भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक के नतीजे आज यानी 8 अप्रैल 2026 को घोषित होने वाले हैं। पूरे देश की नजरें आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के संबोधन पर टिकी हैं, क्योंकि इसी फैसले से यह तय होगा कि आपके होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) कम होगी या नहीं। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक उथल-पुथल और घरेलू महंगाई के आंकड़ों के बीच, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और रेपो रेट( rbi repo rate) को 5.25% पर बरकरार रख सकता है। अगर ऐसा होता है, तो कर्जदारों को फिलहाल सस्ती ईएमआई के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने इस वक्त आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने और आसमान छूती महंगाई पर लगाम लगाने के बीच संतुलन बनाने की एक कठिन चुनौती है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के संकेतों ने कच्चे तेल की कीमतों में कुछ राहत दी है, लेकिन फरवरी के अंत से जारी युद्ध के कारण तेल के दाम लंबे समय तक $100 प्रति बैरल के ऊपर बने रहे हैं। इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने 'आयातित महंगाई' (Imported Inflation) का खतरा बढ़ा दिया है। रुपया गिरकर 93 के स्तर तक पहुंच गया है, जिसे स्थिर करना केंद्रीय बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।
क्यों कम नहीं होगी EMI?
पिछले कुछ महीनों में घरेलू मोर्चे पर आर्थिक चुनौतियां और भी जटिल हुई हैं। महज 100 दिनों के भीतर रुपया लगभग ₹3 की भारी गिरावट दर्ज कर चुका है। इसी दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजारों से करीब 16.6 अरब डॉलर की निकासी की है, जिससे न केवल भारतीय मुद्रा बल्कि शेयर बाजार पर भी दबाव काफी बढ़ गया है। पूंजी के इस लगातार पलायन और रुपये की अस्थिरता को देखते हुए आरबीआई के सामने विदेशी मुद्रा विनिमय दर को संतुलित बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
RBI MPC Meeting LIVE: कहां देख सकेंगे लाइव अपडेट्स?
आरबीआई की इस महत्वपूर्ण मॉनेटरी पॉलिसी का सीधा प्रसारण रिजर्व बैंक के आधिकारिक YouTube चैनल पर किया जाएगा। इसके साथ ही, आप आरबीआई के सोशल मीडिया हैंडल्स और प्रमुख बिजनेस न्यूज पोर्टल्स पर भी पल-पल के लाइव अपडेट्स देख सकते हैं।

RBI Repo Rate
रेपो रेट और आपकी जेब का कनेक्शन
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक अन्य वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाता है, जिसका बोझ वे ग्राहकों पर डालते हैं और लोन महंगा हो जाता है। इसके विपरीत, रेपो रेट घटने पर ईएमआई सस्ती होने की उम्मीद रहती है। पिछले कुछ समय से आरबीआई ने महंगाई पर लगाम लगाने के लिए दरों को स्थिर रखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि मिडिल ईस्ट के तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने चिंता बढ़ाई है, लेकिन घरेलू मोर्चे पर आर्थिक विकास (GDP Growth) की रफ्तार संतोषजनक है, इसलिए आरबीआई फिलहाल 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की नीति अपना सकता है।
क्या कहते हैं बाजार के विशेषज्ञ?
बाजार जानकारों के मुताबिक आरबीआई के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ महंगाई को 4% के लक्ष्य के भीतर लाना है, तो दूसरी तरफ आर्थिक गतिविधियों को सुस्त होने से बचाना है। संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में एमपीसी के सदस्य इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या अभी ब्याज दरों में कटौती का सही समय है। अधिकांश जानकारों का मत है कि आरबीआई इस बार भी 'न्यूट्रल' स्टैंड अपनाते हुए दरों को 5.25% पर ही रखेगा। इसका मतलब है कि फिलहाल आपकी किस्तों में कोई बड़ी राहत मिलने की संभावना कम ही दिख रही है, हालांकि डिपॉजिट रखने वाले ग्राहकों के लिए एफडी (FD) पर ऊंची ब्याज दरें जारी रह सकती हैं।
वैश्विक संकट और भारतीय इकोनॉमी
मौद्रिक नीति पर वैश्विक परिस्थितियों का भी गहरा असर पड़ता है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई चेन बाधित होने की खबरों ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में आरबीआई कोई भी ऐसा जोखिम नहीं उठाना चाहेगा जिससे महंगाई फिर से अनियंत्रित हो जाए। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखकर बाजार में नकदी (Liquidity) के प्रवाह को संतुलित बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।
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