केंद्र सरकार ने एविएशन सेक्टर में बड़ा और भविष्य को ध्यान में रखने वाला कदम उठाया है। Petroleum and Natural Gas Ministry ने एक नई अधिसूचना जारी कर Aviation Turbine Fuel (ATF) की परिभाषा और उससे जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इस बदलाव का उद्देश्य तेजी से बदल रहे ईंधन मानकों और नई तकनीकों के साथ तालमेल बिठाना है, खासकर तब जब दुनिया भर में क्लीन और वैकल्पिक ईंधनों की मांग बढ़ रही है।
ATF को सिंथेटिक फ्यूल के साथ मिलाकर इस्तेमाल

Aviation Turbine Fuel (Photo: istock)
नई अधिसूचना के तहत अब Aviation Turbine Fuel को सिंथेटिक फ्यूल के साथ मिलाकर (ब्लेंड करके) इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी गई है। पहले ATF को पारंपरिक हाइड्रोकार्बन ईंधन के रूप में ही परिभाषित किया जाता था, लेकिन अब इसमें सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन को भी शामिल कर दिया गया है। इससे ईंधन की परिभाषा ज्यादा व्यापक हो गई है और उद्योग को स्पष्ट दिशा मिल गई है।
क्या होता है सिंथेटिक फ्यूल
सिंथेटिक फ्यूल (Synthetic Fuel) ऐसा ईंधन होता है, जिसे प्राकृतिक रूप से सीधे जमीन से नहीं निकाला जाता, बल्कि अलग-अलग कच्चे पदार्थों और रासायनिक प्रक्रियाओं की मदद से आर्टिफिशियल तरीके से बनाया जाता है। यानी यह पेट्रोल या डीजल की तरह प्राकृतिक तेल (crude oil) से नहीं बनता, बल्कि लैब या इंडस्ट्री में तैयार किया जाता है।
सिंथेटिक फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी
सरकार का यह कदम साफ तौर पर पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एविएशन सेक्टर को ग्लोबल स्तर पर कार्बन उत्सर्जन का एक बड़ा स्रोत माना जाता है और इसे कम करने के लिए सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) और सिंथेटिक ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है। नई नीति से ऐसे ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
एविएशन फ्यूल में ब्लेंडिंग को बढ़ावा दे रहा भारत
भारत पहले ही एविएशन फ्यूल में ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2027 तक ATF में 1% सस्टेनेबल फ्यूल मिलाया जाए, जिसे 2028 तक 2% और 2030 तक 5% तक बढ़ाया जा सकता है। इस नए नियम से इन लक्ष्यों को हासिल करना और आसान हो जाएगा।
एयरलाइंस कंपनियों और फ्यूल सप्लायर्स को भी फायदा
इसके अलावा, इस बदलाव से एयरलाइंस कंपनियों और फ्यूल सप्लायर्स को भी फायदा होगा। अब उन्हें ईंधन के इस्तेमाल और सप्लाई को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिलेगी, जिससे ऑपरेशन आसान होगा और नई टेक्नोलॉजी अपनाने में भी मदद मिलेगी। यह कदम भारत को ग्लोबल एविएशन मार्केट में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में भी सहायक हो सकता है।
निवेश और रिसर्च को भी मिलेगा बढ़ावा
केंद्र के इस फैसले से देश में नई इंडस्ट्री, निवेश और रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा। ATF में सिंथेटिक फ्यूल ब्लेंडिंग की अनुमति देना भारत के एविएशन सेक्टर को अधिक आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है।
