ग्रामीण भारत में अमीर हो रहे हैं लोग, NABARD सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Dec 11, 2025, 01:06 PM IST
Prosperity In Rural India: NABARD के रूरल इकॉनोमिक कंडीशन्स एंड सेंटिमेंट्स सर्वे (RECSS) सर्वे के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि ग्रामीण भारत में पिछले एक साल में समग्र सुधार और समृद्धि आई है। बढ़ती आय, मजबूत खपत, बेहतर निवेश और संतोषजनक बुनियादी ढांचे ने ग्रामीण घरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
ग्रामीण भारत में बढ़ती समृद्धि: NABARD सर्वे में सकारात्मक संकेत (तस्वीर-istock)
Prosperity In Rural India: ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले एक साल में मजबूत सुधार देखा गया है। ऐसा NABARD के रूरल इकॉनोमिक कंडीशन्स एंड सेंटिमेंट्स सर्वे (RECSS) के 8वें दौर से पता चलता है। सर्वे के अनुसार, ग्रामीण घरों की करीब 80 फीसदी आबादी ने पिछले वर्ष अपने खर्च में बढ़ोतरी की सूचना दी है, जो ग्रामीण भारत में बढ़ती समृद्धि का संकेत है। NABARD ने यह सर्वे सितंबर 2024 से हर दो महीने में किया है और अब यह एक साल का विस्तृत डेटा उपलब्ध कराता है, जिससे ग्रामीण आर्थिक बदलावों का वास्तविक आंकलन किया जा सकता है।
ग्रामीण डिमांड में व्यापक वृद्धि
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक सर्वे के आंकड़े दिखाते हैं कि ग्रामीण भारत में मांग, आय और घरेलू कल्याण में मजबूत सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत खपत, बढ़ती आय, कम होती महंगाई और बेहतर वित्तीय व्यवहार के कारण अर्थव्यवस्था सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। सरकार की लगातार कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक निवेश ने इस गति को और मजबूत किया है। विशेष रूप से ग्रामीण उपभोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सर्वे में पाया गया कि ग्रामीण घरों का 67.3 प्रतिशत मासिक आय अब केवल खपत पर खर्च हो रहा है। यह आंकड़ा सर्वे के इतिहास में सबसे अधिक है और इसका कारण GST दरों में समायोजन को बताया गया है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह मजबूत और व्यापक मांग का संकेत है, जो केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।
आय में सुधार और भविष्य की उम्मीद
ग्रामीण घरों की आय में भी सबसे अधिक वृद्धि देखी गई। सर्वे के अनुसार 42.2 फीसदी घरों ने आय में वृद्धि का अनुभव किया, जबकि केवल 15.7 फीसदी घरों ने आय में गिरावट देखी, जो सर्वे के इतिहास में सबसे कम है। आगे की उम्मीद भी बेहद सकारात्मक है। सर्वे में 75.9 प्रतिशत ग्रामीण घरों ने बताया कि उन्हें अगले वर्ष आय बढ़ने की उम्मीद है। यह सितंबर 2024 के बाद सबसे अधिक आशावाद का स्तर है।
ग्रामीण निवेश में बढ़ोतरी
सर्वे में यह भी सामने आया कि ग्रामीण निवेश गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले साल 29.3 प्रतिशत घरों ने पूंजीगत निवेश में वृद्धि की है, जो सर्वे के सभी दौरों में सबसे अधिक है। यह निवेश मुख्य रूप से कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में संपत्ति निर्माण के लिए किया गया। वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह निवेश केवल मजबूत आय और खपत की वजह से हुआ है, न कि कर्ज के दबाव के कारण।
ग्रामीण लोन तक पहुंच में सुधार
ग्रामीण घरों की औपचारिक स्रोतों से लोन तक पहुंच भी सर्वे में उच्चतम स्तर पर पाई गई। 58.3 प्रतिशत ग्रामीण घरों ने केवल औपचारिक स्रोतों से लोन लिया है, जो सितंबर 2024 में 48.7 प्रतिशत था। हालांकि करीब 20 प्रतिशत लोग अभी भी अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में औपचारिक क्रेडिट की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता है।
कल्याणकारी हस्तांतरण और समर्थन
सर्वे में यह भी पाया गया कि सरकारी हस्तांतरण ग्रामीण मांग को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं, लेकिन इसके कारण लोग सरकार पर निर्भर नहीं हो रहे हैं। औसतन, ग्रामीण घरों की मासिक आय का 10 प्रतिशत हिस्सा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे सस्ता भोजन, बिजली, पानी, रसोई गैस, उर्वरक, स्कूल सहायता, पेंशन और परिवहन लाभ से आता है। कुछ घरों के लिए यह 20 प्रतिशत से अधिक है, जिससे जरूरी खर्चों में सहायता मिलती है और ग्रामीण मांग स्थिर रहती है।
महंगाई की धारणा में कमी
ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई की धारणा पिछले एक साल में सबसे कम दर्ज की गई। औसत महंगाई की धारणा 3.77 प्रतिशत रही, जो पहली बार 4 प्रतिशत से नीचे गई। 84.2 प्रतिशत ग्रामीणों ने महंगाई को 5 प्रतिशत या उससे कम बताया, और करीब 90 प्रतिशत का मानना है कि निकट भविष्य में महंगाई 5 प्रतिशत से कम रहेगी। वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस कम महंगाई ने वास्तविक आय बढ़ाई है, खरीद क्षमता को मजबूत किया है और समग्र कल्याण में सुधार किया है।
लोन भुगतान और पूंजीगत निवेश में सुधार
सर्वे में यह भी पाया गया कि लोन भुगतान की स्थितियां और पूंजीगत निवेश में सुधार हुआ है। कम महंगाई और ब्याज दरों में नरमी के कारण अब ग्रामीण घरों का आय का हिस्सा लोन चुकौती में कम हो गया है। पिछले साल 29.3 प्रतिशत ग्रामीण घरों ने पूंजीगत निवेश बढ़ाया, जो सर्वे के सभी दौरों में सबसे अधिक है।
ग्रामीण बुनियादी ढांचा और सेवाओं में संतोष
ग्रामीण घरों ने सड़क, शिक्षा और बिजली सेवाओं में सुधार की सराहना की है। इसके बाद पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं में संतोष पाया गया। इन सुधारों ने बढ़ती आय के साथ मिलकर लॉन्ग टर्म समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है।
NABARD RECSS सर्वे की जानकारी
NABARD का रूरल इकॉनोमिक कंडीशन्स एंड सेंटिमेंट्स सर्वे हर दो महीने में पूरे भारत में किया जाता है। यह सर्वे न केवल आय, उपभोग, महंगाई, लोन और निवेश के आंकड़े रिकॉर्ड करता है, बल्कि ग्रामीण घरों की धारणा और भविष्य की उम्मीदों को भी समझता है। सर्वे का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में होने वाले बदलावों का वास्तविक चित्र प्रस्तुत करना और नीति निर्धारकों को सटीक जानकारी प्रदान करना है।
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