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रिलायंस-सैमसंग ने की 3 अरब डॉलर की डील, क्या शेयर के लिए टर्निंग पॉइंट बनेगा नया सौदा?

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग C&T के साथ 3 अरब डॉलर की ग्रीन अमोनिया डील की है। वहीं, पिछले दिनों हुई कई डेवलपमेंट्स को देखते हुए ब्रोकरेज रिलायंस के शेयर में ग्रोथ की संभावना देख रहे हैं।

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रिलायंस का शेयर इस साल 11 फीसदी टूट चुका है

Reliance Samsung C&T Deal: रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ग्रीन एनर्जी में बड़ा दांव खेलते हुए Samsung C&T के साथ $3 अरब (करीब 27 हजार करोड़ रुपये) की डील साइन की है। यह सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि कंपनी के बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन का संकेत है। सवाल है—क्या यह डील वास्तव में रिलायंस के लिए गेमचेंजर साबित होगी?

स्ट्रैटेजिक एंट्री

रिलायंस इंडस्ट्रीज का Samsung C&T के साथ 15 साल का ग्रीन अमोनिया सप्लाई एग्रीमेंट कंपनी को सीधे ग्लोबल क्लीन एनर्जी वैल्यू चेन में स्थापित करता है। यह डील लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू विजिबिलिटी देती है और एशिया के उन देशों की मांग को टारगेट करती है जो तेजी से लो-कार्बन एनर्जी की ओर बढ़ रहे हैं। ग्रीन अमोनिया को भविष्य का ट्रांसपोर्टेबल फ्यूल माना जा रहा है, खासकर जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों में। ऐसे में रिलायंस की यह एंट्री सही समय पर और सही सेक्टर में मानी जा रही है।

ग्लोबल एनर्जी प्लेयर

यह डील रिलायंस के न्यू एनर्जी विजन को मजबूती देती है। कंपनी सोलर, बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रोलाइजर टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रही है। “मेक इन इंडिया” फ्रेमवर्क के तहत इन टेक्नोलॉजीज को लोकलाइज करना रिलायंस की लागत को कम और प्रतिस्पर्धा को मजबूत बना सकता है।

कंपनी का मानना है कि यह साझेदारी भारत की क्लीन एनर्जी यात्रा में अहम कदम है और कंपनी को वैल्यू-एडेड ग्रीन फ्यूल्स के बड़े प्रोड्यूसर के रूप में स्थापित करेगी।

ब्रोकरेज बुलिश

Morgan Stanley ने स्टॉक पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹1,803 का टारगेट दिया है। मौजूदा ₹1,401 के आसपास के स्तर से यह करीब 29% अपसाइड दिखाता है। ब्रोकरेज का मानना है कि ग्लोबल रिफाइनिंग और केमिकल सेक्टर में री-रेटिंग के बावजूद रिलायंस अभी भी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल तनाव के चलते रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत बने रह सकते हैं, जो कंपनी के पारंपरिक बिजनेस को सपोर्ट देता रहेगा।

मेगा ट्रांसफॉर्मेशन प्लान

रिलायंस अगले 7 साल में $110 अरब निवेश की योजना पर काम कर रही है, जिसमें AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी प्रमुख फोकस हैं। यह कंपनी के लिए अगला बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन फेज माना जा रहा है। इतिहास बताता है कि रिलायंस हर दशक में खुद को री-इंवेंट करती आई है—टेक्सटाइल से पेट्रोकेमिकल, फिर टेलीकॉम और अब ग्रीन एनर्जी।

स्टॉक मूवमेंट और वैल्यूएशन संकेत

करीब ₹18.9 लाख करोड़ मार्केट कैप वाली कंपनी का शेयर ₹1,401.60 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जिसमें हल्की बढ़त दर्ज की गई। मौजूदा वैल्यूएशन को देखते हुए बाजार अभी पूरी तरह से ग्रीन बिजनेस की संभावनाओं को प्राइस-इन नहीं कर रहा है।

क्या यह टर्निंग पॉइंट है?

रिलायंस के लिए यह डील सिर्फ एक बिजनेस एक्सपेंशन नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक शिफ्ट का संकेत है। ग्रीन अमोनिया के जरिए कंपनी ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन में अपनी जगह बना रही है। अगर कंपनी अपने ग्रीन प्रोजेक्ट्स को स्केल और लागत के स्तर पर सफलतापूर्वक एग्जीक्यूट करती है, तो यह डील आने वाले वर्षों में रिलायंस के लिए वैल्यू क्रिएशन का बड़ा इंजन बन सकती है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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