दुनिया इस समय एक गंभीर ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के मुहाने पर खड़ी है। अमेरिका और ईरान (Iran War) के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक विध्वंसक रूप ले लिया है, जिसका सीधा असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर दिख रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका और तेल उत्पादक देशों के युद्ध में शामिल होने से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में WTI कच्चा तेल आज 115 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस युद्ध और तेल संकट के बीच अब सऊदी अरब की ओर से एक और झटके वाली खबर आई है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी, सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने एशियाई खरीदारों के लिए अपने कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
सऊदी अरामको ने दिया झटका
सऊदी अरब ने मई महीने के लिए एशियाई देशों को बेचे जाने वाले अपने प्रमुख 'अरब लाइट क्रूड' (Arab Light Crude) की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि की है। कंपनी ने बेंचमार्क कीमत से 19.50 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि, बाजार के जानकारों का अनुमान था कि यह बढ़ोतरी 40 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती है, लेकिन वर्तमान वृद्धि भी पिछले कई रिकॉर्ड्स को तोड़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता को देखते हुए सऊदी अरब का यह फैसला एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। एशिया के अधिकांश देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सऊदी के तेल पर निर्भर हैं, इसलिए इस फैसले का असर सीधा आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
खबर लिखे जाने तक ताजा आंकड़ों के अनुसार, WTI क्रूड ऑयल 1.53% की बढ़त के साथ 114.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि ब्रेंट क्रूड भी उछलकर 110.22 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। ओपेक (OPEC) देशों की बात करें तो सऊदी अरब का 'अरब लाइट' क्रूड रिकॉर्ड 14.59% की तेजी के साथ 125.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, वहीं कुवैत एक्सपोर्ट ब्लेंड भी 116.80 डॉलर के स्तर को छू रहा है। तेल की कीमतों में यह बेतहाशा बढ़ोतरी भारत जैसे देशों के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि इससे न केवल आयात बिल बढ़ेगा बल्कि आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई महंगी होने से आम जनता पर महंगाई की सीधी मार पड़ सकती है।
भारत के लिए क्यों है यह चिंता का विषय?
सऊदी अरब का यह फैसला भारत के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। भारत अपनी तेल की जरूरतों का लगभग 85 से 88 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में सऊदी अरब का स्थान काफी ऊपर है। अगर फरवरी 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत के तेल आयातकों की लिस्ट में सऊदी अरब दूसरे नंबर पर रहा है। भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि सऊदी अरब हमारा दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता (Supplier) है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 15% से 18% तेल अकेले सऊदी अरब से ही मंगवाता है। आंकड़ों की बात करें, तो भारत हर दिन सऊदी अरब से लगभग 10 लाख से 11 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदता है, जिससे सऊदी के कीमतों में किए गए किसी भी बदलाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी, रिलायंस (Reliance), ने अकेले ही फरवरी में सऊदी अरब से 0.364 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का आयात किया है। इन आंकड़ों से साफ है कि सऊदी के तेल का महंगा होना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम है।

crude oil
क्यों महंगा हुआ सऊदी का तेल?
ईरान के साथ जारी जंग के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद हो चुका है, जिससे इराक, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे देशों के लिए अपना तेल बेचना मुश्किल हो गया है। हालांकि, इस संकट के बीच सऊदी अरब फायदे में है, क्योंकि उसके पास 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' की सुविधा है। इसके जरिए वह खाड़ी के बजाय लाल सागर के रास्ते दुनिया को तेल की सप्लाई कर रहा है। बाजार में सप्लाई कम और डिमांड ज्यादा होने का फायदा उठाते हुए सऊदी अरब अब जमकर मुनाफाखोरी कर रहा है।
आयात बिल और महंगाई का बढ़ेगा दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल का असर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। भारत का तेल आयात बिल (Import Bill) तेजी से बढ़ेगा, जिससे देश के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर दबाव बढ़ेगा। जब तेल महंगा होता है, तो अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिससे भारतीय रुपया कमजोर होने लगता है। रुपये की गिरावट और तेल की बढ़ती कीमतें मिलकर देश में महंगाई (Inflation) को न्योता देती हैं। परिवहन लागत बढ़ने से फल, सब्जी और अनाज जैसी बुनियादी चीजों के दाम बढ़ना तय है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।
