भारत और अमेरिकी बाजारों की YTD स्थिति
AI निवेश के खिलाफ हेजिंग का ऑप्शन भारत
भारतीय बाजार अब अमेरिकी बाजार के सामने एक कॉन्ट्रेरियन बेट बन गया है। यानी अमेरिकी बाजार में जहां निवेशक AI और हाईटेक कंपनियों की फ्यूचर ग्रोथ पर दांव लगा रहे हैं। वहीं, भारतीय बाजार इस तरह के दांव के सामने एक हेजिंग ऑप्शन बन गया है। यही वजह है कि भारतीय बाजार में उतनी तेजी नहीं है, जितनी AI और हाईटेक कंपनियों वाले मार्केट्स में हैं। अमेरिका के अलावा साउथ कोरियाई बाजार का बेंचमार्क KOSPI और ताइवान का बाजार भी इस धारणा को मजबूत करता है।
क्यों भारत पर AI के खिलाफ दांव लगा रहे दिग्गज?
JP Morgan ने अपनी एक रिपोर्ट में भारत को AI का सबसे अच्छा हेजिंग ऑप्शन बताया है। क्योंकि, भारतीय बाजार SAS टेक कंपनियों के साथ ही मजबूत डोमेस्टिक खपत पर ग्रो करने वाला बाजार है। अगर निवेशकों को का AI वाला दांव फेल होता है, तो टेक में AI की जगह लेने के लिए SAS आईटी कंपनियां भारत में मौजूद हैं। दूसरी तरफ भारत को घरेलू खपत से स्थिर ग्रोथ मिलती है।
अभी क्यों लुढ़के जा रहा बाजार?
फिलहाल भारतीय बाजार की गिरावट के पीछे मल्टीपल रीजन हैं। सबसे बड़ी वजह जियोपॉलिटिकल टेंशन है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच की जंग भारत के ग्रोथ आउटलुक को प्रभावित कर रही है। इस युद्ध की वजह से Crude Oil की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसका असर भारत की ग्रोथ और महंगाई पर होता है। इसके अलावा डॉलर और रुपये की वैल्यू भी निवेशकों को प्रभावित कर रही है। US Treasury Yields बढ़ने की वजह से डॉलर की डिमांड बढ़ रही है, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है। इसके अलावा महंगे क्रूड की वजह से भारत से डॉलर का आउटफ्लो बढ़ा है। ये दोनों वजह मिलकर रुपये को कमजोर कर रही हैं। भारत के मामले में महंगे क्रूड का सीधा मतलब महंगाई बढ़ना होता है। महंगाई के आंकड़े अब रिजर्व बैंक पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बढ़ा रहे हैं। अगर ब्याज दर बढ़ती है, तो जाहिर है कैपिटल कॉस्ट महंगी होगी, जिससे बाजार में निवेश धीमा पड़ेगा और निवेशकों को कंपनियों से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद रहेगी।
क्या तेजी लौटेगी?
टेक्निकल इंडिकेटर के लिहाज से देखा जाए, तो निफ्टी अभी ओवरसोल्ड जोन में है, क्योंकि डेली RSI (14) लगभग 26.7 पर है, जो 30 से काफी नीचे है। इसके साथ ही MFI ~26, Stochastic ~9-10 और CCI -183 जैसे अन्य इंडिकेटर्स भी मजबूत ओवरसोल्ड स्थिति दिखा रहे हैं। ऐसे में शॉर्ट टर्म में एक मजबूत टेक्निकल पुलबैक या बाउंस की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, ट्रेंड तब तक कमजोर ही रहेगा, जब तक निफ्टी 22,800-23,000 से ऊपर मजबूत क्लोजिं नहीं दे।
लॉन्ग टर्म में कब बदलेगा ट्रेंड?
ट्रेंड कब बदलेगा यह बताना किसी के लिए संभव नहीं होगा। लेकिन, किन स्थितियों में बदलेगा इसे लेकर एक्सपर्ट कह रहे हैं कि सबसे पहली शर्त पश्चिम एशिया का तनाव खत्म होना है, ताकि क्रूड की ग्लोबल सप्लाई सहज हो और दाम नीचे आएं। इसके बाद अमरिकी टैरिफ भी भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार (Import-Export) को प्रभावित करने वाला फैक्टर हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच एक डील होना बेहद जरूरी है। क्रूड सस्ता होगा, तो इसका असर रुपये से लेकर महंगाई के आंकड़ो तक होगा, जिससे ग्लोबल निवेशकों के साथ ही घरेलू निवेशकों के लिए भी भारतीय बाजार में रिस्क लेने का सेंटिमेंट मजबूत होगा।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
