भारत के OTT Market में मुकाबला सिर्फ बड़े बजट और बड़े सितारों का नहीं रह गया है। AI की मदद से नोएडा के स्टार्टअप स्टेज (STAGE) ने देसी बोलियों और स्थानीय कहानियों को अपना बिजनेस मॉडल बनाकर इस बाजार के ऐसे पहलू को उजागर किया, जिसे देख दिग्गज भी हैरान हैं।
कंपनी और इंडस्ट्री की तरफ से जारी आंकड़ों की मानें, तो वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच स्टेज के रेवेन्यू में 6.3 गुना बढ़ोतरी हुई है।
क्यों रेवेन्यू ध्यान खींचने वाला?
बड़ी कंपनियां जहां अब भी रेवेन्यू के लिए मोटे तौर पर विज्ञापन और ब्रांड डील पर निर्भर हैं। वहीं, स्टेज का बिजनेस मॉडल विज्ञापन की जगह सब्सक्रिप्शन पर टिका है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के कुल रेवेन्यू का 99.2% हिस्सा सब्सक्रिप्शन से आया। कंपनी के दावों के हिसाब से जून 2026 को समाप्त तिमाही में यह हिस्सेदारी बढ़कर 99.7% हो गई। यानी कंपनी ने यह साबित किया है कि छोटे शहरों और स्थानीय भाषाओं के दर्शक सिर्फ मुफ्त कंटेंट देखने वाले ग्राहक नहीं हैं, बल्कि पसंद आने वाले कंटेंट के लिए भुगतान भी करते हैं।
हरियाणवी से छह भाषाई बाजारों तक
स्टेज ने शुरुआत हरियाणवी कंटेंट से की थी। अब यह हरियाणवी, राजस्थानी, भोजपुरी, गुजराती, मराठी और बंगाली समेत छह भाषाई बाजारों में मौजूद है। जून 2026 में करीब 1,99,687 यूजर्स ने इन बाजारों में स्टेज का कंटेंट देखा। हरियाणवी में जून महीने के मंथली एक्टिव सब्सक्राइबर्स 1,66,934 और राजस्थानी में 1,43,903 रहे। मराठी बाजार में भी तेजी दिखाई दी। अप्रैल 2026 में करीब 6,400 मंथली एक्टिव सब्सक्राइबर्स से बढ़कर जून में यह संख्या 38,707 हो गई। कंपनी का दावा है कि उसका मॉडल सिर्फ भाषा पर नहीं, बल्कि स्थानीय बोली और संस्कृति पर आधारित है। यही इसे दूसरे बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से अलग करता है।
AI से बने कंटेंट ने घटाया खर्च
छोटे भाषाई बाजारों में पारंपरिक तरीके से कंटेंट बनाना महंगा पड़ सकता है। स्टेज इसी चुनौती को AI के जरिए हल करने की कोशिश कर रहा है। कंपनी जैसे-जैसे वास्तविक कलाकारों की जगह AI कंटेंट बढ़ा रही है, उसकी लागत में सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी को ₹1 का रेवेन्यू हासिल करने के लिए करीब ₹2.28 खर्च करने पड़ते थे। वित्त वर्ष 2025 में यह खर्च घटकर ₹1.27 रह गया। यानी हर ₹1 की कमाई पर लागत करीब ₹1.01 कम हुई। इसे लागत के स्तर पर करीब 44% सुधार माना जा सकता है। हालांकि, इसके बावजूद कंपनी अभी नेट प्रॉफिट में नहीं आई है और FY25 में उसका नेट लॉस करीब ₹28.1 करोड़ रहा।
चुनौतियों के बीच बनाई जमीन
फिक्की-ईवाई के अनुमान के मुताबिक भारत के ओटीटी और डिजिटल वीडियो बाजार में स्टेज की हिस्सेदारी 1.6% है। यह आंकड़ा भले ही अभी छोटा दिखे, लेकिन इसकी खासियत यह है कि कंपनी ने एक ऐसे बाजार में जगह बनाई है, जिसे लंबे समय तक मुख्यधारा के OTT कारोबार में नजरअंदाज किया जाता रहा। स्टेज की कहानी इसलिए अहम नहीं है कि इसका रेवेन्यू कई गुना बढ़ा है। बल्कि, यह भारत के बड़े डिजिटल बाजार की ताकत को अनलॉक करने का रास्ता दिखा रही है।
