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SEBI का बड़ा कदम: वायदा कारोबार के सेटलमेंट के लिए पेश किए दो नए विकल्प

SEBI Expiry Day Settlement Price: सेबी ने एक्सपायरी-डे डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस के लिए नया 'ब्लेंडेड वीवैप' और मौजूदा व्यवस्था बनाए रखने के दो विकल्प पेश किए हैं। इन प्रस्तावों पर 3 अक्टूबर तक सुझाव मांगे गए हैं।

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एक्सपायरी-डे डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

Photo : iStock

SEBI Expiry Day Settlement Price : शेयर बाजार नियामक सेबी (Sebi) ने सूचकांक (Index) और एकल-शेयरों (Single-Stock) के वायदा-कारोबार (Derivatives) के एक्सपायरी-डे सेटलमेंट प्राइस (निपटान मूल्य) की गणना के तरीके में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। यह कदम हाल ही में शुरू की गई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) व्यवस्था की समीक्षा के बाद उठाया गया है। सेबी ने इस विषय पर एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी कर बाजार के सभी हितधारकों से सुझाव और राय मांगी है।

निपटान मूल्य तय करने के लिए दो नए विकल्प

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक बाजार में स्थिरता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सेबी ने सेटलमेंट प्राइस तय करने हेतु दो प्रमुख विकल्प पेश किए हैं:-

  • ब्लेंडेड वीवैप (Blended VWAP):- इस पहले विकल्प के तहत एक्सपायरी-डे का सेटलमेंट मूल्य कंटीन्यूअस ट्रेडिंग सेशन (CTS) के अंतिम 30 मिनट और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के 10 मिनट के दौरान हुए कुल सौदों के आधार पर तय किया जाएगा। इसमें दोनों सत्रों में हुए वास्तविक कारोबार के मूल्य (Traded Value) का योगदान होगा और किसी भी सत्र के लिए कोई पूर्व-निर्धारित वेटेज तय नहीं होगा।
  • मौजूदा व्यवस्था को जारी रखना (CTS VWAP):- दूसरे विकल्प में सेबी ने मौजूदा व्यवस्था को फिलहाल बनाए रखने की बात कही है। इसके तहत केवल कंटीन्यूअस ट्रेडिंग सेशन के अंतिम 30 मिनट में हुए सौदों के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) को ही सेटलमेंट प्राइस माना जाएगा।

सेबी के अनुसार, मौजूदा सीटीएस वीवैप व्यवस्था को एक अंतरिम उपाय के रूप में जारी रखा जा सकता है ताकि निवेशकों और ट्रेडर्स को सीएएस प्रणाली को समझने का अधिक समय मिल सके। कम से कम एक साल तक बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी और भागीदारी की समीक्षा करने के बाद ही 'ब्लेंडेड वीवैप' प्रणाली को पूरी तरह लागू किया जा सकता है।

बदलाव की जरुरत क्यों पड़ी?

सेबी ने 3 अगस्त से शेयर बाजार के कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य बाजार बंद होने के समय शेयरों की सही और पारदर्शी कीमतें खोजना था। सीएएस से पहले, क्लोजिंग प्राइस सीटीएस के अंतिम 30 मिनट के औसत के आधार पर तय होता था, जबकि सीएएस में यह मांग और आपूर्ति के संतुलन (Equilibrium Price) से तय होता है। हालांकि, जब कैश मार्केट में सीएएस की प्रक्रिया चल रही होती है, उस दौरान डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग जारी रहती है। एक्सपायरी वाले दिन अंतिम समय में इंडेक्स ऑप्शंस और डेरिवेटिव्स में भारी हलचल देखने को मिलती है। इस दौरान निवेशक शेयरों की ऑक्शन कीमतों को देखकर तेजी से फैसले लेते हैं। बाजार प्रतिभागियों से मिली प्रतिक्रिया और सीएएस के दौरान होने वाली अत्यधिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए सेबी ने इस व्यवस्था की समीक्षा करने का निर्णय लिया।

IIV के प्रदर्शन पर रोक और अन्य सुझाव

समीक्षा के दौरान सेबी ने पाया कि एक्सपायरी के करीब इंडेक्स ऑप्शंस की कीमतों और इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू (IIV) में काफी उतार-चढ़ाव होता है। इसे देखते हुए सेबी ने 'IIV' के लाइव डिस्प्ले को बंद करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, व्यक्तिगत शेयरों के लिए इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) की जानकारी मिलती रहेगी। सेबी ने साफ किया कि IEP केवल एक सांकेतिक कीमत है जो ऑक्शन बुक में उपलब्ध ऑर्डर पर आधारित होती है, यह कोई वास्तविक सौदे की कीमत नहीं है। इसी तरह IIV भी वास्तविक ट्रेडिंग स्तर को नहीं दर्शाता है। इसके अलावा, सेबी ने ट्रेडिंग सत्रों (CTS और CAS) के समय, उनकी अवधि और ऑक्शन ढांचे से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं पर भी बाजार के जानकारों से सलाह मांगी है।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया की अंतिम तिथि

इससे पहले 3 सितंबर को सेबी ने संकेत दिए थे कि बाजार से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर जल्द ही नियमों में बदलाव का मसौदा पेश किया जाएगा। नियामक ने अब इस कंसल्टेशन पेपर पर हितधारकों, निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों से 3 अक्टूबर तक अपने सुझाव और टिप्पणियां भेजने का अनुरोध किया है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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