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Rule 70: महंगाई से कितने साल में आधी होगी आपके पैसे की वैल्यू

Rule 70: क्या आपको पता है कि महंगाई आपके पैसों की ताकत को धीरे-धीरे आधा कर देती है? Rule of 70 बताता है कि आपके 1 करोड़ की वैल्यू कब सिर्फ 50 लाख रह जाएगी और रिटायरमेंट के लिए आपको कितनी बड़ी तैयारी करनी होगी। आइए आपको आसान भाषा में बताते हैं आखिर क्या है रूल ऑफ 70...

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Rule 70

Rule 70: हर कोई चाहता है कि रिटायरमेंट के बाद उसके पास इतनी पूंजी हो कि वह आराम से बिना पैसों की चिंता किए जीवन बिता सके। लेकिन असली समस्या है महंगाई, जो धीरे-धीरे आपके पैसों की वैल्यू को कम कर देती है। यही समझाने के लिए एक आसान नियम बनाया गया है Rule of 70।

क्या है Rule of 70?

इस नियम की मदद से आप जान सकते हैं कि महंगाई के चलते आपके पैसों की वैल्यू कितने साल में आधी रह जाएगी। इसका तरीका बहुत आसान है – 70 को मौजूदा महंगाई दर (Inflation Rate) से भाग दीजिए। जो संख्या आएगी, उतने साल में आपके पैसों की वैल्यू आधी हो जाएगी।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए, महंगाई दर 6% है। तो 70 ÷ 6 = लगभग 12 साल। यानी 12 साल बाद आपके पैसे की खरीदने की क्षमता आधी हो जाएगी। अब मान लीजिए आपकी उम्र 45 साल है और आप 15 साल बाद रिटायर होना चाहते हैं। आज आपका मासिक खर्च 50,000 रुपये है। 6% महंगाई दर के हिसाब से रिटायरमेंट के समय यही खर्च बढ़कर 1.2 लाख रुपये हो जाएगा।

अगर आप चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी इसी स्तर का जीवन जी सकें, तो आपके पास कम से कम 2.33 करोड़ रुपये की पूंजी होनी चाहिए। इसके लिए आपको अगले 15 साल तक हर महीने करीब 46,000 रुपये SIP में निवेश करना होगा। अगर इसमें आपको 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो रिटायरमेंट तक आपके पास 2.33 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाएगा।

Rule of 70 हमें यह सिखाता है कि निवेश की प्लानिंग करते समय सिर्फ लक्ष्य राशि देखना काफी नहीं है। महंगाई को ध्यान में रखकर ही सही रिटायरमेंट फंड तैयार किया जा सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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