Pakistan economy Vs India GDP: भारत और पाकिस्तान दोनों पड़ोसी देश हैं लेकिन दोनों की अर्थव्यवस्था में जमीन-आसमान का अंतर है। एक ओर IMF के कर्ज पर निर्भर पाकिस्तानी इकोनॉमी अभी भी हिचकोले खा रही है। वहीं, दूसरी ओर भारतीय जीडीपी तमाम संकटों को झेलते हुए अपनी ग्रोथ रफ्तार बढ़ा रही है। आज इन दोनों अर्थव्यवस्था को लेकर आईएमएफ और ADB ने अलग-अलग अनुमान जारी किए। आइए पढ़ते हैं पूरी रिपोर्ट।
भारी कर्ज में डूबी पाकिस्तानी इकोनॉमी: आईएमएफ
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के ताजा आकलन के मुताबिक मुश्किलों में घिरी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ने थोड़े समय के लिए जरूर स्थिरता हासिल कर ली है, लेकिन वह अब भी भारी कर्ज, कमजोर निवेश और रोजगार वृद्धि की सुस्ती के बोझ से दबी हुई है। समाचारपत्र 'डॉन' में बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ का यह आकलन मंगलवार को उस वक्त जारी किए गए, जब पाकिस्तान को करीब 1.2 अरब डॉलर की नई किस्त जारी करने की घोषणा की गई।
इसके मुताबिक, पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि 2025-26 में 3.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है जो पिछले वित्त वर्ष में 2.6 प्रतिशत थी। यह रफ्तार देश की 24.05 करोड़ आबादी की जनसंख्या वृद्धि दर के बराबर ही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की जनसंख्या भी तेज गति से बढ़ती जा रही है। वर्ष 2025 के मध्य के आधिकारिक अनुमान 2.55 प्रतिशत की वृद्धि दर दिखाते हैं।
भारत के वृद्धि दर अनुमान को बढ़ाकर 7.2% किया: एडीबी
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया। इसकी प्रमुख वजह हाल में जीएसटी दरों में कटौती से घरेलू खपत को मिली मजबूती है। भारतीय अर्थव्यवस्था की यह तेज रफ्तार एशिया को भी तेजी से बढ़ने में मदद करेगी, जो इस साल 4.8 प्रतिशत के पिछले अनुमान के मुकाबले अब 5.1 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। एडीबी की दिसंबर के लिए जारी एशिया विकास परिदृश्य रिपोर्ट कहती है, ''वर्ष 2025 के लिए भारत के वृद्धि अनुमान को 7.2 प्रतिशत कर दिया गया है, जो दूसरी तिमाही में अपेक्षा से अधिक मजबूत विस्तार को दर्शाता है। कर में कटौतियों ने खपत को मजबूती दी।''
8.2% की दर से बढ़ी थी भारतीय अर्थव्यवस्था
सितंबर में समाप्त दूसरी तिमाही के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो पिछली छह तिमाहियों में सबसे अधिक है। पहली तिमाही में यह 7.8 प्रतिशत थी। इस तरह चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भारत आठ प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल कर चुका है।
एडीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मजबूत वृद्धि आपूर्ति पक्ष में विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के मजबूत विस्तार और मांग पक्ष में खपत एवं निवेश की वृद्धि के कारण हुई है। हालांकि मनीला स्थित इस बहुपक्षीय विकास बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
