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Home Loan : रीफाइनेंस फायदेमंद है, अगर होम लोन की अवधि लंबी हो, जानिए डिटेल

Home Loan : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में कटौती की। इस कटौती का मतलब है कि नए लोन सस्ते हो सकते हैं। लेकिन मौजूदा लोन के लिए यह थोड़ा जटिल हो सकता है। आइए जानते क्या रीफाइनेंस फायदेमंद है।

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होम लोन (तस्वीर-Canva)

Home Loan : फरवरी में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2020 के बाद पहली बार रेपो रेट में कटौती की घोषणा की। इस कटौती का मतलब है कि नए लोन सस्ते हो सकते हैं। लेकिन मौजूदा लोन के लिए यह थोड़ा जटिल हो सकता है। कुछ लोन में यह 25 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती पहली तिमाही के भीतर लागू हो जाएगी। कुछ को अधिक इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, कुछ को यह कटौती मिल ही नहीं सकती। ऐसा क्यों होता है? आइए समझते हैं कि इस कटौती से किसे फायदा होगा और कब तक मिलेगा।

परिस्थिति 1: ऑटोमेटिक दर कटौती 3 महीने में

अगर आपका होम लोन फ्लोटिंग रेट पर है और आपने इसे अक्टूबर 2019 के बाद किसी बैंक से लिया है, तो आपकी ब्याज दर एक तिमाही के भीतर 25 bps की कटौती के साथ अपने आप घट जाएगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपकी ब्याज दर रेपो रेट से जुड़ी होती है, और रेपो रेट में कोई भी बदलाव तीन महीनों के भीतर आपके लोन पर दिखना चाहिए। इसके नियमों की सटीक जानकारी के लिए अपने लोन कॉन्ट्रैक्ट को पढ़ें या अपने बैंक से संपर्क करें।

परिस्थिति 2: ऑटोमेटिक दर कटौती लेकिन देरी से

अगर आपका होम लोन फ्लोटिंग रेट पर है और इसे अप्रैल 2016 से अक्टूबर 2019 के बीच लिया गया था, तो ब्याज दर 6 से 12 महीने के अंतराल पर रीसेट होती है। इस मामले में ब्याज दर का मानक मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) होता है। आपके लोन अनुबंध में स्पष्ट रूप से यह मानक और रीसेट अंतराल दर्ज होगा। हालांकि, यहां ब्याज दर में कटौती का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। बैंक यह तय करने के लिए स्वतंत्र होते हैं कि कटौती कितनी होगी। इसलिए, इस तरह के लोन में मिलने वाली दर कटौती जरूरी नहीं कि रेपो रेट में हुई कटौती के बराबर हो।

परिस्थिति 3: कटौती पूरी तरह से बैंक या NBFC पर निर्भर

कुछ फ्लोटिंग रेट लोन ऐसे होते हैं जहां ब्याज दर की कटौती और समयसीमा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं होती। MCLR से पहले, बैंकों ने होम लोन को बेस रेट या प्राइम लेंडिंग रेट से जोड़ा हुआ था। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लोन। इन दोनों मामलों में ब्याज दर संशोधन आमतौर पर बैंक या NBFC की मर्जी पर निर्भर करता है। यहां तक कि ब्याज दर कटौती शुरू करने के लिए आपको खुद बैंक से संपर्क करना पड़ सकता है और प्रोसेसिंग फीस चुकानी पड़ सकती है।

परिस्थिति 4: कोई ब्याज दर कटौती नहीं

इसका असर बहुत कम होम लोन धारकों पर पड़ेगा। भारत में करीब 95% होम लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर हैं, लेकिन बाकी 5% फिक्स्ड रेट लोन हैं। फिक्स्ड रेट लोन रेपो रेट में बदलाव से प्रभावित नहीं होते। कुछ लोन में एक सीमित अवधि के लिए फिक्स्ड रेट होती है, जिसके बाद वे फ्लोटिंग में बदल जाते हैं। ऐसे मामलों में, उधारकर्ता अपने अमॉर्टाइजेशन शेड्यूल (amortization schedule) को देखकर यह समझ सकते हैं कि उनकी ब्याज दर कब बदलेगी और इसका भुगतान पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

उधारकर्ता क्या कर सकते हैं?

एक सही ब्याज दर वाला होम लोन सालों में लाखों रुपये की बचत करा सकता है। बाजार में सबसे कम होम लोन ब्याज दर 8.15-8.50% के बीच है। आमतौर पर 750 से अधिक क्रेडिट स्कोर वाले और स्थिर आय वाले ग्राहकों को सबसे अच्छे ऑफर मिलते हैं। अगर आप एक प्राइम उधारकर्ता हैं लेकिन 8.65% या इससे अधिक ब्याज दर चुका रहे हैं, तो आपको रीफाइनेंस (refinance) करने पर विचार करना चाहिए। इसके 2 तरीके हैं:-

  • अपने बैंक से अपने लोन को रेपो-लिंक्ड लोन में बदलने का अनुरोध करें, ताकि आपकी ब्याज दर स्वतः हर तिमाही में रीसेट हो।
  • अगर मौजूदा बैंक आपको अच्छा ऑफर नहीं दे रहा है, तो दूसरे बैंकों से अच्छे ऑफर देखें और अपने लोन को ट्रांसफर करवा लें। ध्यान दें कि रेपो-लिंक्ड लोन केवल बैंक ही ऑफर करते हैं।
  • रीफाइनेंस का सबसे अधिक फायदा तब होता है जब आपके लोन की आधी से अधिक अवधि बाकी हो और कुल रीफाइनेंस लागत (आमतौर पर लोन राशि का 1-2%) कुछ तिमाहियों में ही रिकवर हो जाए।
  • होम लोन एक लंबी अवधि की वित्तीय जिम्मेदारी है, जिसके लिए सही रणनीति जरूरी होती है। ब्याज दर में समय पर कटौती या सही समय पर रीफाइनेंस करने से आप भारी बचत कर सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी ने लिखी है, यह सिर्फ जानकारी के लिए है, किसी भी तरह के निवेश की सलाह नहीं है।)
Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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