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RBI बड़ा कदम: आज करेगा 2 लाख करोड़ रुपये की VRRR नीलामी, क्यों लिया यह फैसला

VRRR Auction: आरबीआई 17 अप्रैल को 2 लाख करोड़ रुपये की वीआरआरआर नीलामी करेगा। इसका उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी घटाना और जीएसटी भुगतान से पहले ब्याज दरों को स्थिर रखना है।

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आरबीआई का बड़ा कदम: बाजार में नकदी संतुलन के लिए VRRR नीलामी का ऐलान (तस्वीर-istock)

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VRRR Auction : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बाजार में कैश की स्थिति को संतुलित रखने के लिए एक अहम कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने घोषणा की है कि वह 17 अप्रैल 2026 को 2 लाख करोड़ रुपये की सात दिन की ‘परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो’ (VRRR) नीलामी करेगा। इस प्रक्रिया के जरिए आरबीआई बैंकों से कुछ समय के लिए पैसा अपने पास लेता है, ताकि बाजार में जरूरत से ज्यादा मौजूद नकदी को नियंत्रित किया जा सके। यह नीलामी सुबह 9:30 बजे से 10 बजे के बीच आयोजित की जाएगी और इसमें ली गई राशि 24 अप्रैल को बैंकों को वापस कर दी जाएगी।

क्या है VRRR और क्यों जरूरी है यह कदम

VRRR यानी ‘वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो’ एक ऐसा माध्यम है, जिससे आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त पैसे को अस्थायी रूप से अपने पास खींच लेता है। जब बाजार में बहुत ज्यादा कैश होती है, तो इससे ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है और वित्तीय संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में आरबीआई इस तरह की नीलामी करके कैश को नियंत्रित करता है। इससे बाजार में स्थिरता बनी रहती है और ब्याज दरों को अनियंत्रित होने से रोका जा सकता है।

अतिरिक्त तरलता बनी चिंता की वजह

आरबीआई के अनुसार, 15 अप्रैल तक बैंकिंग प्रणाली में करीब 5.22 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी मौजूद थी। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी का होना यह संकेत देता है कि बाजार में जरूरत से ज्यादा पैसा घूम रहा है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक को इसे संतुलित करने के लिए कदम उठाना पड़ा। अगर इस अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित नहीं किया जाए, तो इससे महंगाई और वित्तीय अस्थिरता जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

जीएसटी भुगतान का भी पड़ता है असर

हर महीने की 20 तारीख के आसपास जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) का भुगतान किया जाता है। इस दौरान कंपनियां और कारोबारी सरकार को टैक्स जमा करते हैं, जिससे बाजार से बड़ी मात्रा में नकदी बाहर निकल जाती है। इसका असर यह होता है कि वित्तीय प्रणाली में नकदी की उपलब्धता कम हो जाती है और अल्पकालिक ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरबीआई पहले से ही कदम उठाता है, ताकि अचानक नकदी की कमी से बाजार प्रभावित न हो।

नकदी संतुलन बनाए रखने की रणनीति

आरबीआई की यह रणनीति काफी संतुलित मानी जाती है। पहले वह अतिरिक्त नकदी को वीआरआरआर के जरिए बाहर निकालता है और फिर जरूरत पड़ने पर उसे वापस सिस्टम में डाल देता है। इस बार भी ऐसा ही होगा 17 अप्रैल को बैंकों से ली गई राशि 24 अप्रैल को वापस कर दी जाएगी। इससे जीएसटी भुगतान के बाद आने वाली नकदी की कमी को पूरा किया जा सकेगा और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।

पहले भी उठाया गया था ऐसा कदम

यह पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने इस तरह की नीलामी की घोषणा की है। इससे पहले 10 अप्रैल को भी केंद्रीय बैंक ने करीब दो लाख करोड़ रुपये की वीआरआरआर नीलामी की थी। उस नीलामी की अवधि 17 अप्रैल को पूरी हो रही है। यानी, आरबीआई लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार कदम उठा रहा है।

बाजार और ब्याज दरों पर असर

इस कदम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अल्पकालिक ब्याज दरें नियंत्रण में रहेंगी। जब बाजार में नकदी संतुलित रहती है, तो बैंकों के लिए कर्ज देना और लेना आसान हो जाता है। इससे न सिर्फ बैंकिंग प्रणाली मजबूत होती है, बल्कि आम लोगों और कारोबारियों को भी स्थिर ब्याज दरों का लाभ मिलता है। कुल मिलाकर, आरबीआई का यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने और वित्तीय प्रणाली को संतुलित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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