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सिर्फ स्पर्म काउंट नहीं, स्पर्म की शेप भी तय करती है पिता बनने की क्षमता, जानें डॉक्टर की राय

Sperm Shape And Male Fertility: ​क्या सिर्फ स्पर्म काउंट अच्छा होना ही पिता बनने के लिए काफी है? नहीं। एम्स से एमडी और इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. वैशाली शर्मा बता रही हैं कि स्पर्म की शेप भी फर्टिलिटी पर बड़ा असर डालती है। जानिए क्यों यह जांच जरूरी मानी जाती है।

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पिता बनने के लिए स्पर्म की शेप भी जरूरी है

Sperm Shape And Male Fertility: जब शादी के बाद लंबे समय तक बच्चा नहीं होता, तो जांच की शुरुआत अक्सर सीमन टेस्ट से होती है। ज्यादातर लोग इसी रिपोर्ट में स्पर्म काउंट और स्पर्म की गति देखकर संतुष्ट हो जाते हैं। अगर दोनों सामान्य निकल आएं, तो माना जाता है कि पुरुष पूरी तरह स्वस्थ है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी सच्चाई नहीं है। कई बार स्पर्म की संख्या और उसकी गति ठीक होने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता। इसकी वजह स्पर्म की बनावट यानी उसकी शेप भी हो सकती है। एम्स (AIIMS) से एमडी, कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट, लैप्रोस्कोपिक सर्जन और इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. वैशाली शर्मा कहती हैं कि पुरुषों की फर्टिलिटी को समझने के लिए सिर्फ स्पर्म काउंट नहीं, बल्कि स्पर्म की शेप की जांच भी बेहद जरूरी है। यह छोटी-सी दिखने वाली जानकारी कई बार गर्भधारण में आ रही असली परेशानी का कारण बता देती है।

स्पर्म की शेप क्यों रखती है इतना महत्व

हर स्पर्म का एक तय आकार होता है। उसका सिर और पूंछ सही तरीके से बने होने चाहिए, तभी वह आसानी से अंडाणु तक पहुंचकर उसे निषेचित कर सकता है। अगर स्पर्म का आकार सामान्य नहीं है, तो उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए अच्छी फर्टिलिटी के लिए केवल स्पर्म की संख्या नहीं, उसकी बनावट भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है।

खराब शेप वाले स्पर्म से क्या परेशानी हो सकती है

डॉ. वैशाली शर्मा बताती हैं कि कुछ स्पर्म का सिर दो हिस्सों में बंटा होता है, कुछ के दो सिर होते हैं, कुछ की पूंछ बहुत छोटी होती है या दो पूंछ होती हैं। ऐसी असामान्य बनावट को डॉक्टर टेराटोजूस्पर्मिया कहते हैं। आसान शब्दों में कहें तो इसका मतलब है कि स्पर्म का आकार सामान्य नहीं है। ऐसे स्पर्म के लिए अंडाणु तक पहुंचना या उसे निषेचित करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि अच्छी रिपोर्ट दिखने के बावजूद कुछ दंपतियों को गर्भधारण में परेशानी आती रहती है।

आईवीएफ में क्यों बढ़ जाती है इसकी अहमियत

अगर कोई दंपती आईवीएफ या दूसरी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रहा है, तो स्पर्म की शेप की जांच और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है। खासकर आईसीएसआई तकनीक में डॉक्टर सबसे स्वस्थ और सही आकार वाले स्पर्म को चुनकर अंडाणु में पहुंचाते हैं। ऐसे में स्पर्म की सही बनावट इलाज की सफलता में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए इस जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हर लैब में नहीं होती यह जांच

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्पर्म की शेप की जांच को सीमन टेस्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है। इसके बावजूद आज भी कई जगह यह जांच नियमित रूप से नहीं की जाती। डॉ. वैशाली शर्मा कहती हैं कि सिर्फ स्पर्म काउंट और उसकी गति देखकर पूरी फर्टिलिटी का आकलन नहीं किया जा सकता। अगर गर्भधारण में दिक्कत आ रही है, तो डॉक्टर की सलाह पर पूरी जांच कराना बेहतर रहता है।

अच्छी जीवनशैली से घट सकता है जोखिम

डॉ. वैशाली शर्मा के अनुसार, तनाव, धूम्रपान, तंबाकू, शराब, मोटापा, बढ़ता वायु प्रदूषण और खराब जीवनशैली स्पर्म की गुणवत्ता पर बुरा असर डाल सकते हैं। इन आदतों में सुधार करने से फर्टिलिटी बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सिर्फ स्पर्म की शेप सामान्य न होना यह साबित नहीं करता कि कोई पुरुष कभी पिता नहीं बन सकता। सही निष्कर्ष के लिए स्पर्म काउंट, उसकी गति, स्पर्म की गुणवत्ता, महिला की प्रजनन क्षमता और दंपती की पूरी मेडिकल हिस्ट्री को साथ में देखकर ही डॉक्टर इलाज की दिशा तय करते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सही कदम है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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