बिजनेस

क्या कहलाता है पाकिस्तान-IMF का 'रिश्ता', प्यार और नफरत का जटिल संगम

Pakistan-IMF Relationship: पाकिस्तान आईएमएफ के साथ अजीब ‘लव एंड हेट’ रिश्ते में फंसा है। गंभीर आर्थिक संकट से जूझते हुए सरकार आईएमएफ कर्ज को अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मान रही है। वहीं, मीडिया, पूर्व मंत्री और विश्लेषक देश की बदहाली के लिए आईएमएफ की सख्त नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

Pakistan-IMF Relationship

पाकिस्तान की डगमगाती अर्थव्यवस्था: आईएमएफ बना जीवनरेखा या जहर?

Pakistan-IMF Relationship : पाकिस्तान आर्थिक संकट और आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) के बीच एक जटिल रिश्ते में फंसा हुआ नजर आता है। देश की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और इसे संभालने के लिए सरकार आईएमएफ से मिलने वाले कर्ज पर निर्भर है। यह कर्ज पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा बन गया है, जिससे सरकार को अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और डॉलर की कमी को दूर करने में मदद मिलती है। हालांकि पाकिस्तान के मीडिया और राजनीतिक विशेषज्ञ आईएमएफ की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हैं। कई पूर्व मंत्री और आर्थिक विश्लेषक यह मानते हैं कि आईएमएफ की सख्त नीतियों ने देश की आर्थिक समस्या को और बढ़ा दिया है। अखबार द न्यूज इंटरनेशनल में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, पाकिस्तान और आईएमएफ का लंबा जुड़ाव अब एक व्यवस्थित विनाश का रूप ले चुका है।

आईएमएफ नीतियों के असर

आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक लेख में कहा गया है कि आईएमएफ के कार्यक्रमों में स्थिरीकरण और वित्तीय सख्ती जैसी नीतियों का दबाव पड़ा है। इसके चलते ऊर्जा की लागत में भारी वृद्धि हुई, औद्योगिक उत्पादन घट गया, गरीबी बढ़ी और देश की अर्थव्यवस्था गैर-औद्योगिकीकरण की ओर धकेल दी गई। ऐसे उपायों से आम लोगों की जीवनशैली प्रभावित हुई और सामाजिक-आर्थिक विकास की गति धीमी हो गई। लेख में आगे यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की विकास रणनीति का मुख्य केंद्र शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इनोवेशन होना चाहिए था। इससे देश प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था से निकलकर तकनीक आधारित ज्ञान अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ सकता था। लेकिन इसके बजाय, उल्टा हुआ। अब देश एक गंभीर अस्तित्वगत संकट का सामना कर रहा है।

शिक्षा और निर्यात पर संकट

पाकिस्तान के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय काफी खराब स्थिति में हैं। शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है और युवाओं को पर्याप्त कौशल और प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा। इसी के साथ देश का निर्यात भी कम हो गया है। पांच साल पहले पाकिस्तान का निर्यात लगभग 35 अरब डॉलर था, जो अब लगभग 30 अरब डॉलर तक गिर गया है। गरीबी में इजाफा हुआ है और प्रतिभाशाली युवा और उद्योग समूह बड़े पैमाने पर विदेशों की ओर पलायन कर रहे हैं।

उद्योग और रोजगार पर असर

पाकिस्तान के औद्योगिक परिदृश्य में पिछले 5 वर्षों में भारी गिरावट आई है। ऊर्जा की बढ़ती लागत, भारी टैक्स बोझ और नीतिगत अनिश्चितता के कारण कई स्थानीय विनिर्माण इकाइयां बंद हो गई हैं। उद्योग जगत के नेता दावा करते हैं कि प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। क्षेत्रीय आंकड़े भी इसी गिरावट को दिखाते हैं। उदाहरण के लिए, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पिछले छह सालों में करीब 795 औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं। इनमें बड़ी संख्या ऊंची उपयोगिता लागत और घटते निवेश विश्वास के कारण बंद हुई। इससे हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई।

वस्त्र उद्योग और निर्यात संकट

पाकिस्तान का वस्त्र उद्योग, जो देश का पारंपरिक निर्यात इंजन माना जाता है, यह भी काफी नुकसान में है। उद्योग सूत्रों का अनुमान है कि देशभर में कम से कम 144 टेक्सटाइल मिलें बंद हो गई हैं। इसके साथ ही गारमेंट सेक्टर में भी बड़ी संख्या में इकाइयों के बंद होने से हजारों नौकरियां खत्म हो गई हैं और निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ गई है।

कॉरपोरेट पलायन और विदेशी निवेश

पाकिस्तान में कॉरपोरेट पलायन की लहर भी तेज हो रही है। माइक्रोसॉफ्ट जैसे वैश्विक कंपनियों ने 25 साल बाद पाकिस्तान में अपने संचालन को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके अलावा करीम, शेल, टेलीनॉर, और प्रॉक्टर एंड गैम्बल जैसी कंपनियां या तो पाकिस्तान से बाहर जा रही हैं या अपनी मौजूदगी घटा रही हैं। इस वजह से विदेशी निवेश और रोजगार पर गंभीर असर पड़ा है।

सामान्य जनता और उद्योग जगत के लिए आईएमएफ के साथ पाकिस्तान का रिश्ता मिश्रित परिणाम लेकर आया है। जहां सरकार इसे अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मान रही है, वहीं आईएमएफ की सख्त नीतियों ने देश के सामाजिक और औद्योगिक विकास को कमजोर किया है। शिक्षा, इनोवेशन, औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में गिरावट पाकिस्तान की लॉन्गटर्म विकास योजनाओं के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।

इस तरह, पाकिस्तान और आईएमएफ का यह ‘लव एंड हेट’ रिश्ता देश के आर्थिक और सामाजिक भविष्य पर गहरा असर डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पाकिस्तान स्थायी समाधान और लॉन्ग टर्म विकास की दिशा में नहीं बढ़ता, तो यह संकट और गहरा हो सकता है।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।

रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

End of Article