Paytm यानी One 97 Communications के शेयर में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली है। Share Market में जहां आज तेजी है। वहीं, फिनटेक दिग्गज Paytm Share 7% से ज्यादा टूट गया है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को Paytm Stock न केवल 7% टूटा, बल्कि अपने अहम 200 DMA (200-Daily Moving Average) के नीचे आ गया। तकनीकी तौर पर यह एक बड़ा Bearish संकेत माना जाता है, क्योंकि यह लंबी अवधि के ट्रेंड के कमजोर होने की तरफ इशारा करता है।
क्यों टूटा Paytm शेयर?
सबसे बड़ा ट्रिगर रहा कंपनी का हालिया खुलासा, जिसमें Paytm Payments Bank (PPBL) के बंद होने (winding-up) की प्रक्रिया शुरू करने की बात सामने आई। RBI की तरफ से लाइसेंस रद्द होने के बाद यह कंपनी ने यह फैसला लिया है। कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि इसका बिजनेस पर कोई बड़ा असर नहीं होगा, लेकिन बाजार ने इसे नकारात्मक रूप में लिया। निवेशकों की धारणा है, इससे कंपनी का एक बिजनेस कम हुआ है, जिससे ओवरलऑल रेवेन्यू और एक्सपेंशन की रणनीति प्रभावित होती दिख रही है।
200 DMA के नीचे आने का क्या मतलब?
जब कोई स्टॉक 200 DMA के नीचे जाता है, तो इसका मतलब होता है कि शेयर का लॉन्ग टर्म लंबी ट्रेंड कमजोर हो रहा है। इसके साथ ही इससे यह भी संकेत मिलता है कि कमजोरी की वजह, बड़े वॉल्यूम में शेयरों की बिकवाली है। यानी , बड़े निवेशक (FIIs/DIIs) धीरे-धीरे शेयर से बाहर निकल रहे हो सकते हैं, ऐसे में यह गिरावट आगे और बढ़ सकती है, इसके अलावा वापस ऊपर आना भी मुश्किल होता है। बहरहाल, Paytm के केस में यह गिरावट सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि फंडामेंटल ट्रिगर और सेंटीमेंट शॉक का कॉम्बिनेशन है।
कैसा है Paytm का बिजनेस मॉडल?
Paytm का बिजनेस मॉडल असल में पेमेंट, लेंडिंग और मर्चेंट इकोसिस्टम से जुड़ा है, जो इसे लॉन्ग टर्म में स्टेबल रेवेन्यू सोर्स देते हैं। लेकिन, रेगुलेटरी जोखिम अभी भी बना हुआ है। एक बिजनेस के अचानक बंद होने का असर कंपनी के फाइनेंशियल्य पर दिख सकता है। इसके अलावा कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी अब भी पूरी तरह स्थिर नहीं है। यही वजह है कि ऐसी खबरें निवेशकों का सेंटीमेंट बिगाड़ देती हैं। ऐसे में निवेशक Paytm को यह “value buy” कम और “high risk bet” के तौर पर देख रहे हैं।Paytm स्टॉक का भविष्य क्या है?
Paytm Share का फ्यूचर पूरी तरह तीन फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। इसमें सबसे अहम है कि रेगुलेटरी स्पष्टता। खासतौर पर Paytm के RBI से जुड़े सभी मुद्दे पूरी तरह खत्म होने तक इस स्टॉक पर निवेशकों का पूरा भरोसा लौटना मुश्किल है। इसके अलावा दूसरा अहम फैक्टर है प्रॉफिटेबिलिटी, खासतौर पर कंपनी के EBITDA यानी ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई और नेट प्रॉफिट की स्थिरता जरूरी है।
क्या है असली वैल्यू ड्राइवर है?
अगर तीन फैक्टर पर कंपनी का शेयर स्थिर हो जाता है, तो ये तीनों ट्रिगर का काम करेंगे और Paytm में रिवाइवल संभव है। फिलहाल,
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ बड़े निवेशक/संस्थागत शेयरहोल्डर्स आंशिक हिस्सेदारी घटा रहे हैं।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
