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SBI का स्वतंत्रता दिवस पर बड़ा तोहफा, अब लोन होंगे सस्ते

हाल ही में RBI ने अगस्त 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 6.5% पर बरकरार रखा था, लेकिन SBI ने इस दौरान अपने ग्राहकों को ब्याज दर में कमी का फायदा देने का फैसला किया। हालांकि, यह कटौती सभी अवधियों पर समान नहीं है, बल्कि अलग-अलग टेन्योर के लिए दरें अलग-अलग हैं।

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SBI MCLR

अगर आपका भी अकाउंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में है तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है, दरअसल देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 15 अगस्त 2025 से अपने ग्राहकों को एक खास तोहफा दिया है। बैंक ने चुनिंदा अवधि के लिए Marginal Cost of Funds-Based Lending Rate (MCLR) में 5 बेसिस प्वाइंट यानी 0.05% तक की कटौती की है। यह कदम खासतौर पर उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद है, जिनके लोन MCLR से जुड़े हुए हैं।

हाल ही में RBI ने अगस्त 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 6.5% पर बरकरार रखा था, लेकिन SBI ने इस दौरान अपने ग्राहकों को ब्याज दर में कमी का फायदा देने का फैसला किया। हालांकि, यह कटौती सभी अवधियों पर समान नहीं है, बल्कि अलग-अलग टेन्योर के लिए दरें अलग-अलग हैं।

पहले ही बदल चुकी हैं होम लोन दरें

1 अगस्त 2025 से SBI ने होम लोन की दरों में भी संशोधन किया था। रेगुलर होम लोन 7.50% से 8.70%, SBI Maxgain OD लोन 7.75% से 8.95%, टॉप-अप होम लोन 8.25% से 10.75%। इसके अलावा EBLR और RLLR दरें (जून 2025 से लागू) हैं, EBLR 8.15% + CRP + BSP और RLLR 7.75% + CRP।

प्रोसेसिंग फीस

रेगुलर होम लोन पर 0.35% (न्यूनतम ₹2000 + GST, अधिकतम ₹10,000 + GST) प्रोसेसिंग फीस लगती है। SBI की यह MCLR कटौती से EMI में हल्की कमी आएगी, जिससे मासिक खर्च का बोझ थोड़ा घटेगा। यह समय होम लोन लेने वालों के लिए भी अनुकूल हो सकता है, क्योंकि फिलहाल ब्याज दरें स्थिर बनी हुई हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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