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एक डील से विजय शेखर शर्मा ने साधे कई निशाने, जानें Paytm को क्या मिलेंगे फायदे

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Aug 7, 2023, 12:55 PM IST

Paytm Founder Vijay Shekhar Sharma Big Deal: असल में इस डील के पहले पेटीएम में एंटफिन (नीदरलैंड्स) होल्डिंग की पेटीएम में 23.79 फीसदी हिस्सेदारी थी। जबकि विजय शेखर शर्मा के पास 9.22 फीसदी हिस्सेदारी थी। एंटफिन (नीदरलैंड्स) होल्डिंग चीन की कंपनी एंट ग्रुप की सब्सिडियरी कंपनी है। जिसमें अलीबाबा की हिस्सेदारी है। ऐसे में अभी तक भले ही विजय शेखर शर्मा ने 2007 में पेटीएम की स्थापना की थी, लेकिन ओनरशिप के मामले में चाइनीज निवेशक ही भारी थे।

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पेटीएम फाउंडर विजय शेखर शर्मा हुए मजबूत

Paytm Founder Vijay Shekhar Sharma Big Deal: पेटीएम (Paytm) के फाउंडर विजय शेखर शर्मा (Vijay Shekhar Sharma) वन97 कम्युनिकेशंस (One97 Communications)यानी पेटीएम में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने जा रहे हैं। नई डील के तहत वह एंट फाइनेंशियल (Ant Financial)की 10.30 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेंगे। इसके साथ ही विजय शेखर शर्मा की पेटीएम में 19.42 फीसदीहिस्सेदारी हो जाएगी। जो कि किसी निवेशक की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होगी। इसके बाद पेटीएम पर चीन का दबदबा कम हो जाएगा, क्योंकि अब फाउंडर विजय शेखर शर्मा सबसे मजबूत होंगे।

कैसे था चीन का दबदबा

असल में इस डील के पहले पेटीएम में एंटफिन (नीदरलैंड्स) होल्डिंग की पेटीएम में 23.79 फीसदी हिस्सेदारी थी। जबकि विजय शेखर शर्मा के पास 9.22 फीसदी हिस्सेदारी थी। एंटफिन (नीदरलैंड्स) होल्डिंग चीन की कंपनी एंट ग्रुप की सब्सिडियरी कंपनी है। जिसमें अलीबाबा की हिस्सेदारी है। ऐसे में अभी तक भले ही विजय शेखर शर्मा ने 2007 में पेटीएम की स्थापना की थी, लेकिन ओनरशिप के मामले में चाइनीज निवेशक ही भारी थे। नई डील के बाद शर्मा की ओनरशिप मजबूत हो गई है। इसके पहले सॉफ्टबैंक की सहयोगी कंपनी SVF India Holdings (Cayman) Ltd ने भी पेटीएम से इसी साल 2.07 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी थी।

विजय शेखर शर्मा को ये फायदा

  • इस डील से विजय शेखर शर्मा ने कई निशाने साध लिए हैं। सबसे पहली बात तो यह है कि उनकी कंपनी पर ओनरशिप मजबूत हो गई है।
  • इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शर्मा के सामने किसी होस्टाइल टेकओवर का खतरा नहीं रहेगा। क्योंकि अब ज्यादा हिस्सेदारी उनके पास है।
  • इसके साथ ही चीन और भारत सरकार की टेंशन को देखते हुए, सिक्योरिटी और दूसरे चिंताएं कम होंगी।
  • पेटीएम पेमेंट बैंक और पेटीएम पीजी बिजनेस रफ्तार पकड़ सकता है। पिछले कुछ समय से आरबीआई ने कई तरह के बंदिशें लगा कर रखी हैं।

पेटीएम की कमाई

पहली तिमाही के आंकड़ों को देखा जाय तो पेटीएम का घाटा कम हुआ है। और उसके कमाई में 39.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 2341 करोड़ रुपये रहा है। जबकि उसका घाटा 45 फीसदी घटकर 348 करोड़ रुपये पर आ गया है। जाहिर है इस नई डील के बाद विजय शेखर शर्मा को नया बूस्ट मिलेगा और उसका असर कंपनी के बिजनेस ग्रोथ में दिखेगा।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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