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Gold-Silver ETF में निवेश की तैयारी, पहले समझ लें मुनाफे पर कितना टैक्स देना होगा

ETF का फायदा ये है कि आपको असली गहने या सिल्वर बार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती आप डिजिटल रूप में निवेश कर सकते हैं और बाजार की कीमतों का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, कई निवेशक ये नहीं जानते कि ETF में निवेश से होने वाले मुनाफे पर टैक्स कैसे लगता है।

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Gold ETF

सोने की कीमतें दिन पर दिन आसमान छू रही हैं ऐसे में फिजिकल गोल्ड खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं है। वहीं, सोने में निवेश को हमेशा से बेहतर और हाई रिटर्न वाला सुरक्षित निवेश माना गया है। ऐसे में अगर आप फिजिकल गोल्ड की बजाए Gold-Silver ETF में निवेश की तैयारी कर रहे हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। लेकिन एक बात का आपको और ध्यान रखना होगा। Gold ETF की कमाई पर टैक्स का। अगर आप ETF से कमाई करते हैं तो आपको कितना टैक्स देना होगा आइए बताते हैं।

क्या है गोल्ड-सिल्वर ETF?

अगर आप इस वक्त सोना और चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं, लेकिन फिजिकल गोल्ड खरीदना नहीं चाहते, तो गोल्ड और सिल्वर ETF आपके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, एक ऐसा निवेश साधन है जो सोने या चांदी की कीमतों को ट्रैक करता है। इसका फायदा ये है कि आपको असली गहने या सिल्वर बार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती आप डिजिटल रूप में निवेश कर सकते हैं और बाजार की कीमतों का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, कई निवेशक ये नहीं जानते कि ETF में निवेश से होने वाले मुनाफे पर टैक्स कैसे लगता है। चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

ETF पर टैक्स कैसे लगता है?

गोल्ड या सिल्वर ETF को डेटा फंड (Debt Fund) की कैटेगरी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इस पर टैक्स का नियम वही लागू होता है जो डेट म्यूचुअल फंड पर होता है। अगर आप 3 साल के अंदर ETF बेचते हैं, तो इससे होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा। इस पर टैक्स आपकी इनकम टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से लगेगा। वहीं अगर आप 3 साल के बाद ETF बेचते हैं, तो ये लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) की कैटेगरी में आएगा। इस पर 20% टैक्स लगेगा, लेकिन आप इंडेक्सेशन बेनिफिट का फायदा ले सकते हैं।

इंडेक्सेशन क्या है?

इंडेक्सेशन का मतलब है कि टैक्स कैलकुलेशन करते समय महंगाई दर (Inflation) को ध्यान में रखा जाता है। इससे आपके टैक्स की राशि कम हो जाती है, यानी आपको कम टैक्स देना पड़ता है।

मान लीजिए अगर आपने 3 साल पहले ₹1 लाख का ETF खरीदा था और आज उसे ₹1.4 लाख में बेच रहे हैं, तो पूरे ₹40,000 पर टैक्स नहीं लगेगा। इंडेक्सेशन के बाद ये मुनाफा कम दिखाया जाएगा, जिससे टैक्स बोझ घट जाएगा।

ETF में निवेश पर कोई TDS (Tax Deducted at Source) नहीं कटता। लेकिन, अगर आपने इसे डिमैट अकाउंट के जरिए खरीदा है और मुनाफा हुआ है, तो साल के अंत में आपको ITR में इसे दिखाना जरूरी है।

किसे चुनना चाहिए ETF?

ETF उन निवेशकों के लिए एक बेहतर विकल्प है जो डिजिटल तरीके से निवेश करना पसंद करते हैं और सोने या चांदी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का फायदा उठाना चाहते हैं। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए सुविधाजनक है जो फिजिकल गोल्ड या सिल्वर खरीदने की झंझट से बचना चाहते हैं — जैसे ज्वेलरी की सुरक्षा, स्टोरेज और मेकिंग चार्ज जैसी परेशानियां। ऐसे निवेशक ETF के जरिए आसानी से अपने पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं का एक्सपोजर जोड़ सकते हैं, वो भी पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित तरीके से।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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