भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार (16 मार्च 2026) को भुगतान एग्रीगेटर कैशफ्री पेमेंट्स इंडिया (Cashfree Payments India) प्राइवेट लिमिटेड पर नियमों का पालन नहीं करने के कारण 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह कार्रवाई कंपनी के संचालन में पाए गए नियामकीय उल्लंघनों के आधार पर की गई है।
एस्क्रो खाते से नियमों के खिलाफ निकासी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक RBI के बयान में कहा गया कि कंपनी ने अपने एस्क्रो खाते से कुछ ऐसी निकासी की थी, जो नियमों के तहत अनुमत नहीं थी। एस्क्रो खाता एक विशेष प्रकार का बैंक खाता होता है, जिसमें ग्राहक की राशि सुरक्षित रखी जाती है और उसे केवल तय शर्तों के अनुसार ही निकाला जा सकता है। आरबीआई ने कहा कि इस मामले में कंपनी ने इस प्रक्रिया का उल्लंघन किया।
जुर्माना मार्च के आदेश के तहत लगाया गया
RBI ने स्पष्ट किया कि कैशफ्री पर यह जुर्माना 9 मार्च 2026 के आदेश के तहत लगाया गया है। इस आदेश से पहले केंद्रीय बैंक ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। जांच में पाया गया कि कंपनी ने नियमों का सही पालन नहीं किया, जिसके बाद यह आर्थिक दंड तय किया गया।
वैध जांच अप्रैल 2024 से जून 2025 तक
RBI ने यह भी बताया कि यह कार्रवाई कंपनी के संचालन की अप्रैल 2024 से जून 2025 के बीच की गई वैध जांच के आधार पर की गई है। केंद्रीय बैंक ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी ने कुछ प्रक्रियाओं में नियामकीय अनुपालन की अनदेखी की।
कार्रवाई का उद्देश्य
केंद्रीय बैंक ने जोर देकर कहा कि यह जुर्माना केवल कंपनी के नियामकीय उल्लंघन के कारण लगाया गया है। इसका मकसद यह नहीं है कि कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी लेन-देन या समझौते की वैधता पर कोई टिप्पणी की जाए। RBI ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से वित्तीय संस्थानों को नियमों के प्रति सजग रहने का संदेश मिलता है।
नियमों का पालन जरूरी
RBI की कार्रवाई यह दिखाती है कि वित्तीय संस्थानों और भुगतान एग्रीगेटर्स को अपने संचालन में नियमों का पूरी तरह पालन करना आवश्यक है। एस्क्रो खाते जैसी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने पर न केवल जुर्माना लगाया जा सकता है, बल्कि नियामकीय रिपोर्टिंग और विश्वास पर भी असर पड़ सकता है।
