26 दिसंबर को जब पूरा शेयर बाजार दबाव में नजर आ रहा था, उसी समय रेलवे सेक्टर के सरकारी शेयरों ने सबको चौंका दिया। रेलवे से जुड़ी कई कंपनियों के शेयरों में लगातार पांचवें दिन जबरदस्त तेजी देखने को मिली। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL), रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (RailTel), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) और IRCON इंटरनेशनल जैसे शेयरों में 8 से 12 फीसदी तक की उछाल दर्ज की गई। यह तेजी ऐसे समय आई है, जब बाजार में गिरावट का माहौल बना हुआ था।
सबसे ज्यादा चर्चा RVNL के शेयरों की रही, जिनमें एक ही दिन में करीब 12 फीसदी तक की तेजी आई। मई के बाद यह RVNL में एक दिन की सबसे बड़ी उछाल मानी जा रही है। वहीं RailTel, IRFC और IRCON के शेयर भी 8 से 10 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार करते दिखे। निवेशकों के लिए यह रैली इसलिए भी खास रही क्योंकि रेलवे शेयर पिछले कुछ समय से दबाव में थे।
पांच दिनों में शानदार रैली
पिछले पांच कारोबारी दिनों की बात करें तो रेलवे शेयरों ने जबरदस्त रिटर्न दिया है। RVNL के शेयरों में इस दौरान करीब 24 फीसदी की तेजी आ चुकी है। वहीं IRFC, IRCON और RailTel के शेयरों में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़त देखने को मिली है। IRCON को छोड़ दें तो बाकी सभी रेलवे शेयर लगातार पांच दिन से हरे निशान में बने हुए हैं। IRCON के शेयर भी पांच में से चार दिन तेजी के साथ बंद हुए हैं।
नया रेल किराया लागू
रेलवे शेयरों में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है पैसेंजर ट्रेनों के किराए में बढ़ोतरी। रेल मंत्रालय ने 26 दिसंबर से संशोधित किराया लागू कर दिया है। यह इस साल दूसरी बार है, जब ट्रेन किराए में इजाफा किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, नए किराया ढांचे से 2025-26 में रेलवे को करीब 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है।
सरकारी बयान के मुताबिक, नॉन-मेल और नॉन-एक्सप्रेस ट्रेनों में स्लीपर, एसी और नॉन-एसी कैटेगरी के लिए 1 पैसा प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में यह बढ़ोतरी 2 पैसे प्रति किलोमीटर की है। भले ही यह बढ़ोतरी मामूली लगे, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका असर रेलवे की कमाई पर दिख सकता है।
बाजार इसे पॉजिटिव क्यों मान रहा है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि किराया बढ़ोतरी से रेलवे की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। भले ही इसका सीधा फायदा रेलवे की PSU कंपनियों को तुरंत न मिले, लेकिन लंबी अवधि में इसका असर जरूर दिखेगा। मजबूत वित्तीय स्थिति का मतलब है कि रेलवे भविष्य में कैपेक्स यानी पूंजीगत खर्च बढ़ा सकता है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, वैगन, सिग्नलिंग और दूसरी सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।
प्राइमस पार्टनर्स के श्रवण शेट्टी के मुताबिक, किराया बढ़ोतरी से रेलवे की कमाई सुधरने की उम्मीद है, जिससे आगे चलकर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को फायदा हो सकता है। यही वजह है कि निवेशक अभी से रेलवे शेयरों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
बजट से पहले पोजिशनिंग भी वजह
एक और बड़ी वजह आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 को माना जा रहा है। बाजार को उम्मीद है कि सरकार अगले बजट में रेलवे सेक्टर के लिए बड़ा आवंटन कर सकती है। इसी उम्मीद में निवेशक पहले से ही रेलवे शेयरों में पोजिशन बना रहे हैं।
SBI के फंडामेंटल रिसर्च हेड सनी अग्रवाल का कहना है कि मौजूदा रैली का एक बड़ा कारण बजट से जुड़ी उम्मीदें हैं। उनके मुताबिक, शुरुआती ट्रिगर जुपिटर वैगन्स में प्रमोटर के प्रेफरेंशियल इश्यू के कन्वर्जन से मिला, जिसका असर बाद में पूरे रेलवे सेक्टर की EPC कंपनियों पर देखने को मिला।
हालांकि एक्सपर्ट्स निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि IRCON, RITES और RVNL जैसी कंपनियों में आई मौजूदा तेजी का इस्तेमाल मुनाफावसूली के लिए किया जा सकता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को सोच-समझकर फैसला लेने की जरूरत है।
