US-Iran War की वजह से मार्च से ही होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से ग्लोबल ऑयल सप्लाई बाधित चल रही है। पिछले महीने अमेरिका और ईरान ने एक शांति समझौता किया, जिसके बाद क्रूड के दाम 75 डॉलर तक लुढ़क गए। लेकिन, अब फिर दोनों देशों के बीच युद्ध भड़क गया है। इसका सीधा असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा है, जहां से ऑयल और गैस के जहाजों की आवाजाही रुक गई है। इसकी वजह से क्रूड ऑयल के दाम पांच सप्ताह के शीर्ष पर पहुंच गए हैं।
होर्मुज के बंद होने का असर ग्लोबल फ्यूल प्राइस पर भी पड़ रहा है। होर्मुज बंद होने की वजह से भले ही अमेरिका सीधे तौर पर प्रभावित नहीं होता है। लेकिन, क्रूड के दाम बढ़ने का असर तुरंत पड़ता है। फिलहाल, अमेरिका में पेट्रोल (Gasoline) का दाम बढ़कर 4 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गया है। वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तान में भी महंगे क्रूड का असर देखने को मिल रहा है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स के देशभर के करीब 15 हजार फ्यूल पंप 22 जुलाई से अनिश्चितकाल के लिए हड़तार कर रहे हें।
पाकिस्तान में हड़ताल क्यों?
पाकिस्तान में सरकार की नई फ्यूल प्राइसिंग नीति के विरोध में पेट्रोल पंप मालिकों ने देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हड़ताल 22 जुलाई रात 12 बजे से अनिश्चितकाल के लिए चलेगी। पाकिस्तान सरकार अब अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर रोजाना ईंधन की कीमतें अपडेट करना चाहती है। सरकार का कहना है कि इससे वैश्विक बाजार का असर तेजी से उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। लेकिन, पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि रोजाना कीमत बदलना व्यावहारिक नहीं है। इससे छोटे डीलरों का कारोबार प्रभावित होगा। इसके अलावा डीलरों का कमीशन पिछले तीन साल से नहीं बढ़ा है। नई व्यवस्था का फायदा केवल बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मिलेगा।
अमेरिका में फिर महंगा हुआ पेट्रोल
अमेरिकी मोटर क्लब AAA के मुताबिक सोमवार को रेगुलर गैसोलीन की राष्ट्रीय औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई। पिछले साल इसी समय यह करीब 3.14 डॉलर प्रति गैलन थी। हालांकि, पूरे अमेरिका में कीमतें एक जैसी नहीं हैं। कुछ राज्यों में पेट्रोल पहले से ही 4 डॉलर से ऊपर बिक रहा था, जबकि कई राज्यों में कीमतें अभी भी इससे कम हैं। इसकी वजह स्थानीय टैक्स, सप्लाई और बाजार की स्थिति है।
क्यों बढ़ीं कीमतें?
कुछ समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में नरमी आई थी, जिससे पेट्रोल भी सस्ता हुआ था। लेकिन हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और उसका असर सीधे पेट्रोल की कीमतों पर दिखने लगा। Brent Crude 92 डॉलर प्रति बैरल ऊपर पहुंच गया है। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड करीब 85.75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
भारत पर क्या हुआ असर?
होर्मुज में में ट्रैफिक थमने का भारत पर सीधा असर होता है। फिलहाल, भारत ने होर्मुज के रास्ते ईराक से आने वाली क्रूड सप्लाई को रोक दिया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में होर्मुज में तनाव लंबा चलता है और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो भारत पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें रुपये की विनिमय दर, टैक्स, रिफाइनिंग लागत और सरकारी नीति भी अहम भूमिका निभाती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने का असर भारत में तुरंत और समान अनुपात में दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।
क्या फिर 100-120 तक जाएगा क्रूड?
विश्लेषकों के मुताबिक इस बार क्रूड का संकट और गहरा हो सकता है। क्योंकि, होर्मुज पहले से बंद है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर ईरान और अमेरिका दोनों ही तरफ से हमले की आशंका रहती है। वहीं, इस बार बॉब अल मंडेब स्ट्रेट भी इसकी जद में है। अगर बॉब अल मंडेब स्ट्रेट भी होर्मुज की तरह बंद होता है, तो क्रूड की कीमतों में और ज्यादा उफान आ सकता है। क्योंकि, इसकी वजह से सऊदी अरब से आने वाली सप्लाई रुक जाएगी। इसके बाद क्रूड के दाम कितने ऊपर जाएंगे, फिलहाल इस बात का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। लेकिन, इतना तय माना जा रहा है कि अब फिर से सप्लाई संकट बढ़ा, तो क्रूड के दाम पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
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