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Quick Commerce का नया झटका! डिलीवरी और प्लेटफॉर्म फीस के बाद अब Rain Surcharge वसूल रहीं कंपनियां

मानसून में Swiggy, Blinkit और Zepto जैसे ऐप्स से सामान मंगाना अब महंगा पड़ेगा। खराब मौसम और तेज बारिश के दौरान कंपनियां डिलीवरी फीस के साथ 15 से 30 रुपये का अतिरिक्त 'रेन सरचार्ज' ले रही हैं, जिससे आपका कुल बिल बढ़ सकता है।

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बिल में जुड़कर आएगा 'रेन सरचार्ज'

बारिश के मौसम में घर बैठे-बैठे गर्म चाय, पकौड़े या रोजमर्रा का राशन मंगाना हर किसी को बहुत सहूलियत भरा लगता है। Zepto, Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने हमारी जिंदगी को इतना आसान बना दिया है कि अब चंद मिनटों में सामान हमारे दरवाजे पर पहुंच जाता है। हालांकि, मानसून के इस सुहावने मौसम में अगली बार ऑर्डर पंच करने से पहले अपने बिल का ब्रेकअप ध्यान से चेक कर लें, वरना आपकी जेब पर बिना वजह की चपत लग सकती है। दरअसल, तेज बारिश के दौरान इन सभी ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने अतिरिक्त शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है, जिसे 'रेन सरचार्ज' (Rain Surcharge) का नाम दिया गया है।

कौन कितना लेता है रेन सरचार्ज?

अगर आंकड़ों और नियमों पर नजर डालें तो ब्लिंकिट (Blinkit) बारिश के दौरान डिलीवरी फीस के अलावा करीब 15 रुपये तक का रेन सरचार्ज जोड़ रहा है। वहीं जेप्टो (Zepto) और स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) जैसे प्लेटफॉर्म्स ग्राहकों से प्रति ऑर्डर 30 रुपये तक का रेन सरचार्ज वसूल रहे हैं। यह शुल्क सामान्य दिनों में ली जाने वाली डिलीवरी फीस से पूरी तरह अलग होता है। यानी अगर आपकी सामान्य डिलीवरी फीस 20 या 30 रुपये है, तो बारिश के समय यह सरचार्ज जुड़कर आपकी कुल डिलीवरी लागत दोगुनी या उससे भी ज्यादा कर देता है। ग्राहकों को अचानक बढ़ता यह कुल बिल झटका दे रहा है।

चौंकाने वाली बात यह है कि ऑनलाइन मंगाया जाने वाला सामान सिर्फ 'रेन सरचार्ज' की वजह से ही महंगा नहीं हो रहा है, बल्कि बिल में कई तरह के छुपे हुए चार्ज भी एक साथ जुड़ जाते हैं। सामान्य डिलीवरी फीस और रेन सरचार्ज के अलावा, कंपनियां हर ऑर्डर पर अलग से 'प्लेटफॉर्म हैंडलिंग फीस' (Platform Handling Fee) भी ले रही हैं। इतना ही नहीं, जब बारिश के दौरान अचानक एक साथ कई लोग ऐप पर ऑर्डर करने लगते हैं, तो सिस्टम खुद-ब-खुद 'हाई डिमांड सरचार्ज' (High Demand Surcharge) भी लागू कर देता है। इस तरह एक छोटे से 100 या 200 रुपये के ऑर्डर पर ग्राहक को 60 से 80 रुपये सिर्फ टैक्स और अलग-अलग सरचार्ज के रूप में देने पड़ रहे हैं।

कंपनियों का क्या है कहना?

कंपनियों का तर्क है कि बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे डिलीवरी पार्टनर्स (Delivery Partners) को सामान पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे जोखिम भरे और चुनौतीपूर्ण मौसम में डिलीवरी बॉयज को सड़कों पर उतरने के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें अतिरिक्त आर्थिक इंसेंटिव देने के लिए यह सरचार्ज लगाया जाता है। हालांकि, ग्राहकों का मानना है कि डिलीवरी पार्टनर्स को मिलने वाला इंसेंटिव पूरी तरह वाजिब है, लेकिन प्लेटफॉर्म फीस और हाई डिमांड चार्ज के नाम पर कंपनियों को पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए ताकि ग्राहकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।

मानसून के इस पूरे सीजन में अगर आप अपनी मेहनत की कमाई बचाना चाहते हैं, तो ऑनलाइन ऑर्डर करने से पहले बिल में 'View Bill Details' पर क्लिक करके सभी शुल्कों को ध्यान से जांचें। तेज बारिश रुकने का थोड़ा इंतजार करना या अलग-अलग ऐप्स के चार्जेस की आपस में तुलना करके ऑर्डर करना आपके पैसों की बचत करा सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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