केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 53.17 एकड़ सरकारी नमक भूमि महाराष्ट्र सरकार को हस्तांतरित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह भूमि दहिसर से वसई क्रीक तक एक प्रमुख सड़क परियोजना के निर्माण के लिए स्वीकृत की गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस जानकारी को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया है। उन्होंने बताया कि इस सड़क परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
सड़क परियोजना के दो चरण
पहले चरण में दहिसर से भायंदर तक का खंड, जिसे कोस्टल रोड भी कहा जाता है, बनाया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में भायंदर से वसई क्रीक तक सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगी बल्कि स्थानीय आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस सड़क से यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और यातायात की भीड़ कम होगी।
नमक भूमि के हस्तांतरण के नए नियम
केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष नमक भूमि के हस्तांतरण के संबंध में दिशा-निर्देशों में बदलाव किए हैं। इसके तहत यदि किसी केंद्रीय सार्वजनिक उद्यम या राज्य सरकार से आवेदन नहीं आता है, तो निजी क्षेत्र के लोग भी ऑनलाइन नीलामी में भाग लेकर इस भूमि को प्राप्त कर सकते हैं। यह पहल नमक भूमि के बेहतर उपयोग और विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।
भारत में नमक भूमि की व्यापकता
भारत में लगभग 60,000 एकड़ नमक भूमि विभिन्न राज्यों में फैली हुई है। इनमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, गुजरात और कर्नाटक प्रमुख हैं। यह भूमि देश की अर्थव्यवस्था में नमक उत्पादन के साथ-साथ विकास परियोजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। नमक भूमि के बेहतर उपयोग से स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा। इस तरह से ठाणे जिले में नमक भूमि हस्तांतरण और सड़क परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा।
