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बैंक में फंसा आपका पैसा? RBI ने अनक्लेम्ड डिपॉजिट लौटाने के लिए दिया 3 महीने का समय, ऐसे करें क्लेम

अनक्लेम डिपॉजिट सिर्फ आंकड़ों में बड़ी रकम नहीं है, बल्कि यह आम जनता का मेहनत से कमाया हुआ पैसा है। आरबीआई की पहल, उद्गम पोर्टल और बीमा नियामकों के नियम इस पैसे को सही हाथों तक पहुंचाने का रास्ता खोलते हैं। RBI ने भी बैंकों को ये पैसा उसके सही मालिक तक पहुंचाने के लिए 3 महीने का समय दिया है.

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Unclaimed Deposit

अगर आपका या आपके किसी जानने वाले का पैसा बैंक में अटका हुआ है तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है. दरअसल, भारतीय बैंकों के पास हजारों करोड़ अनक्लेम्ड या लावारिस पड़े हैं. यानी इन पैसों का कोई मालिक नहीं है ऐसा इसलिए क्योंकि इसपर अभी तक किसी ने दावा नहीं किया है और न निकाला है. RBI ने हाल ही में बैंकों से अपील की है कि वो 67,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के इस अनक्लेम यानि लावारिस डिपॉजिट को उनके असली मालिकों तक पहुंचाने में मदद करे. अगर आपका या आपके किसी जानने वाला का ये पैसा है तो बता दें RBI ने इस पैसे पर मालिकाना हक़ जताने का आखिरी मौका 3 महीने का समय दिया। आइए आपको बताते हैं आप इसपर कैसे क्लेम कर सकते हैं?

क्या होते हैं अनक्लेम्ड डिपॉजिट?

अक्सर लोगों के बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या बीमा की रकम लंबे समय तक यूं ही पड़ी रह जाती है और उसका कोई दावा नहीं करता। समय के साथ ये रकम अनक्लेम डिपॉजिट (Unclaimed Deposits) की श्रेणी में चली जाती है। आरबीआई और बीमा नियामक ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और अब आम लोगों तक उनकी ही रकम पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

कौन-कौन सी रकम होती है अनक्लेम डिपॉजिट?

Inactive Saving and Current Account: अगर किसी बैंक खाते में लगातार दस साल तक कोई लेन-देन नहीं हुआ, तो उसे निष्क्रिय मानकर उसका पैसा अनक्लेम डिपॉजिट की लिस्ट में डाल दिया जाता है।

मैच्योर हो चुकी एफडी (FDs): कई बार लोग फिक्स्ड डिपॉजिट करवाते हैं लेकिन उसकी मैच्योरिटी डेट के बाद भी रकम नहीं निकालते। अगर ऐसा 10 साल तक चलता रहे तो वह पैसा भी अनक्लेम डिपॉजिट बन जाता है।

अनक्लेम डिविडेंड और बीमा की रकम: कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला डिविडेंड, ब्याज वारंट या बीमा कंपनियों से मिलने वाला दावा, यदि तय समय पर क्लेम नहीं किया गया, तो वह रकम भी अनक्लेम कैटेगरी में चली जाती है।

10 साल बाद रकम कहां जाती है?

ऐसा पैसा जो लगातार 10 साल तक निष्क्रिय पड़ा रहे, उसे संबंधित बैंक "डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड" में ट्रांसफर कर देता है। यह फंड भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियंत्रण में संचालित होता है और इसका उद्देश्य जागरूकता फैलाना और ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रखना है।

इनलोगों पर रहेगा खास फोकस

आरबीआई ने अक्टूबर से दिसंबर तक एक बड़ा आउटरीच प्रोग्राम शुरू करने का ऐलान किया है। यह अभियान खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों पर फोकस करेगा, जहां वित्तीय साक्षरता अपेक्षाकृत कम होती है। इस दौरान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से स्थानीय भाषाओं में जानकारी दी जाएगी ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी अनक्लेम राशि के बारे में जान सकें।

साथ ही, स्टेट लेवल बैंकिंग कमेटियां (SLBCs) यह विश्लेषण करेंगी कि किस राज्य या क्षेत्र में सबसे ज्यादा पैसा फंसा हुआ है और उसे वापस दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

उद्गम पोर्टल आएगा काम

जनता की सुविधा के लिए आरबीआई ने उद्गम पोर्टल (UDGAM Portal) लॉन्च किया है। यह एक केंद्रीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां लोग अपने या अपने परिवार के नाम से खोज सकते हैं कि कहीं उनका पैसा किसी बैंक में बिना क्लेम के पड़ा तो नहीं है।

अभी तक करीब 30 बैंक इस पोर्टल से जुड़े हैं और यह लगभग 90% अनक्लेम डिपॉजिट वैल्यू को कवर करता है। यानी ज्यादातर पैसा इस पोर्टल पर खोजा जा सकता है।

यहां भी पड़ा है लावारिस पैसा

सिर्फ बैंक ही नहीं, बीमा कंपनियों में भी बड़ी मात्रा में अनक्लेम पैसा पड़ा होता है। IRDAI (बीमा नियामक प्राधिकरण) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी पॉलिसीधारक की राशि 10 साल तक क्लेम नहीं की जाती, तो बीमा कंपनियों को यह पैसा ब्याज सहित वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष में ट्रांसफर करना होता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कोष में पैसा जाने के बाद भी, पॉलिसीधारक या उसके वारिस अगले 25 साल तक इस रकम का दावा कर सकते हैं। वहीं, इस फंड का उपयोग वरिष्ठ नागरिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है।

अगर आपका पैसा फंसा हुआ हो तो क्या करें?

अगर आपको लगता है आपका या आपके परिवार का पैसा कहीं बिना क्लेम के पड़ा हो सकता है, तो आप

  • 1. उद्गम पोर्टल पर खोजें: सबसे पहले पोर्टल पर जाकर नाम डालकर देखें।
  • 2. बैंक/बीमा कंपनी से संपर्क करें: अगर पोर्टल पर जानकारी मिले तो सीधे संबंधित संस्थान से बात करें।
  • 3. दस्तावेज तैयार रखें: क्लेम के लिए आधार, पैन, पता प्रमाण और बैंकिंग डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ेगी।
  • 4. जरूरत पड़े तो सलाह लें: अगर केस जटिल हो, तो वित्तीय सलाहकार या वकील से मदद लें।

अनक्लेम डिपॉजिट सिर्फ आंकड़ों में बड़ी रकम नहीं है, बल्कि यह आम जनता का मेहनत से कमाया हुआ पैसा है। आरबीआई की पहल, उद्गम पोर्टल और बीमा नियामकों के नियम इस पैसे को सही हाथों तक पहुंचाने का रास्ता खोलते हैं। जरूरी है कि हम समय-समय पर अपने और परिवार के खातों की जानकारी चेक करें ताकि मेहनत की कमाई व्यर्थ न पड़ी रहे।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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