Home Loan: घर खरीदना हर व्यक्ति का सपना होता है, लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए लिया गया होम लोन आने वाले 20 से 30 साल तक आपकी वित्तीय जिंदगी को प्रभावित करता है। अधिकांश लोग होम लोन लेते समय सिर्फ यह देखते हैं कि मौजूदा आय से EMI आसानी से भर सकते हैं या नहीं। लेकिन फाइनेशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही सवाल यह नहीं है कि आज EMI भर सकते हैं या नहीं बल्कि यह है कि क्या 10, 20 या 30 साल बाद भी यही EMI बिना तनाव के भर पाएंगे? यही असली होम लोन स्ट्रेस टेस्ट है।
आज की आय नहीं, आने वाले वर्षों की तैयारी जरूरी
मान लीजिए किसी व्यक्ति की मासिक आय 1.5 लाख रुपये है और वह 42,000 रुपये की EMI आसानी से चुका रहा है। पहली नजर में यह फैसला सही लगता है। लेकिन अगले 20-30 वर्षों में नौकरी बदल सकती है, वेतन वृद्धि धीमी हो सकती है, बच्चों की पढ़ाई, माता-पिता की देखभाल, स्वास्थ्य खर्च और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में आज आरामदायक लगने वाली EMI भविष्य में बड़ा बोझ बन सकती है। इसलिए होम लोन लेने से पहले केवल वर्तमान आय नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
बैंक जितना लोन दे, उतना लेना जरूरी नहीं
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि अगर बैंक 70 लाख रुपये या 1 करोड़ रुपये तक का होम लोन देने को तैयार है तो उतना लोन लेना सुरक्षित होगा। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंक केवल आपकी आय और मौजूदा कर्ज को देखकर लोन की सीमा तय करता है। वह आपके भविष्य के लक्ष्य, बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट, स्वास्थ्य खर्च या पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में नहीं रखता। इसलिए बैंक की अधिकतम पात्रता को अपनी उधार लेने की क्षमता नहीं मानना चाहिए। कम लोन लेने से भविष्य में वित्तीय दबाव कम रहता है और बचत व निवेश जारी रखना आसान होता है।
EMI ही नहीं, घर के कई और खर्च भी होते हैं
घर खरीदने की लागत केवल Home Loan EMI तक सीमित नहीं होती। स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क, कानूनी खर्च, इंटीरियर, फर्नीचर, शिफ्टिंग, सोसाइटी मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, बीमा और समय-समय पर मरम्मत जैसे कई खर्च भी जुड़ते हैं। कई लोग इन खर्चों का सही अनुमान नहीं लगाते, जिससे बाद में मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए होम लोन लेने से पहले इन सभी खर्चों का हिसाब लगाना बेहद जरूरी है।
कुल ब्याज का हिसाब भी जरूर लगाएं
एक्सपर्ट्स के अनुसार अधिकांश लोग केवल EMI देखते हैं, लेकिन पूरे लोन की वास्तविक लागत नहीं समझते। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति 40 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए 9% ब्याज दर पर लेता है, तो उसकी EMI करीब 36,000 रुपये होगी। लेकिन पूरे कार्यकाल में वह करीब 86.4 लाख रुयपे का भुगतान करेगा, जिसमें करीब 46 लाख रुपये सिर्फ ब्याज होगा। यानी ब्याज की राशि मूल लोन से भी अधिक हो सकती है। इसलिए केवल EMI नहीं, बल्कि कुल भुगतान और ब्याज का भी आकलन करना चाहिए।
होम लोन लेने से पहले खुद से पूछें ये 6 सवाल
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि होम लोन लेने से पहले कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जरूर तलाशने चाहिए।
- पहला, अगर ब्याज दर 1.5% से 2% तक बढ़ जाए तो क्या आप बढ़ी हुई EMI या लंबी अवधि का बोझ उठा पाएंगे?
- दूसरा, अगर कुछ महीनों के लिए नौकरी चली जाए या वेतन वृद्धि उम्मीद से कम हो तो क्या EMI समय पर भर पाएंगे?
- तीसरा, अगर परिवार में मेडिकल इमरजेंसी या बड़ा खर्च आ जाए तो क्या EMI प्रभावित हुए बिना उसका सामना कर सकेंगे?
- चौथा, क्या आपके पास कम से कम 6 से 9 महीने की EMI और जरूरी खर्चों के बराबर इमरजेंसी फंड है?
- पांचवां, क्या होम लोन लेने के बाद भी रिटायरमेंट और बच्चों की पढ़ाई जैसे लक्ष्यों के लिए निवेश जारी रख पाएंगे?
- छठा, क्या आपकी सभी लोन की कुल EMI मासिक आय के 40% से 50% के भीतर रहेगी?
इमरजेंसी फंड और निवेश को न करें नजरअंदाज
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि होम लोन लेने से पहले कम से कम 6 से 9 महीने के जरूरी खर्च और EMI के बराबर इमरजेंसी फंड तैयार होना चाहिए। इसके अलावा रिटायरमेंट, बच्चों की शिक्षा और अन्य लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए चल रहे निवेश को बंद नहीं करना चाहिए। अगर EMI चुकाने के कारण SIP या अन्य निवेश रोकने पड़ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आपने अपनी क्षमता से अधिक लोन ले लिया है।
होम लोन आपके वित्तीय प्लान का हिस्सा होना चाहिए
वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि होम लोन पूरी वित्तीय योजना नहीं बनना चाहिए, बल्कि उसका एक हिस्सा होना चाहिए। पहले भविष्य के निवेश और जरूरी वित्तीय लक्ष्यों के लिए राशि तय करें, फिर बची हुई रकम के आधार पर EMI का निर्णय लें। इससे घर का सपना भी पूरा होगा और बाकी वित्तीय लक्ष्य भी प्रभावित नहीं होंगे।
घर खरीदना जीवन का बड़ा फैसला है, इसलिए केवल वर्तमान आय के आधार पर होम लोन लेना सही रणनीति नहीं है। बदलती परिस्थितियों, बढ़ते खर्चों और संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए पहले अपना वित्तीय स्ट्रेस टेस्ट जरूर करें। अगर आपके पास पर्याप्त इमरजेंसी फंड है, निवेश जारी रह सकता है और भविष्य में भी EMI बिना तनाव के चुकाई जा सकती है, तभी होम लोन वास्तव में किफायती माना जाएगा। सही योजना के साथ लिया गया होम लोन आपको अपना घर भी देगा और भविष्य के दूसरे सपनों को भी सुरक्षित रखेगा।
