1 मई 2026 को जहां भारत में गैस की कीमतों को लेकर हलचल तेज है, वहीं हमारे पड़ोसी देश नेपाल से ईंधन की कीमतों में कटौती की खबर आई है। नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी करने का फैसला किया है। ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल में पेट्रोल की कीमतों में 2 रुपये और डीजल की कीमतों में 12 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। तेल की कीमतों में यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की घटती दरों और घरेलू अर्थव्यवस्था को सहारा देने के उद्देश्य से किया गया है।
नेपाल में पेट्रोल-डीजल के नए रेट
नेपाल में इस कटौती के बाद नई कीमतें प्रभावी हो गई हैं। अब वहां पेट्रोल 214।50 नेपाली रुपये और डीजल-मिट्टी का तेल 222।50 नेपाली रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। हालांकि, भारतीय नजरिए से देखा जाए तो यह कटौती सुनने में बड़ी लगती है, लेकिन हकीकत में नेपाल में तेल के दाम भारत के मुकाबले अब भी काफी ज्यादा हैं। अगर भारतीय मुद्रा (INR) में इन कीमतों की तुलना करें, तो नेपाल में डीजल की कीमत अभी भी करीब 140 रुपये प्रति लीटर के आसपास बैठती है, जबकि भारत के प्रमुख शहरों में यह 89 से 94 रुपये के बीच बिक रहा है।
हवाई ईंधन और गैस पर नहीं मिली राहत
जहां एक ओर पेट्रोल और डीजल सस्ता हुआ है, वहीं दूसरी ओर नेपाल में हवाई ईंधन (ATF) और एलपीजी (LPG) गैस की कीमतों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले हवाई ईंधन की कीमतों में इजाफा किया है। इसके अलावा, रसोई गैस की कीमतों में भी कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है। यह स्थिति दर्शाती है कि नेपाल सरकार परिवहन और माल ढुलाई की लागत कम करने के लिए डीजल पर तो ध्यान दे रही है, लेकिन अन्य ऊर्जा क्षेत्रों में उसे अब भी वैश्विक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण तेल की कीमतों में होने वाले इस तरह के बदलावों का सीधा असर सीमावर्ती क्षेत्रों (Border areas) पर पड़ता है। जब नेपाल में तेल सस्ता होता है, तो अक्सर सीमा पार से तस्करी या लोगों का वहां जाकर तेल भरवाने का सिलसिला बढ़ जाता है। हालांकि, मौजूदा कीमतों को देखते हुए भारतीय नागरिकों के लिए नेपाल जाकर तेल भरवाना फायदेमंद नहीं है, क्योंकि भारत में ईंधन अब भी काफी सस्ता बना हुआ है। लेकिन नेपाल के भीतर रहने वाले लोगों और वहां के ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए 12 रुपये की कटौती एक बड़ी राहत साबित होगी।
