केंद्रीय बैंक आरबीआई (Reserve Bank of India) ने केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026 के लिए रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड ट्रांसफर करने का फैसला किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा सरप्लस ट्रांसफर माना जा रहा है। यह रकम सरकार को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी आर्थिक सहायता मानी जा रही है।
आरबीआई ने दर्ज की मजबूत आय
रिजर्व बैंक की कुल आय पिछले वर्ष की तुलना में 26.42 प्रतिशत बढ़ी, जबकि जोखिम प्रावधान (Risk Provisions) से पहले खर्च में 27.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, 31 मार्च 2026 तक RBI की बैलेंस शीट 20.61 प्रतिशत बढ़कर 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गई। यह डिविडेंड RBI की मजबूत आय और फॉरन एक्सचेंज ऑपरेशन से हुई कमाई की वजह से संभव हो पाया है। पिछले कुछ समय में आरबीआई ने फॉरेक्स मार्केट इंटर्वेंशन और विदेशी एसेट्स पर बेहतर रिटर्न के जरिए अच्छी आय दर्ज की है। यही वजह रही कि इस बार सरपल्स पेआउट रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।
राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने में मदद
सरकार के लिए यह रकम काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे राजकोषीय घाटा को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, वेलफेयर स्कीम और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर ज्यादा खर्च कर सकती है। इस पेआउट से सरकार की कर्ज की जरूरतें भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
डिविडेंड सरकार के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच
यह पेआउट ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें और विदेशों से सामान मंगाने पर आने वाला खर्च बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में RBI का यह बड़ा डिविडेंड सरकार के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है।
पिछले साल 2.69 लाख करोड़ हुए थे ट्रांसफर
पिछले साल की बात करें तो RBI ने पिछली बार भी रिकॉर्ड डिविडेंड पेआउट किया था। 2025 में RBI ने सरकार को करीब 2.69 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। इस बार पेआउट उससे भी ज्यादा रहा है। हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि बाजार को इससे और भी ज्यादा पेआउट की उम्मीद थी।
ECF पर आधारित ट्रांसफर का फैसला
RBI सरप्लस ट्रांसफर का फैसला इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क (ECF) के आधार पर लिया जाता है। इस फ्रेमवर्क के तहत RBI अपनी बैलेंस सीट में आपात स्थिति के लिए सुरक्षित फंड (Contingency Reserve) बनाए रखता है और बाकी सरप्लस को सरकार को ट्रांसफर करता है। RBI के पास कुछ अतिरिक्त पैसा सुरक्षित रखना जरूरी होता है, ताकि भविष्य में आर्थिक संकट या अचानक आने वाली मुश्किल परिस्थितियों का आसानी से सामना किया जा सके। संशोधित ECF के तहत RBI ने कॉन्टिजेंट रिस्क बफर को बैलेंस शीट के आकार का 6.5 प्रतिशत बनाए रखा। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिस्क बफर में 1.09 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को मंजूरी दी, जो पिछले वित्त वर्ष में अलग रखे गए 44,861.7 करोड़ रुपये की तुलना में ज्यादा है।
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