Hindeburg-Adani: अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च को उसकी अडानी ग्रुप पर रिपोर्ट के संबंध में बाजार नियामक सेबी से कारण बताओ नोटिस मिला है। कंपनी ने 2 जुलाई को एक ब्लॉग पोस्ट में यह जानकारी दी है। हिंडनबर्ग ने कहा कि 46 पन्नों का कारण बताओ नोटिस 27 जून को दिया गया। ब्लॉग पोस्ट में कहा गया है कि रिसर्च फर्म अडानी के शेयरों में शॉर्ट थी 'एक निवेशक भागीदार के साथ एक सौदे के माध्यम से जो अप्रत्यक्ष रूप से एक गैर-भारतीय, ऑफशोर फंड स्ट्रक्चर के जरिए अडानी डेरिवेटिव्स में शॉर्ट था।
नोटिस को हिंडनबर्ग ने बताया बेतुका
कंपनी ने इसे ‘‘बेतुका, पूर्व-निर्धारित उद्देश्य की पूर्ति के लिए गढ़ा गया’’ बताया। पिछले साल, हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि अडानी ग्रुप 'स्टॉक हेरफेर और अकाउंटिंग धोखाधड़ी में शामिल रहा है'। इन आरोपों के बाद अडानी के शेयरों में 150 बिलियन डॉलर की भारी गिरावट आई थी।
स्टॉक हेरफेर का था आरोप
बता दें कि पिछले साल हिंडनबर्ग रिसर्च ने 106 पेज और 32,000 शब्दों की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसमें अडानी समूह पर दशकों से खुलेआम स्टॉक हेरफेर और अकाउंटिंग धोखाधड़ी की योजना में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी समूह का 150 बिलियन डॉलर का मार्केट कैपिटलाइजेशन साफ हो गया था।
अडानी समूह को लगा था झटका
गौतम अडानी, जिनकी संपत्ति सितंबर 2022 में कुछ समय के लिए 150 बिलियन डॉलर थी, हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद टॉप 20 अरबपतियों की सूची से बाहर हो गए थे। दरअसल, 27 फरवरी, 2023 को अडानी की निजी संपत्ति 37.7 बिलियन डॉलर के निचले स्तर पर आ गई। बाद में आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट की OCCPR रिपोर्ट और तीसरे पक्ष के संगठन पर भारी निर्भरता को खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी वेरिफिकेशन के ऐसी रिपोर्ट पर सबूत के तौर पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मई में अडानी समूह ने संयुक्त बाजार पूंजीकरण के मामले में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद आई गिरावट की भरपाई कर ली।
