नौकरीपेशा लोग अब सिर्फ सैलरी पर निर्भर नहीं हैं! साइड इनकम के कई स्मार्ट तरीकों से कमाई कर रहे हैं।सैलरीपेशा लोग वेतन के अलावा अतिरिक्त काम, 'फ्रीलांसिंग’, शेयर ट्रेडिंग और व्यावसायिक गतिविधियों से भी तेजी से आमदनी के स्रोत बढ़ा रहे हैं। वित्तीय प्रौद्योगिकी मंच 'क्लियरटैक्स’ ने सोमवार को एक रिपोर्ट में कहा कि आकलन वर्ष 2026-27 में उसके मंच पर खुद आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने वालों के एक बड़े हिस्से ने वेतन के अलावा अन्य स्रोतों से आय की जानकारी दी है। क्लियरटैक्स के आंकड़ों के अनुसार, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने के आंकड़ों से यह बदलती प्रवृत्ति सामने आई है।
इनकम टैक्स रिटर्न से मिली जानकारी
आकलन वर्ष 2026-27 में क्लियरटैक्स पर दाखिल कुल रिटर्न में आईटीआर-1 के अलावा अन्य श्रेणियों के रिटर्न की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत रही, जो आकलन वर्ष 2025-26 में 53 प्रतिशत और 2024-25 में 40 प्रतिशत थी। इसके अलावा, पूंजीगत लाभ और अन्य स्रोतों से आय का ब्योरा देने वाले आईटीआर-2 और आईटीआर-3 श्रेणियों के रिटर्न की संयुक्त हिस्सेदारी 57.2 प्रतिशत रही, जो दो साल पहले 36.2 प्रतिशत थी।
आकलन वर्ष 2026-27 में क्लियरटैक्स मंच पर खुद रिटर्न दाखिल करने वालों में 47 प्रतिशत ने निवेश, कारोबार, ’फ्रीलांसिंग’ या क्रिप्टोकरेंसी से आय की जानकारी दी। आकलन वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा केवल 9.5 प्रतिशत था। यह आय के स्रोतों में आई विविधता को दर्शाता है।
वेतन के अलावा दो या अधिक स्रोतों से कमाई
इसी अवधि में वेतन के अलावा दो या इससे अधिक स्रोतों से कमाई की जानकारी देने वाले खुद रिटर्न दाखिल करने वालों की हिस्सेदारी भी 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई। क्लियरटैक्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अर्चित गुप्ता ने कहा कि करदाताओं की बढ़ती संख्या अब आय के कई स्रोतों और अधिक जटिल निवेश पोर्टफोलियो की जानकारी दे रही है। इसमें युवा पेशेवरों का शेयर बाजार में भाग लेना और स्वतंत्र रूप से काम करना तथा परिवारों का अपने निवेश में विविधता लाना शामिल है।
कम उम्र में निवेश कर रहे युवा
क्लियरटैक्स मंच के आंकड़ों के अनुसार, युवा भारतीय कम उम्र में ही निवेश की दुनिया में कदम रख रहे हैं। आकलन वर्ष 2026-27 में 25 साल से कम उम्र के खुद रिटर्न दाखिल करने वालों में 75 प्रतिशत ने जटिल रिटर्न दाखिल किए, जबकि आकलन वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत था। इस समूह में आईटीआर-3 श्रेणी के रिटर्न की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई, जबकि आईटीआर-1 श्रेणी के रिटर्न की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत से घटकर 25 प्रतिशत रह गई।
महिलाओं की भी बढ़ी हिस्सेदारी
क्लियरटैक्स पोर्टल पर रिटर्न दाखिल करने वाली महिलाओं में से 30.5 प्रतिशत ने आकलन वर्ष 2026-27 में पूंजीगत लाभ की जानकारी दी, जो आकलन वर्ष 2025-26 में 26.1 प्रतिशत थी। इसी अवधि में 50 लाख रुपये से अधिक आय वाली महिलाओं की हिस्सेदारी भी 3.7 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई। यह अधिक आय वर्ग में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी को दर्शाता है।
