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KCC Scheme: बढ़ेगा किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा, RBI ने उठाया बड़ा कदम

Kisan Credit Card: भारतीय रिजर्व बैंक ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन और एकीकरण के लिए मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य योजना का दायरा बढ़ाना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और कृषि क्षेत्र की बदलती व उभरती जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था तैयार करना है, ताकि किसानों को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित ऋण सुविधा मिल सके।

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भारतीय रिजर्व बैंक ने जारी किया केसीसी मसौदा (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Kisan Credit Card: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए एक नया मसौदा जारी किया है। इस मसौदे का मकसद किसानों को ज्यादा सुविधाएं देना, प्रक्रिया को आसान बनाना और खेती की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखना है। आरबीआई चाहता है कि केसीसी योजना ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचे और उन्हें समय पर सही मात्रा में कर्ज मिल सके। आरबीआई ने कहा है कि इस मसौदे पर आम लोग, बैंक, वित्तीय संस्थान और अन्य संबंधित पक्ष 6 मार्च, 2026 तक अपने सुझाव और टिप्पणियां दे सकते हैं। इसके बाद मिले सुझावों के आधार पर अंतिम नियम तय किए जाएंगे।

फसल अवधि को किया जाएगा मानकीकृत

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने केसीसी लोन की मंजूरी और उसकी वापसी की प्रक्रिया को एक जैसा और सरल बनाने के लिए फसल सत्रों की अवधि तय करने का प्रस्ताव रखा है। अभी अलग-अलग जगहों पर फसलों की अवधि अलग मानी जाती है, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है। नए प्रस्ताव के अनुसार, कम समय में तैयार होने वाली फसलों को 12 महीने के चक्र में रखा जाएगा। वहीं, लंबी अवधि में तैयार होने वाली फसलों को 18 महीने के चक्र में शामिल किया जाएगा। इससे किसानों को यह स्पष्ट रहेगा कि उन्हें कर्ज कब तक चुकाना है और बैंक भी उसी हिसाब से योजना बना सकेंगे।

केसीसी की कुल अवधि छह साल करने का प्रस्ताव

लंबी अवधि वाली फसलों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड की कुल वैधता अवधि छह साल करने का प्रस्ताव रखा है। इसका मतलब है कि किसान छह साल तक इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। इससे बार-बार नए सिरे से आवेदन करने की जरूरत कम होगी और किसानों को लगातार वित्तीय सहायता मिलती रहेगी। यह कदम खासतौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद होगा जो बागवानी या अन्य लंबी अवधि की फसलें उगाते हैं, जिनमें निवेश ज्यादा और समय भी अधिक लगता है।

निकासी सीमा होगी वास्तविक लागत के अनुसार

मसौदे में यह भी सुझाव दिया गया है कि केसीसी के तहत मिलने वाली निकासी सीमा को हर फसल सत्र की अनुमानित लागत के अनुसार तय किया जाए। अभी कई बार किसानों को वास्तविक जरूरत से कम कर्ज मिल पाता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ते हैं। नई व्यवस्था लागू होने पर फसल की अनुमानित लागत के आधार पर ही कर्ज की सीमा तय होगी। इससे किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त धन मिल सकेगा।

तकनीकी खर्च भी होंगे शामिल

आरबीआई ने खेती में बढ़ती तकनीकी जरूरतों को भी ध्यान में रखा है। मसौदे के अनुसार, अब मिट्टी की जांच, वास्तविक समय में मौसम की जानकारी, जैविक खेती का प्रमाणन और अच्छी कृषि पद्धतियों के प्रमाणन जैसे खर्चों को भी केसीसी के तहत मान्य खर्चों में शामिल किया जाएगा। हालांकि ये खर्च उसी 20 प्रतिशत अतिरिक्त राशि के भीतर रखे जाएंगे, जो पहले से कृषि परिसंपत्तियों के रखरखाव और मरम्मत के लिए दी जाती है। यानी किसानों को नई तकनीक अपनाने में भी आर्थिक मदद मिलेगी, लेकिन कुल अतिरिक्त सीमा के अंदर ही।

गवर्नर ने पहले ही की थी घोषणा

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फरवरी में जारी मौद्रिक नीति वक्तव्य में इन बदलावों की घोषणा की थी। अब इन्हें लागू करने से पहले मसौदे के रूप में सार्वजनिक किया गया है, ताकि सभी संबंधित पक्ष अपनी राय दे सकें। कुल मिलाकर, आरबीआई के ये प्रस्ताव किसानों के लिए केसीसी योजना को ज्यादा उपयोगी, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं। यदि ये बदलाव लागू होते हैं, तो किसानों को समय पर और उनकी जरूरत के अनुसार कर्ज मिल सकेगा, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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