अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये ने लंबी छलांग लगाई है। 30 मार्च की शुरुआती कारोबार में रुपया 130 पैसे मजबूत हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपया 93.59 पर ट्रेड कर रहा है जो 27 मार्च के रिकॉर्ड निचले स्तर 94.85 से 1.3 प्रतिशत ज्यादा थी। रुपये में यह उछाल भारतीय रिजर्व बैंक के दखल के बाद आया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सट्टेबाजी की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए। उसने डॉलर पर ऑनशोर लॉन्ग पोजिशन्स को सीमित कर दिया, ताकि उस करेंसी को स्थिर किया जा सके। रुपये में हाल के हफ्तों में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि, अब एक बार फिर रुपये पर दबाब बढ़ गया है। रुपया की तेजी कम हो गई है।
आपको बता दें कि RBI ने सभी बैंकों को निर्देश दिया कि वे ऑनशोर डिलीवरेबल मार्केट में रुपये पर अपनी नेट ओपन पोज़िशन (NOP-INR) को 100 मिलियन डॉलर के अंदर सीमित रखें; बैंकों को 10 अप्रैल तक इस निर्देश का पालन करना अनिवार्य है। एक्सपर्ट के अनुसार, आरबीआई के इस कदम से निजी और विदेशी बैंक को आर्बिट्रेज ट्रेड्स को खत्म करना शुरू करना होगा, और 10 अप्रैल तक 18 अरब डॉलर तक की पोजिशन्स को स्क्वायर ऑफ करना होगा। ये आर्बिट्रेज ट्रेड डॉलर को देश के भीतर (onshore) खरीदकर और उन्हें NDF बाज़ार में बेचकर, इन दोनों सेगमेंट के बीच के अंतर (spread) का लाभ उठाने के लिए तैयार किए गए थे।
पहले क्या था नियम?
पहले, बैंकों के पास ज़्यादा लचीलापन था। वे अपनी पूंजी के आधार पर, एक बड़ी सीमा के अंदर रहते हुए, अपनी खुद की सीमाएं तय कर सकते थे। अब, RBI ने चीज़ों को नियंत्रण में रखने के लिए एक सख़्त और एक जैसी सीमा तय कर दी है। RBI ने यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब रुपया भारी दबाव में है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं के चलते, निवेशक भारतीय बाज़ारों से अपना पैसा निकाल रहे हैं। इससे रुपया तेज़ी से कमज़ोर हुआ है, और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.84 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।
ट्रेडर्स द्वारा करेंसी पर लगाए जा सकने वाले दांव की सीमा तय करके, RBI असल में रुपये में होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करने और तेज़, सट्टेबाज़ी वाले झटकों को रोकने की कोशिश कर रहा है।
