Times Now Navbharat
live-tv
Premium

क्या केंद्र की रणनीति से CJP बैकफुट पर? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उम्मीद क्यों हुई कमजोर

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग संसद से सड़क तक उठ रही है। संसद का मानसून सत्र जो कि 20 जुलाई से शुरू हुआ, वह लगातार बाधित हुआ है। विपक्ष का कहना है कि प्रधान के इस्तीफे के बाद ही नीट पेपर लीक सहित शिक्षा में सुधार के मुद्दे पर चर्चा में हिस्सा लेगी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं।

Image
विपक्ष और सीजेपी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। तस्वीर-AI
Written by: Alok Rao
Updated Jul 25, 2026, 13:04 IST
Follow on Google News

CJP Protest: शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान क्या इस्तीफा देंगे? यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। प्रधान के इस्तीफे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार आमने-सामने हैं। सरकार का इशारा साफ है कि वह प्रधान का इस्तीफा नहीं लेगी तो वहीं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) बार-बार कहती आ रही है कि उसे प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं होगा। सीजेपी ने कहा है कि प्रधान यदि इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह अपना रुख और सख्त करेगी। शुक्रवार को सरकार और सीजेपी के बीच हुई बैठक में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं हुआ। सरकार ने सीजेपी से कहा है कि वह इस्तीफे पर शनिवार को होने वाली बैठक में अपना जवाब देगी। अब सभी की नजरें इस बैठक पर लगी हैं।

प्रधान का इस्तीफा क्यों नहीं ले लेती सरकार?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग संसद से सड़क तक उठ रही है। संसद का मानसून सत्र जो कि 20 जुलाई से शुरू हुआ, वह लगातार बाधित हुआ है। विपक्ष का कहना है कि प्रधान के इस्तीफे के बाद ही नीट पेपर लीक सहित शिक्षा में सुधार के मुद्दे पर चर्चा में हिस्सा लेगी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं। सीजेपी का प्रदर्शन दिल्ली से बाहर अन्य राज्यों में फैल गया है। विपक्ष और सीजेपी दोनों अपने प्रदर्शनों से यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार छात्रों और युवाओं के खिलाफ है, छात्रों पर लाठीचार्ज कर रही है और प्रधान को बचा रही है। इन प्रदर्शनों से सरकार की छवि छात्र विरोधी बनने का खतरा बना हुआ है। एक्सपर्ट मानते हैं कि यह मुद्दा यदि लंबा खिंचा या उग्र हुआ तो इसका राजनीतिक नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। सवाल यह भी है कि प्रदर्शन खत्म कराने और संसद चलाने के लिए सरकार आखिर प्रधान से इस्तीफा क्यों नहीं ले लेती? इसमें कौन सी बड़ी बात है। प्रधान यदि इस्तीफा दे देते हैं तो सीजेपी का प्रदर्शन खत्म हो जाएगा और संसद का गतिरोध टूट जाएगा।

तो सरकार इसलिए नहीं लेगी प्रधान का इस्तीफा?

एक्सपर्ट का कहना है कि सवाल केवल प्रधान के इस्तीफे भर का नहीं है। प्रधान का इस्तीफा आगे सरकार के लिए कई मुसीबतें और चुनौतियां लेकर आ सकता है। प्रधान का इस्तीफा सरकार क्यों नहीं ले रही है। इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस ने वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा है कि 'सरकार किसी समहू अथवा प्रदर्शनकारी संगठन के दबाव के आगे झुकते हुए दिखना नहीं चाहती। कल कोई और समूह आगे आ सकता है और अन्य मंत्रियों यहां तक कि प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांग सकता है। एक बार शुरू हो जाने पर इसका अंत नहीं होगा।'

