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जमा वृद्धि मामले में प्राइवेट बैंकों ने सरकारी बैंकों को पछाड़ा, सबसे आगे कौन?

Banks Growth: प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने जमा वृद्धि में सार्वजनिक बैंकों को पीछे छोड़ते हुए मजबूत प्रदर्शन किया है। बावजूद इसके बैंकिंग क्षेत्र कुल मिलाकर जमा जुटाने में लगातार चुनौतियों और दबाव का सामना कर रहा है।

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निजी बैंक जमा में छा गए, सरकारी बैंक पीछे, चुनौती बनी रही (तस्वीर-istock)

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Banks Growth: प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने हाल ही में जमा राशि में मजबूत बढ़त दर्ज की है और इस मामले में सरकारी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, प्राइवेट बैंकों (Private banks) ने 12 से 17 प्रतिशत तक जमा बढ़ाया, जबकि सरकारी बैंकों में यह वृद्धि 2 से 14 प्रतिशत तक रही। हालांकि, कुल मिलाकर बैंकिंग प्रणाली के लिए जमा बढ़ाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बैंक कम लागत वाली जमा (जैसे बचत और चालू खाते) पर लगातार दबाव महसूस कर रहे हैं। इसके कारण बैंक अब जमा प्रमाणपत्र और अन्य साधनों के जरिये अधिक धन जुटाने पर निर्भर हैं। खासकर चालू और बचत खाते (CASA) में वृद्धि धीमी रही है, क्योंकि अन्य वित्तीय उत्पादों की तुलना में इन पर मिलने वाले कम ब्याज दर ने इनको कम आकर्षक बना दिया है।

प्राइवेट बैंकों का प्रदर्शन

प्राइवेट बैंकों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में सबसे अधिक जमा वृद्धि दर्ज की। बैंक की जमा राशि 17.2 प्रतिशत बढ़कर 2.84 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसके बाद कोटक महिंद्रा बैंक की जमा वृद्धि 14.7 प्रतिशत रही और एचडीएफसी बैंक ने 14.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, एचडीएफसी बैंक की जमा वृद्धि अगले दो वर्षों तक यानी वित्त वर्ष 2027-28 तक 14 प्रतिशत बनी रहने की संभावना है। इस अवधि तक बैंक का कर्ज-जमा अनुपात 94 प्रतिशत तक घट सकता है, जो वित्तीय स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

सरकारी बैंकों का प्रदर्शन

सरकारी क्षेत्र के बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया ने जनवरी-मार्च तिमाही में 14.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने 14 प्रतिशत और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 13.37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। हालांकि, कुछ बड़े बैंक जैसे एसबीआई ने मार्च तिमाही के अस्थायी आंकड़े साझा नहीं किए हैं। कुल मिलाकर, जमा वृद्धि में सार्वजनिक बैंक निजी बैंकों की तुलना में पीछे हैं, लेकिन कर्ज वितरण के मामले में उनका प्रदर्शन बेहतर रहा।

कर्ज में सुधार और वृद्धि

कर्ज वितरण में सरकारी बैंक निजी बैंकों से बेहतर स्थिति में रहे। सरकारी बैंकों ने 12 से 22 प्रतिशत तक कर्ज वृद्धि दर्ज की, जबकि प्राइवेट बैंकों की वृद्धि 12 से 20 प्रतिशत रही। उदाहरण के लिए बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.92 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया। यूको बैंक ने 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.34 लाख करोड़ रुपये और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 18.9 प्रतिशत वृद्धि के साथ 3.45 लाख करोड़ रुपये का कर्ज वितरित किया। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक 15 मार्च 2026 तक बैंकिंग क्षेत्र में कर्ज वृद्धि 13.8 प्रतिशत रही। पर्याप्त नकदी उपलब्धता और जीएसटी कटौती के बाद उपभोग-आधारित सुधार की वजह से यह तेजी बनी हुई है।

जमा और कर्ज में संतुलन

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र के लिए यह समय संतुलन बनाने का है। प्राइवेट बैंक जमा बढ़ाने में तेज हैं, जबकि सरकारी बैंक कर्ज वितरण में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। भविष्य में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और लाभप्रदता के लिए दोनों ही पहलुओं का संतुलन आवश्यक है। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में प्राइवेट और सरकारी दोनों बैंकों ने अपनी मजबूती दिखाई, लेकिन चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल के चलते जमा जुटाने और कर्ज वितरण दोनों ही मामलों में सतत प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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