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RBI का बड़ा प्लान: 16 दिसंबर को करेगा 5 अरब डॉलर की रुपया-डॉलर अदला-बदली, जानिए क्यों?

Dollar-Rupee Swap: भारतीय रिजर्व बैंक ने घोषणा की कि वह 16 दिसंबर को 5 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 45,000 करोड़ रुपये) के डॉलर–रुपया खरीद-बिक्री स्वैप की नीलामी करेगा। जानिए यह कदम उठाने जा रहा है आरबीआई।

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बाजार में नकदी भरने को तैयार RBI (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Dollar-Rupee Swap: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फाइनेंशियल सिस्टम में अधिक कैश उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। केंद्रीय बैंक 16 दिसंबर को 5 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 45,000 करोड़ रुपये) की डॉलर–रुपया खरीद-बिक्री नीलामी आयोजित करेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों के पास रुपये की उपलब्धता बढ़ाना है, ताकि बाजार में तरलता यानी कैश की कमी न हो।

क्या है यह डॉलर–रुपया अदला-बदली?

इस प्रक्रिया में देश के बैंक RBI को अमेरिकी डॉलर बेचेंगे और बदले में RBI उन्हें रुपये देगा। ऐसा करने से बैंकिंग व्यवस्था में रुपये की मात्रा बढ़ती है, जिससे वित्तीय बाजार में कैश की किल्लत कम होती है। अदला-बदली की तय अवधि पूरी होने पर बैंक उतनी ही मात्रा में डॉलर वापस खरीद लेते हैं। इसे एक सामान्य विदेशी मुद्रा खरीद-बिक्री अदला-बदली माना जाता है।

नीलामी के मुख्य नियम

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक यह नीलामी 16 दिसंबर को होगी। अदला-बदली की अवधि 36 महीने (3 साल) की होगी। कुल नीलामी राशि 5 अरब अमेरिकी डॉलर तय की गई है। न्यूनतम बोली आकार 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहेगा। इसके बाद बैंक 10 लाख डॉलर के गुणांक में बोली लगा सकेंगे। इन शर्तों के तहत बैंक अपनी जरुरत और क्षमता के अनुसार बोली लगाकर रुपये प्राप्त कर सकेंगे। इससे तत्काल बाजार में कैश का प्रवाह बढ़ेगा।

सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद से भी मिलेगी राहत

डॉलर–रुपया स्वैप नीलामी के साथ-साथ RBI ने सरकारी बॉन्ड खरीदने की भी घोषणा की है। 11 दिसंबर 2025 और 18 दिसंबर 2025 को दो चरणों में 50,000–50,000 करोड़ रुपये की कुल 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद नीलामी होगी। सरकारी प्रतिभूतियां खरीदने से RBI सीधे तौर पर बाजार में रुपये डालता है। यह कदम भी कैश की स्थिति को बेहतर करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्यों जरूरी है यह कदम?

हाल के दिनों में बाजार में कैश की स्थिति कड़ी हुई है। त्योहारी सीजन के बाद बढ़ी हुई मांग, सरकारी खर्च में उतार-चढ़ाव और बैंकिंग सिस्टम की वित्तीय गतिविधियों के कारण तरलता पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में केंद्रीय बैंक का उद्देश्य बाजार को यह भरोसा दिलाना है कि जरूरत पड़ने पर पर्याप्त कैश उपलब्ध कराई जाएगी।

आरबीआई की निगरानी जारी

रिजर्व बैंक ने कहा है कि वह बदलती कैश स्थिति और बाजार के हालात पर लगातार नजर रखेगा। अगर आवश्यकता महसूस हुई, तो वित्तीय व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने के लिए और भी कदम उठाए जा सकते हैं। आरबीआई का यह निर्णय बाजार में नकदी की कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। डॉलर–रुपया स्वैप और सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद के जरिए बैंकिंग प्रणाली में रुपये की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे आर्थिक गतिविधियों को बल मिलने की उम्मीद है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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