Real Estate Loan: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बैंकों को रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (REIT) को लोन देने की अनुमति देने का मसौदा परिपत्र जारी किया है। इसका उद्देश्य बैंकों के फंसे हुए पैसे को रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश के लिए मुक्त करना और निवेशकों को नए अवसर प्रदान करना है। मसौदे के अनुसार, किसी भी रीट को दिए जाने वाले कुल लोन की सीमा उसकी कुल संपत्ति के 49 प्रतिशत तक होगी। हालांकि, बैंक अपने बोर्ड और क्रेडिट रेटिंग के आधार पर इसे और भी कम कर सकते हैं।
कौन-कौन से REIT होंगे शामिल
मसौदे में साफ किया गया है कि बैंक केवल सूचीबद्ध रीट को ही ऋण प्रदान कर सकते हैं। वर्तमान में भारत में पांच सूचीबद्ध रीट हैं, ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट, एम्बेसी ऑफिस पार्क्स रीट, माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट, नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट और नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट। इन रीट का संचालन कम से कम तीन साल हो चुका होना चाहिए और पिछले तीन वर्षों में उन पर कोई बड़ी नियामक कार्रवाई नहीं हुई हो।
REIT और इनविट में अंतर
REIT और इनविट (बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट) दोनों ही निवेशकों को आय अर्जित करने वाली संपत्तियों में हिस्सेदारी देने के लिए बनाए गए हैं। इनका मकसद है संस्थागत और खुदरा निवेशकों के कोष के माध्यम से चालू रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बैंकों के फंसे हुए पैसे को मुक्त करना। पहले बैंकों को इनविट को ऋण देने की अनुमति थी, लेकिन रीट को इससे बाहर रखा गया था। अब आरबीआई ने मसौदे के जरिए रीट को भी इसमें शामिल किया है।
लोन की शर्तें और निगरानी
मसौदे के अनुसार, बैंक केवल उन्हीं रीट को ऋण देंगे जो सूचीबद्ध हैं और जिनके संचालन पर कोई बड़ी प्रतिकूल नियामक कार्रवाई नहीं हुई है। बैंक को ऋण के उपयोग पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऋण का इस्तेमाल प्रतिबंधित गतिविधियों, जैसे कि भूमि अधिग्रहण, में न हो। यह कदम निवेशकों और बाजार की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
प्रस्ताव और सुझाव प्रक्रिया
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने इस मसौदे पर छह मार्च, 2026 तक सुझाव आमंत्रित किए हैं। योजना है कि नए नियम एक जुलाई, 2026 या उससे पहले लागू किए जाएँ। आरबीआई का कहना है कि इस कदम से रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी और बैंकों के फंसे हुए संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
REIT कैसे काम करते हैं
रीट ऐसे निवेश माध्यम हैं जो आय अर्जित करने वाली रियल एस्टेट संपत्तियों के मालिक होते हैं या उन्हें संचालित करते हैं। इसका फायदा यह है कि निवेशक सीधे संपत्ति खरीदने की बजाय इसमें हिस्सेदारी लेकर संपत्ति से होने वाली आय में हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, ऑफिस बिल्डिंग या शॉपिंग मॉल से मिलने वाली किराया आय का हिस्सा निवेशकों तक पहुंचता है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों को रीट को लोन देने की अनुमति मिलने से रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश और तरलता बढ़ेगी। इससे निवेशकों को नियमित आय का स्रोत मिलेगा और बैंक भी अपनी फंसी पूंजी को बेहतर तरीके से उपयोग कर पाएंगे। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि ऋण की निगरानी और जोखिम प्रबंधन बेहद जरूरी है। इस कदम से भारत में रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश के अवसर बढ़ेंगे और बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह पहल निवेशकों को स्थिर आय देने वाले रीट में भाग लेने का अवसर भी प्रदान करेगी।
