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10 रुपये में डिजिटल गोल्ड खरीदने वालों को सेबी की चेतावनी, कहा- ये गोल्ड सेफ नहीं, निवेश से पहले जान लें सच्चाई...

सेबी ने ऐसे निवेशकों को सख्त चेतावनी दी है कि डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड जैसे प्रोडक्ट किसी भी सरकारी या सेबी रेगुलेशन के तहत नहीं आते। इसका मतलब ये है कि अगर किसी कंपनी ने निवेशकों का पैसा लौटाने से इनकार कर दिया या प्लेटफॉर्म बंद हो गया, तो निवेशकों को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी।

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Sebi On Digital Gold

सिर्फ 10 रुपये में डिजिटल गोल्ड खरीदने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, लेकिन अगर आप भी ऐसा करने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। बीते कुछ समय से सोने की लगातार बढ़ती कीमतों के चलते लोग ऐसे लुभावने ऑफर के जाल में फंस रहे हैं कि सस्ते में डिजिटल गोल्ड खरीदने का मौका मिल रहा है। लेकिन सेबी ने चेतावनी दी है कि डिजिटल गोल्ड बिलकुल भी न खरीदें क्योंकि ये धोखा है। सेबी ने ऐसे निवेशकों को सख्त चेतावनी दी है कि डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड जैसे प्रोडक्ट किसी भी सरकारी या सेबी रेगुलेशन के तहत नहीं आते। इसका मतलब ये है कि अगर किसी कंपनी ने निवेशकों का पैसा लौटाने से इनकार कर दिया या प्लेटफॉर्म बंद हो गया, तो निवेशकों को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी।

सेबी ने क्या कहा?

सेबी ने कहा है कि आजकल कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे तनिष्क, MMTC-PAMP, कैरटलैन और फोनपे जैसी कंपनियां डिजिटल गोल्ड के नाम पर निवेश का मौका दे रही हैं, लेकिन ये सारे प्रोडक्ट अनरेगुलेटेड (Unregulated) हैं। यानी इन पर न तो सेबी का नियंत्रण है और न ही किसी सरकारी निगरानी की गारंटी। अगर कंपनी या प्लेटफॉर्म डिफॉल्ट करता है, तो निवेशकों को ना तो पैसा वापस मिलेगा और ना ही सेबी से कोई मदद।

सेबी ने शनिवार, 8 नवंबर को एक नोटिफिकेशन जारी करके कहा कि डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट्स न तो सिक्योरिटी हैं और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव्स। ऐसे निवेशों में काउंटर पार्टी रिस्क यानी कंपनी के धोखा देने का खतरा और ऑपरेशनल रिस्क यानी तकनीकी गड़बड़ी का जोखिम बना रहता है।

सोने में निवेश के लिए क्या हैं सेबी रेगुलेटेड ऑप्शन?

अगर आप सोने में निवेश करना चाहते हैं, तो इसके कई सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प मौजूद हैं जो पूरी तरह सेबी (SEBI) के नियमों के तहत आते हैं। सेबी ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे सोने में निवेश करने के लिए गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF), इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) और कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स जैसे रेगुलेटेड विकल्पों का इस्तेमाल करें। ये सभी प्रोडक्ट्स सेबी-रेगुलेटेड हैं, यानी इनमें निवेश करने से पहले और बाद में निवेशकों को कानूनी सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों मिलती हैं।

इन विकल्पों में निवेश करने के लिए निवेशक को सेबी से रजिस्टर्ड ब्रोकर या म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म का उपयोग करना जरूरी होता है। ऐसे निवेश पूरी तरह से रेगुलेटेड माहौल में होते हैं, जिससे किसी प्रकार की धोखाधड़ी या जोखिम की संभावना बेहद कम हो जाती है।

ये गोल्ड सेफ नहीं

वहीं, इंटरनेट या मोबाइल ऐप पर जो डिजिटल गोल्ड खरीदा जा रहा है, वह सेबी के नियमों के दायरे में नहीं आता। इसका मतलब है कि अगर किसी कंपनी या प्लेटफॉर्म ने पैसा वापस नहीं किया या किसी तरह की तकनीकी समस्या आ गई, तो निवेशक को कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी।

सेबी की प्रेस रिलीज के अनुसार, ऐसे डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट्स में निवेश करना निवेशकों के लिए जोखिम भरा सौदा साबित हो सकता है। इससे निवेशकों को दो बड़े खतरे होते हैं काउंटर पार्टी रिस्क (Counterparty Risk) यानी जिस कंपनी या प्लेटफॉर्म से सोना खरीदा गया है, उसके डिफॉल्ट या धोखा देने का जोखिम। ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risk) यानी तकनीकी गड़बड़ी, ट्रांजेक्शन फेल होने या डेटा एरर जैसी समस्याओं का खतरा।

सेबी ने साफ चेतावनी दी है कि डिजिटल गोल्ड में निवेश करने पर किसी भी तरह की सुरक्षा (Investor Protection) नहीं मिलेगी। इसलिए निवेश करने से पहले यह जरूर जांच लें कि जिस कंपनी या प्लेटफॉर्म में आप पैसा लगा रहे हैं, वह सेबी के रेगुलेशन के दायरे में आती है या नहीं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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