किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए जरूरी खबर, ये काम नहीं किया तो नहीं मिलेगा बिजली कनेक्शन
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Dec 26, 2025, 11:19 AM IST
Power connection Rules: अब बिजली कनेक्शन के लिए वैध और रजिस्टर्ड किरायानामा अनिवार्य होगा। किरायेदारी में बिजली कनेक्शन पर स्टाम्प शुल्क देना होगा। स्टाम्प चोरी रोकने के लिए सरकार सख्त हो गई है। 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले भवनों के लिए स्टाम्प शुल्क तय किया गया है।
बिजली कनेक्शन के लिए अब वैध किरायानामा जरूरी (तस्वीर-istock)
Power connection Rules : उत्तर प्रदेश सरकार ने किराये पर रहने वाले मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को सख्त कर दिया है। अब बिना उचित स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण (रजिस्ट्री) वाले किरायानामे के आधार पर बिजली कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य स्टाम्प चोरी रोकना और किरायानामा को कानूनी रूप से वैध बनाना है। इसके लिए पावर कॉरपोरेशन और निबंधन विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
स्टाम्प चोरी रोकने पर सरकार का फोकस
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक शासन को जांच में यह बात सामने आई है कि कई जिलों में एक साल से कम अवधि के या बिना उचित स्टाम्प शुल्क वाले किरायानामों पर बिजली कनेक्शन जारी कर दिए जा रहे हैं। इससे राज्य सरकार को स्टाम्प और रजिस्ट्री शुल्क के रूप में मिलने वाले राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसी को देखते हुए सरकार ने बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया में किरायानामे की वैधता अनिवार्य कर दी है।
निबंधन महानिरीक्षक का पावर कॉरपोरेशन को पत्र
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक निबंधन महानिरीक्षक नेहा शर्मा की ओर से पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक (एमडी) को इस संबंध में पत्र भेजा गया है। पत्र में साफ कहा गया है कि बिजली कनेक्शन जारी करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि किरायानामा उचित स्टाम्प शुल्क के साथ रजिस्टर्ड हो। बिना रजिस्ट्री और बिना स्टाम्प वाले किरायानामों के आधार पर अब कोई नया कनेक्शन नहीं दिया जाएगा।
रजिस्ट्री अधिनियम 1908 के प्रावधान लागू
सरकार ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 के तहत एक वर्ष से अधिक अवधि के किरायानामे का पंजीकरण कराना अनिवार्य है। अगर अनिवार्य श्रेणी के दस्तावेज रजिस्टर्ड नहीं हैं, तो उन्हें कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी। यानी ऐसे किरायानामों के आधार पर न तो बिजली कनेक्शन मिलेगा और न ही वे किसी विवाद में मान्य होंगे।
लोक सेवकों को दस्तावेज जब्त करने का अधिकार
सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर कोई लोक सेवक अपनी ड्यूटी के दौरान बिना स्टाम्प या कम स्टाम्प वाला दस्तावेज पाता है, तो उसे जब्त कर जिलाधिकारी या स्टाम्प अधिकारी को भेज सकता है। इससे स्टाम्प चोरी पर तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी।
स्टाम्प अधिनियम में दंड का प्रावधान
स्टाम्प अधिनियम की धारा 62 और 64 के तहत उचित स्टाम्प शुल्क न देना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सरकार ने हाल ही में 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले भवनों और प्रतिष्ठानों के लिए अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री फीस भी तय कर दी है, ताकि प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी रहे।
किरायानामा शुल्क का नया निर्धारण
- सरकार ने किरायानामे के स्टाम्प शुल्क को औसत वार्षिक किराये और अवधि के आधार पर तय किया है।
- अगर औसत वार्षिक किराया 0 से 2 लाख रुपये तक है, तो एक वर्ष तक के लिए 500 रुपये और 1 से 5 वर्ष तक के लिए 1500 रुपये स्टाम्प शुल्क लगेगा।
- 2.01 लाख से 6 लाख रुपये तक के किराये पर एक वर्ष तक 1500 रुपये और 1 से 5 वर्ष तक 4500 रुपये शुल्क तय किया गया है।
- 6 लाख से 10 लाख रुपये तक के किराये पर एक वर्ष तक 2500 रुपये और 1 से 5 वर्ष तक 6000 रुपये स्टाम्प शुल्क देना होगा।
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक शासन के निर्देश पर मेरठ के एआईजी स्टाम्प नवीन कुमार शर्मा ने पावर वितरण निगम (पीवीवीएनएल) से किरायानामे के आधार पर जारी बिजली कनेक्शनों का पूरा ब्योरा मांगा है। उनका कहना है कि ब्योरा मिलने के बाद जांच और कार्रवाई तेज की जाएगी। आगे से किरायानामे के आधार पर बिजली कनेक्शन तभी वैध माना जाएगा, जब वह उचित स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री के साथ होगा।
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा
इस फैसले से किरायेदारों और मकान मालिकों को अब किरायानामा बनवाते समय पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। हालांकि इससे थोड़ी औपचारिकताएं बढ़ेंगी, लेकिन लंबे समय में यह व्यवस्था पारदर्शी होगी और विवादों में भी किरायानामा मजबूत कानूनी दस्तावेज के रूप में काम करेगा।
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