RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक की तीन दिवसीय मौद्रिक समीक्षा नीति की बैठक शुरू हो गई है। वित्त वर्ष 2023-24 की यह पहली बैठक है और जिस तरह से अमेरिकी, यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने कर्ज महंगा किया है। ऐसे में एक बार फिर आरबीआई के भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की संभावना है। इसके पहले मार्च में फेडरल रिजर्व, यूरोपियन सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड ने नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी से लेकर 0.50 फीसदी तक बढ़ोतरी की है।
जिस तरह से फरवरी में भारत में महंगाई दर आरबीआई के सामान्य स्तर (6 फीसदी) से ज्यादा है, उसे देखते हुए एक बार फिर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। अगर आरबीआई 6 अप्रैल को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है तो यह लगातार छठवीं बार होगा, जब वह रेपो रेट में बढ़ोतरी करेगा। आरबीआई के इस कदम से होम लोन , कार लोन से लेकर दूसरे कर्ज महंगे हो जाएंगे। और मौजूदा ग्राहकों की लोन अवधि में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है।
7 साल के उच्चतम स्तर पर होगा रेपो रेट
अगर आरबीआई 6 मई को रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है तो रेपो रेट साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएंगी। ऐसी संभावना है कि आरबीआई इस बार 0.25 फीसदी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। मई 2022 से आरबीआई अभी तक 2.50 फीसदी तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर चुका है। और इस बढ़ोतरी के साथ रेपो रेट 6.75 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगा। और इसका असर लोन की मांग पर पड़ेगा। महंगी ब्याज दरों के जरिए आरबीआई महंगाई को नियंत्रित करना चाहता है। इसकी वजह से न केवल कर्ज महंगा हो रहा है बल्कि मौजूदा ग्राहकों की ईएमआई बढ़ रही है। और जिन ग्राहकों की ईएमआई में बढ़ोतरी नहीं हुई है उनके कर्ज की अवधि में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है।
एक बढ़ोतरी के बाद रोक सकता है ब्याज दरों में बढ़ोतरी
एक्सपर्ट को उम्मीद है कि आरबीआई इस बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद उसमें आगे के लिए लगाम लगा सकता है। कोटक चेरी के सीईओ श्रीकांत सुब्रमण्यन के अनुसार आरबीआई मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस बार रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि इसके बाद वह ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर लगाम लगा सकता है। इस बार आरबीआई की तरफ से ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना है।
