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किराए के घर में रहते हैं तो तुरंत जान लें ये 7 नियम, मकान मालिक कभी नहीं कर पाएगा परेशान!

किराए पर घर लेते समय सिर्फ लोकेशन नहीं, बल्कि लिखित एग्रीमेंट, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, सीमित सिक्योरिटी डिपॉजिट और किराया बढ़ाने के नियमों की जानकारी जरूरी है। इन कानूनी अधिकारों को समझकर आप भविष्य के विवादों और कानूनी परेशानियों से आसानी से बच सकते हैं।

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Tenant Rules

भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या नोएडा में रोजी-रोटी कमाने या पढ़ाई करने के लिए लाखों लोग किराए के मकानों (Rented Houses) में रहते हैं। अक्सर देखने को मिलता है कि किराएदारों और मकान मालिकों (Landlords) के बीच सुरक्षा जमा राशि (Security Deposit), किराए में बढ़ोतरी, घर खाली करने या रख-रखाव (Maintenance) को लेकर आए दिन किच-किच और विवाद होते रहते हैं। कई बार मकान मालिक अपनी मनमानी करते हुए किराएदारों को परेशान भी करते हैं। लेकिन अब आपको घबराने या परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। सरकार द्वारा देश के किराया बाजार को व्यवस्थित करने के लिए लाए गए मॉडल टेनेंसी एक्ट (Model Tenancy Act) के तहत किराएदारों को कई मजबूत कानूनी अधिकार और सुरक्षा दी गई है। यदि आप भी किराए के मकान में रहते हैं, तो आपको अपने इन 7 सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों और नियमों के बारे में जरूर पता होना चाहिए, ताकि कोई भी आपके अधिकारों का हनन न कर सके।

किरायदारों के काम के 7 नियम

1. रेंट एग्रीमेंट है अनिवार्य

नए नियमों के तहत अब केवल मौखिक (Verbal) बातचीत या साधारण नोटरी वाले रेंट एग्रीमेंट से काम नहीं चलेगा। मकान मालिक और किराएदार के बीच एक लिखित कानूनी समझौता (Written Rent Agreement) होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, एग्रीमेंट होने के 60 दिनों के भीतर इसे रेंट अथॉरिटी (Rent Authority) के पास ऑनलाइन पंजीकृत (Digital Registration) कराना अनिवार्य कर दिया गया है। यह दस्तावेज दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करता है।

2. सिक्योरिटी डिपॉजिट की तय सीमा

अक्सर देखा जाता है कि मकान मालिक किराए पर घर देने से पहले 5 से 10 महीने का भारी-भरकम एडवांस या सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग लेते हैं, जो किराएदारों की जेब पर भारी पड़ता है। नए नियमों ने इस पर लगाम लगा दी है। अब आवासीय घरों (Residential Properties) के लिए मकान मालिक अधिकतम केवल 2 महीने का किराया ही सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में मांग सकते हैं। वहीं कमर्शियल या व्यावसायिक संपत्तियों के लिए यह सीमा अधिकतम 6 महीने की तय की गई है।

3. बिना बताए घर में नहीं घुस सकते मकान मालिक

कई बार मकान मालिक अपनी मर्जी से जब चाहे किराएदार के फ्लैट या कमरे की चेकिंग करने पहुंच जाते हैं, जिससे किराएदारों की प्राइवेसी (निजता) प्रभावित होती है। कानूनन मकान मालिक ऐसा कतई नहीं कर सकते। नए नियमों के मुताबिक, मकान मालिक को किराए के घर का मुआयना करने, कोई रिपेयरिंग काम देखने या आने से कम से कम 24 घंटे पहले किराएदार को लिखित या डिजिटल (जैसे SMS/WhatsApp) माध्यम से नोटिस देना होगा।

4. अचानक नहीं बढ़ाया जा सकता किराया

मकान मालिक अपनी मर्जी से रातों-रात या बीच करारे में मनचाहा किराया नहीं बढ़ा सकते। किराए में किसी भी तरह की बढ़ोतरी रेंट एग्रीमेंट में लिखी शर्तों के आधार पर ही होगी। यदि मकान मालिक किराया बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी लिखित सूचना किराएदार को कम से कम 3 महीने पहले देनी होगी। किराएदार की सहमति के बिना बीच अवधि में किराया बढ़ाना पूरी तरह गैर-कानूनी है।

5. आवश्यक सेवाओं को रोकने पर पाबंदी

यदि किसी वजह से मकान मालिक और किराएदार के बीच कोई विवाद हो जाता है, तो कई बार मकान मालिक गुस्से में आकर किराएदार के घर की बिजली, पानी, लिफ्ट या पार्किंग जैसी जरूरी सुविधाएं काट देते हैं। नए नियमों के तहत यह एक गंभीर अपराध है। कोई भी विवाद होने पर मकान मालिक खुद से ये आवश्यक सेवाएं (Essential Services) बंद नहीं कर सकते। इसके लिए उन्हें रेंट अथॉरिटी का दरवाजा खटखटाना होगा।

6. मरम्मत और मेंटेनेंस की संयुक्त जिम्मेदारी

घर की टूट-फूट को लेकर अक्सर विवाद होता है। कानून के मुताबिक, घर के बड़े संरचनात्मक काम (Structural Repairs) जैसे दीवारों में दरारें, छत से पानी टपकना या पानी के पाइप का फटना, जैसी बड़ी मरम्मत कराने की जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है। वहीं रोजमर्रा की छोटी-मोटी चीजें जैसे फ्यूज बल्ब बदलना, नल का वॉशर ठीक करना या स्विच बोर्ड की मरम्मत का खर्च किराएदार को उठाना होता है। यदि मकान मालिक जरूरी मरम्मत नहीं कराता, तो किराएदार खुद काम कराकर उस खर्च को मासिक किराए से काट सकता है।

7. अचानक घर खाली कराने पर रोक

रेंट एग्रीमेंट की समय सीमा समाप्त होने से पहले मकान मालिक बिना किसी वैध कारण के किराएदार को जबरन घर से बाहर नहीं निकाल सकते। यदि किराएदार लगातार दो महीने तक किराया नहीं देता है या संपत्ति का गलत/व्यावसायिक इस्तेमाल करता है, तभी उसे निकालने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके लिए भी मकान मालिक को पहले उचित समय का नोटिस देना होगा। दूसरी तरफ, यदि एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी किराएदार घर खाली नहीं करता है, तो मकान मालिक को भी यह अधिकार है कि वह शुरू के दो महीनों के लिए किराया दोगुना (Double) और उसके बाद चार गुना तक वसूल सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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