JP nadda

JP nadda

'चलो संसद' मार्च फिर शुरू करने की चेतावनी

शुक्रवार को सरकार के साथ बैठक में रांका और दास ने कथित रूप से कहा कि प्रधान के इस्तीफे पर यदि 24 घंटे के भीतर फैसला नहीं होता है तो वह अपना 'चलो संसद' मार्च फिर शुरू करेगी। इस पर नड्डा और सिंह ने सीजेपी के प्रवक्ताओं से प्रधान के इस्तीफे की मांग पर शीर्ष नेताओं का फैसला आने तक इंतजार करने के लिए कहा। सूत्रों का कहना है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सीजेपी की इस मांग पर विचार करने के मूड में नहीं है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह से त्रुटिरहित बनाने के लिए सरकार हर संभावित कदम उठाने के लिए तैयार है। सूत्रों का कहना है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री खुद इस मुद्दे पर करीब नजर रख रहे हैं और छात्रों से सीधा संवाद कर रहे हैं। इंस्टाग्राम पर अपने वीडियो के जरिए उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद किया है। सरकार की कोशिश कहीं से भी छात्र विरोधी न दिखने की है। साथ ही इसके पीछे छिपी राजनीतिक मंशा को भी वह उजागर करना चाहती है। वह संदेश देना चाहती है कि पेपर लीक सहित छात्रों के मुद्दों पर गंभीर है। इसके लिए वह कानून से लेकर परीक्षाओं से जुड़ी पूरी व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने पर लगी है।

सजा के सख्त प्रावधान वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी

पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए कैबिनेट ने शुक्रवार को एक विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। नए संशोधन के बाद पेपर लीक में दोषी पाए जाने के बाद 10 साल तक कैद हो सकती है और 10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। केंद्र ने इससे पहले वर्ष 2024 में भी इस संबंध में एक नया कानून लाया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 को मंजूरी देने के करीब चार महीने बाद, जून 2024 में इसे अधिसूचित किया गया था। उस समय राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) प्रश्नपत्र लीक के मामलों को लेकर देशभर में व्यापक आक्रोश था। इस अधिनियम का उद्देश्य संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) सहित केंद्र सरकार की विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। पहले के कानून में, नकल और अन्य अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए दोषियों को कम से कम तीन से पांच वर्ष के कारावास का प्रावधान किया गया था। वहीं, नकल कराने वाले गिरोहों या संगठित अपराध में शामिल लोगों के लिए पांच से 10 वर्ष तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान था।

NTA ने ने 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया

नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'एनटीए में व्यापक बदलाव किए जाने की तैयारी है और आगे भी कई सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। कम से कम 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है और उनमें से कुछ के खिलाफ कानूनी तथा आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।’एनटीए ने महाप्रबंधक स्तर पर पेशेवर नियुक्तियों के एक समूह के लिए विज्ञापन जारी किए हैं और अलग से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के 'प्रतिभा सेतु पोर्टल’ के माध्यम से 16 युवा पेशेवरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। अधिकारी ने कहा कि आने वाले कुछ हफ्तों में उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुसार एनटीए के दस अलग-अलग कार्यक्षेत्रों में और लोगों की भर्ती की जायेगी।

Abhijit Dipke

Abhijit Dipke

उच्च शिक्षा सचिव को पद से हटाया

यही नहीं, प्रश्नपत्र लीक और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के डिजिटल मूल्यांकन में गड़बड़ियों समेत शिक्षा मंत्रालय से जुड़े हालिया विवादों के कारण कई बड़े अधिकारियों का तबादला किया गया है। नीट यूजी (चिकित्सा स्नातक में प्रवेश से संबंधित परीक्षा) प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ विद्यार्थियों के विरोध-प्रदर्शन के जोर पकड़ने पर केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार देर रात उच्च शिक्षा सचिव के पद से वरिष्ठ अधिकारी विनीत जोशी को हटा दिया।

हरफनमौला और सरकार के करीबी माने जाने वाले जोशी ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में कई अहम पदों पर काम किया है। इनमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पहले महानिदेशक और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कार्यवाहक अध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं।

कई राज्यों में हुआ फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से बृहस्पतिवार को की गई घोषणा के बाद आई है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगले सप्ताह संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा जिसमें प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधान होंगे और उन्होंने त्वरित अदालतें गठित करने के निर्देश दिए। इसके बाद भाजपा शासित राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली ने अपने यहां प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक और उनसे जुड़ी अनियमितताओं के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष त्वरित अदालतें गठित कर दी हैं। आने वाले समय में अन्य राज्य भी फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर सकते हैं। मई में नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक होने के बाद छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे तथा अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की थी।

End of Article