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RBI:एनबीएफसी के लिए बनेंगे SRO,जानें क्या होगा फायदा और आरबीआई ने क्यों उठाया कदम

RBI SRO For NBFC: गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र के लिए अधिकतम दो एसआरओ को मान्यता दी जाएगी।आरबीआई ने अपनी विनियमित संस्थाओं के लिए एसआरओ को मान्यता देने के लिए मार्च में रूपरेखा जारी की थी।

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एनबीएफसी के SRO के लिए आवेदन

RBI SRO For NBFC:भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एनबीएफसी के लिए स्व-नियामकीय संगठनों (एसआरओ) की मान्यता के लिए आवेदन आमंत्रित कि हैंएसआरओ के रूप में मान्यता मिलने के बाद या परिचालन शुरू होने से पहले के एक साल में न्यूनतम दो करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति होनी चाहिए। गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र के लिए अधिकतम दो एसआरओ को मान्यता दी जाएगी।आरबीआई ने अपनी विनियमित संस्थाओं के लिए एसआरओ को मान्यता देने के लिए मार्च में रूपरेखा जारी की थी। इस रूपरेखा में उद्देश्य, दायित्व, पात्रता मानदंड, संचालनक मानक और आवेदन प्रक्रिया का जिक्र किया गया था।

क्या होगा फायदा

केंद्रीय बैंक के मुताबिक, एसआरओ की तकनीकी विशेषज्ञता से नियमों की प्रभावशीलता बढ़ती है और वे तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर अपनी राय देकर विनियामक नीतियों को तैयार करने एवं संशोधन में भी मदद करते हैं।आरबीआई ने एसआरओ के लिए आवेदन आमंत्रित करते हुए कहा, "एनबीएफसी क्षेत्र के लिए एसआरओ मुख्य रूप से निवेश और ऋण कंपनियों (एनबीएफसी-आईसीसी), आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) और फैक्टर्स (एनबीएफसी-फैक्टर्स) की श्रेणियों में एनबीएफसी के लिए परिकल्पित हैं। हालांकि एसआरओ में एनबीएफसी की अन्य श्रेणियां भी सदस्य हो सकती हैं।केंद्रीय बैंक ने कहा कि मान्यता-प्राप्त एसआरओ में एनबीएफसी-आईसीसी, एचएफसी और एनबीएफसी-फैक्टर्स का अच्छा मिश्रण होना चाहिए। इसके लिए आवेदन 30 सितंबर, 2024 तक दाखिल किए जा सकते हैं।

एनबीएफसी का डिजिटल लोन बढ़ा

डिजिटल ऋण देने वाली 37 सदस्य इकाइयों ने वित्त वर्ष 2023-24 में 1.46 लाख करोड़ रुपये के कर्ज दिए और इसमें सालाना आधार पर 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई।एफएसीई के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में दिए गए ऋणों की संख्या 35 प्रतिशत बढ़कर 10 करोड़ से अधिक हो गई।

उद्योग निकाय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च तिमाही में इन कंपनियों ने कुल 40,322 करोड़ रुपये के 2.69 करोड़ ऋण जारी किए। निकाय ने कहा कि 70 प्रतिशत ऋण 28 कंपनियों ने जारी किया, जो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के रूप में पंजीकृत हैं या जिनके पास अपने एनबीएफसी है।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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