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RBI का बड़ा आदेश, बैंक अब 15 दिन में निपटाएंगे लॉकर और अकाउंट क्लेम

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बैंकों के मृत ग्राहकों के खातों और लॉकर से जुड़े दावों को निपटाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नए निर्देशों के अनुसार, बैंक अब 15 दिनों के भीतर ऐसे दावों का निपटान करेंगे और अगर देरी होती है तो नामित व्यक्तियों को मुआवजा दिया जाएगा। RBI का उद्देश्य मृतक ग्राहकों से जुड़े मामलों को तेज, सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि नामांकित व्यक्ति बिना किसी परेशानी के अपने अधिकारों का लाभ उठा सकें।

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बैंकों के मृत ग्राहकों के खातों और लॉकर से जुड़े दावों को निपटाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को बैंकों के मृत ग्राहकों के खातों और लॉकर से संबंधित दावों का 15 दिनों के भीतर निपटान करने के लिए संशोधित मानदंड जारी किए। रिजर्व बैंक ने कहा कि निपटान में देरी होने पर नॉमिनी यानी नामित व्यक्तियों को मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। संशोधित निर्देशों का उद्देश्य मृत ग्राहकों से संबंधित दावों के निपटान में बैंकों की गतिविधियों को सरल बनाना है। इसमें ग्राहक सेवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए दस्तावेजीकरण को भी मानकीकृत किया गया है।

RBI ने क्या कहा?

केंद्रीय बैंकों ने कहा, ''भारतीय रिजर्व बैंक (बैंकों के मृत ग्राहकों के संबंध में दावों का निपटान) निर्देश, 2025' के संशोधित निर्देशों को यथासंभव शीघ्रता से लागू किया जाएगा। इसे 31 मार्च, 2026 तक लागू करना होगा।'' ये निर्देश मृत ग्राहक के जमा खातों, सुरक्षित जमा लॉकर और मृत ग्राहक के सुरक्षित अभिरक्षा में रखी गई वस्तुओं के दावों के निपटान से संबंधित हैं।

किन पर लागू होगा नियम?

आरबीआई ने कहा कि ऐसे जमा खाते, जहां जमाकर्ता ने किसी को नामित किया हो, वहां जमाकर्ता की मृत्यु पर नामितों को बकाया राशि का भुगतान बैंक की देयता से वैध ‘डिस्चार्ज’ माना जाएगा। जिन खातों में किसी को नामित न किया गया हो, वहां बैंकों को दावों के निपटान के लिए एक सरल प्रक्रिया अपनाने के लिए कहा गया है, जहां कुल देय राशि तय सीमा से कम है। यह सीमा सहकारी बैंकों के मामले में पांच लाख रुपये और अन्य बैंकों के मामले में 15 लाख रुपये है। बैंक अपने स्तर पर उच्च सीमा निर्धारित कर सकते हैं। आरबीआई ने कहा कि इससे अधिक राशि होने पर बैंक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र जैसे अतिरिक्त दस्तावेज मांग सकता है।

देरी से देने पर क्या होगा?

अगर बैंक 15 दिन के भीतर जमा खातों या लॉकर के दावों को निपटाने में सफल नहीं होता है, तो इसके लिए नियमों के अनुसार उन्हें कारण बताना होगा। जमा खातों के मामलों में, देरी की अवधि के लिए बैंक को निपटान राशि पर प्रचलित बैंक ब्याज दर के साथ सालाना 4% अतिरिक्त ब्याज देना होगा। वहीं, लॉकर या सुरक्षित वस्तुओं के दावों में देरी होने पर बैंक को हर दिन के लिए 5,000 रुपये का मुआवजा देना होगा। ये नियम ग्राहकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, ताकि मृतक के खाते या लॉकर से जुड़े दावे तेजी से और सही तरीके से निपटाए जाएं। प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना इसका मुख्य उद्देश्य है, ताकि नामांकित व्यक्तियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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