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रिटायरमेंट के साथ हेल्थ सिक्योरिटी का डबल फायदा! PFRDA ने लॉन्च किया ‘NPS स्वास्थ्य’ का नया चरण

NPS Swasthya : पेंशन कोष नियामक PFRDA ने ‘एनपीएस स्वास्थ्य’ पहल के दूसरे पायलट चरण की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्ति योजना के साथ लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

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एनपीएस स्वास्थ्य पहल का दूसरा चरण शुरू (तस्वीर-isotck)

Photo : iStock

NPS Swasthya: पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने अपनी नई पहल ‘एनपीएस स्वास्थ्य’ के दूसरे पायलट चरण की शुरुआत कर दी है। यह योजना खास तौर पर लोगों को रिटायरमेंट के साथ-साथ स्वास्थ्य सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है। पीएफआरडीए का कहना है कि यह पहल बुजुर्गों और सेवानिवृत्त लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य खर्च भी तेजी से बढ़ता है।

क्या है ‘एनपीएस स्वास्थ्य’ योजना

‘राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली’ यानी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत शुरू की गई यह नई पहल एक मल्टी-पार्टनर प्रोग्राम है। इसका मकसद लोगों को एक साथ वित्तीय सुरक्षा (पेंशन) और स्वास्थ्य सुरक्षा (इंश्योरेंस व इलाज) उपलब्ध कराना है। आसान शब्दों में कहें तो यह योजना रिटायरमेंट के बाद आने वाली दो बड़ी चिंताओं पैसे और स्वास्थ्य दोनों को कवर करने की कोशिश करती है।

किन संस्थाओं की क्या भूमिका है

इस योजना में कई संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं। पीएफआरडीए इसमें नियामक की भूमिका निभा रहा है। वहीं Medi Assist Healthcare Services इस योजना के मुख्य तकनीकी भागीदार के रूप में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया आसान और ऑनलाइन हो सके। ग्राहकों के रजिस्ट्रेशन और केवाईसी की सुविधा के लिए CAMS KRA सहयोग कर रही है। इसके अलावा, Tata Pension Fund और Axis Pension Fund को इस योजना के लिए पेंशन फंड मैनेजर नियुक्त किया गया है, जो निवेश और फंड मैनेजमेंट का काम संभालेंगे।

बीमा और क्लेम से जुड़ी सुविधाएं

इस योजना में स्वास्थ्य बीमा की सुविधा भी जोड़ी गई है। Aditya Birla Health Insurance इसमें एकीकृत टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस कवर प्रदान करती है। इसका मतलब है कि बेसिक इंश्योरेंस के ऊपर अतिरिक्त सुरक्षा भी मिलेगी। वहीं, Medi Assist TPA क्लेम मैनेजमेंट का काम देखती है। यानी जब कोई व्यक्ति इलाज कराता है और बीमा क्लेम करता है, तो उसकी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की जिम्मेदारी इसी संस्था की होती है।

क्यों जरूरी है यह पहल

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक पीएफआरडीए के अनुसार, भारत में रिटायरमेंट के बाद स्वास्थ्य खर्च तेजी से बढ़ रहा है और यह एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अनुमान है कि 2026 तक स्वास्थ्य देखभाल की लागत 11.5% से 14% तक बढ़ सकती है, जो सामान्य महंगाई दर से काफी ज्यादा है। इसका सीधा असर लोगों की बचत और वित्तीय सुरक्षा पर पड़ता है। यानी, अगर किसी व्यक्ति ने रिटायरमेंट के लिए पैसा जमा भी किया है, तो बढ़ते मेडिकल खर्च उस बचत को तेजी से खत्म कर सकते हैं। यही कारण है कि ‘एनपीएस स्वास्थ्य’ जैसी योजना की जरूरत महसूस की गई।

लोगों को क्या फायदा होगा

इस योजना से लोगों को एक ही प्लेटफॉर्म पर पेंशन और हेल्थकेयर की सुविधा मिलेगी। इससे उन्हें अलग-अलग जगह निवेश और बीमा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही, डिजिटल सिस्टम होने से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और आसान होगी। सबसे बड़ा फायदा यह है कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों तरह की सुरक्षा मिलेगी। इससे लोगों को भविष्य की चिंता कम होगी और वे अपने जीवन को ज्यादा सुरक्षित तरीके से जी सकेंगे।

आगे क्या उम्मीद

‘एनपीएस स्वास्थ्य’ का दूसरा पायलट चरण शुरू होने के बाद उम्मीद है कि इसे धीरे-धीरे बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा। अगर यह पहल सफल रहती है, तो आने वाले समय में यह भारत की रिटायरमेंट योजना का एक अहम हिस्सा बन सकती है और लाखों लोगों को फायदा पहुंचा सकती है।

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Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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